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नई शिक्षा नीति में अनेकों बदलाव, योजनाओं में धार्मिक संस्थान भी हो शामिल
Fri, 21 Jun 2019 10:21 AM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Fri, 21 Jun 2019 10:21 AM IST
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राष्ट्रीय शिक्षा सुधार योजनाओं में अब सरकार और अधिकारी के अलावा धार्मिक संस्थानों को भी शामिल होने के लिए सुक्षाव दिया है। पूर्व इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सुक्षाव दिया है कि शिक्षा सुधार योजनाओं में हिंदू मठ, आश्रम, गुरुद्वारा, इस्लामिक ट्रस्ट, बौद्ध और जैन समुदाय को भी शामिल किया जाना चाहिए। इतिहास में भी इन धार्मिक संस्थानों के शिक्षा में बेहतर योगदान का जिक्र है। इसलिए शिक्षा सुधार योजनाओं में इन धार्मिक संस्थानों को जोड़ना चाहिए।
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नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट में शिक्षा सुधार योजनाओं पर पूर्व इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली कमेटी का मानना है कि अधिकारियों और सरकारों की बंद कमरे में बनने वाली योजनाओं में जब धार्मिक संस्थान भी साथ होंगे तो शिक्षा में ऐसी योजनाएं बनेंगी, जिसके कारण सभी धर्मों के विद्यार्थियों में प्रेमभाव बढ़ेगा और देश का विकास सर्वोपरि होगा। कमेटी ने शिक्षा सुधार योजनाओं पर विभिन्न वर्गों को जोड़ने पर जोर दिया है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि बिजनेस और इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन भी बेहद जरूरी होता है। बोर्ड परीक्षा और कॉलेज डिग्री लेने के बाद मार्केट में किस विषय की मांग रहेगी, क्या कोर्स सबसे अच्छा विकल्प है, इसकी जानकारी बिजनेस और इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन से आसानी से उपलब्ध होगी। वे विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने में सहयोग के साथ आर्थिक मदद भी देंगे। इसके अलावा शोधकार्य में भी मदद मिलेगी।
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पूर्व विद्यार्थी और स्थानीय कम्यूनिटी का सहयोग जरूरी
संस्थान को आगे बढ़ाने में दूसरा सबसे बड़ा सहयोग पूर्व विद्यार्थी और स्थानीय कम्यूनिटी से मिलेगा। पूर्व विद्यार्थी संस्थान की कमियों से अच्छे से वाकिफ होंगे। जबकि स्थानीय लोग सुरक्षा, सफाई आदि में सहयोग करेंगे। पूर्व विद्यार्थियों का स्थानीय लोगों से पहले से परिचय होता है। ऐसे में जब दोनों मिलकर साथ आएंगे तो बदलाव तो दिखेगा ही।
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