JNU: पीएचडी प्रवेश के लिए UGC NET का स्कोर होगा मान्य, केवल इन दो विषयों के लिए होगा एंट्रेस एग्जाम
JNU PhD Admission: जेएनयू ने घोषणा की है कि वह दो पीएचडी पाठ्यक्रमों कोरियाई अध्ययन और सिनेमा अध्ययन में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। वहीं, दूसरी ओर जेएनयू छात्र संघ का अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन जारी है।
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JNU PhD Admission: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने कहा है कि पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए यूजीसी नेट के स्कोर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने केवल दो विषयों के लिए अपनी खुद की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की है। वहीं, दूसरी ओर जेएनयू छात्र संघ का अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन जारी है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने घोषणा की है कि वह दो पीएचडी पाठ्यक्रमों कोरियाई अध्ययन और सिनेमा अध्ययन में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा, जो यूजीसी-नेट के अंतर्गत नहीं आते हैं। इस बीच, जेएनयू छात्र संघ द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 7वें दिन में प्रवेश कर गई।
आधिकारिक विवरणिका में कहा गया है कि अन्य सभी डॉक्टरेट कार्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC NET 2025) में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा।
जेएनयू पीएचडी प्रवेश के लिए 7 जुलाई तक करें आवेदन
विश्वविद्यालय ने यूजीसी नेट या सीएसआईआर नेट की सभी तीन श्रेणियों में उम्मीदवारों के लिए जेएनयू पीएचडी प्रवेश शुरू कर दिया है। आवेदन पत्र एडमिशन पोर्टल jnuee.jnu.ac.in पर उपलब्ध है। एडमिशन के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 7 जुलाई है। एडमिशन पॉलिसी के मुताबिक, यूजीसी नेट स्कोर को 70% वेटेज दिया जाएगा और बाकी 30% वाइवा-वॉयस के लिए होगा।
जेएनयूएसयू की भूख हड़ताल जारी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के पीएचडी दाखिले का संशोधित कार्यक्रम जारी करने की मांग की है। जेएनयू छात्र संघ ने सभी पीएचडी कार्यक्रमों के लिए जेएनयूईई को बहाल करने की मांग को लेकर सातवें दिन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वे "शैक्षणिक न्याय और छात्र अधिकारों के लिए लड़ाई" जारी रखेंगे। सभी पीएचडी प्रवेशों के लिए JNUEE को बहाल करने की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराते हुए "मनमाने प्रॉक्टरियल जांच" को वापस लेने का अनुरोध किया गया।
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