फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   JNU Vice Chancellor Santishree D Pandit advised students not to compromise studies for politics

JNU VC: राजनीति के लिए पढ़ाई से समझौता न करें छात्र, जेएनयू कुलपति ने कही ये बातें

Sat, 13 Jan 2024 03:36 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Sat, 13 Jan 2024 03:36 PM IST
सार

JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में साल 2022 में कार्यभार संभालने वाली शांतिश्री डी पंडित ने कहा कि उन्होंने 2019 में फीस वृद्धि के विरोध में छात्रों के करिअर पर इसके प्रभाव को देखते हुए उनके खिलाफ सभी प्रॉक्टोरियल जांच वापस ले लीं।

विज्ञापन
JNU Vice Chancellor Santishree D Pandit advised students not to compromise studies for politics
JNU VC Santishree Dhulipudi Pandit - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा अपने परिसर में धरना देने के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए जाने को लेकर उपजे विवाद के बीच, जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी पंडित ने छात्रों को सलाह दी कि वे राजनीति के लिए पढ़ाई से समझौता न करें। पंडित ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई छात्रों की भविष्य में नौकरी हासिल करने की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं कह रहा है कि विरोध प्रदर्शन मत करो, लेकिन साथ ही अपनी शिक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इनमें से कई छात्र जो राजनीति में शामिल होते हैं, बाद में मेरे पास एक्सटेंशन मांगने आते हैं, जो नौकरी के लिए जाने पर उनकी प्रोफाइल में दिखाई देगा।
विज्ञापन


कुलपति ने इस्राइल-हमास संघर्ष पर जेएनयू में खुली बहस और व्याख्यानों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस पर कोई आंदोलन नहीं हुआ है, जो परिसर में आलोचनात्मक सोच की संस्कृति को दर्शाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में साल 2022 में कार्यभार संभालने वाली शांतिश्री डी पंडित ने कहा कि उन्होंने 2019 में फीस वृद्धि के विरोध में छात्रों के करिअर पर इसके प्रभाव को देखते हुए उनके खिलाफ सभी प्रॉक्टोरियल जांच वापस ले लीं। 

स्वतंत्रता को जिम्मेदारी के साथ करें व्यक्त

कुलपति ने कहा कि छात्रों को अपनी स्वतंत्रता को जिम्मेदारी के साथ व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) नियमावली को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत परिसर में अधिकारियों को उनकी ड्यूटी में बाधा डालने, शराब पीने या नियमों का उल्लंघन करने से रोकने के लिए परिसर में तेज गति से वाहन चलाने जैसी कुछ गतिविधियों के लिए दंडित किया जाएगा।

जेएनयू सीपीओ मैनुअल में संशोधन

जेएनयू ने पिछले साल नवंबर में अपना संशोधित सीपीओ मैनुअल जारी किया था, जिसके तहत परिसर में निषिद्ध क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करने पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और राष्ट्र विरोधी नारे लगाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जुर्माना नहीं बढ़ाया है, बल्कि उसने केवल मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) मैनुअल को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया है, जिससे परिसर में किसी भी नियम के उल्लंघन को रोकने के लिए उच्च न्यायालय की सिफारिशों के आधार पर इसे कानूनी रूप से मजबूत बनाया जा सके।

गैरकानूनी गतिविधियों में कमी 

जेएनयू कुलपति ने आगे दावा किया कि वीसी के रूप में उनके कार्यकाल में पिछले दो वर्षों में गैरकानूनी गतिविधियों में काफी कमी आई है। पंडित ने यह भी कहा कि कई प्रॉक्टोरियल जांचें वापस नहीं ली जा सकतीं, क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है, क्योंकि छात्र अदालत में चले गए हैं और अदालत की अवमानना के लिए कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed