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Jamshed J Irani Passes Away: नागपुर विश्वविद्यालय से पूरी की थी एमएससी की पढ़ाई, 86 की उम्र में निधन
Tue, 01 Nov 2022 02:54 PM IST
सौरभ पांडे
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: सौरभ पांडे
Updated Tue, 01 Nov 2022 02:54 PM IST
सार
देश के स्टील मैन कहे जाने वाले जमशेद जे ईरानी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है।
वह 86 साल के थे।
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Jamshed J Irani
- फोटो : socia media
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विस्तार
Jamshed J Irani Passes Away: टाटा स्टील के पूर्व मैनेजिंग डायेक्टर जमशेद जे ईरानी का 86 की उम्र में सोमवार देर रात निधन हो गया । जमशेद जे ईरानी को देश के स्टीलमैन के नाम से भी जाना जाता था। जमशेद ईरानी ने जमशेदपुर के टाटा मेन हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। उनके परिवार में पत्नी डेजी और तीन बच्चे जुबिन, नीलोफर और तनाज हैं।
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नागपुर से किया था एमएससी
जमशेद जे ईरानी का जन्म 2 जून 1936 को नागपुर में जिजी ईरानी और खोरशेद ईरानी के घर हुआ था। जमशेद जे ईरानी ने 1956 में साइंस कॉलेज नागपुर से BSC और 1958 में नागपुर विश्वविद्यालय से भूविज्ञान में एमएससी किया था। इसके बाद शेफील्ड विश्वविद्यालय, ब्रिटेन से उन्होंने 1960 में धातुकर्म में मास्टर्स और 1963 में PhD की उपाधि प्राप्त की। उन्हें भारतीय उद्योग जगत में उल्लेखनीय काम के लिए देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। डॉ. ईरानी की पहचान दूरदर्शी उद्यमी के तौर पर थी और उन्होंने 43 साल तक टाटा स्टील को अपनी सेवा देते हुए कंपनी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
जमशेद जे ईरानी का जन्म 2 जून 1936 को नागपुर में जिजी ईरानी और खोरशेद ईरानी के घर हुआ था। जमशेद जे ईरानी ने 1956 में साइंस कॉलेज नागपुर से BSC और 1958 में नागपुर विश्वविद्यालय से भूविज्ञान में एमएससी किया था। इसके बाद शेफील्ड विश्वविद्यालय, ब्रिटेन से उन्होंने 1960 में धातुकर्म में मास्टर्स और 1963 में PhD की उपाधि प्राप्त की। उन्हें भारतीय उद्योग जगत में उल्लेखनीय काम के लिए देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। डॉ. ईरानी की पहचान दूरदर्शी उद्यमी के तौर पर थी और उन्होंने 43 साल तक टाटा स्टील को अपनी सेवा देते हुए कंपनी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
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टाटा स्टील के बोर्ड से हुए थे रिटायर
जमशेद जे ईरानी 83 साल की उम्र में टाटा स्टील के बोर्ड से रिटायर हुए थे। ईरानी ने भारतीय स्टील उद्योग में करीब चार दशक से अधिक समय तक काम किया। उन्होंने साल 1963 में ब्रिटिश आयरन एंड स्टील रिसर्च एसोसिएशन, शेफील्ड में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उसके बाद साल 1968 में भारत लौटने पर निदेशक (आरएंडडी) के सहायक के रूप में टाटा स्टील में शामिल हो गए और उनके बेहतर काम को देखते हुए साल 1985 में उन्हें महाप्रबंधक और अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद साल 1992 में वह कंपनी के प्रबंध निदेशक बने और जुलाई 2001 तक इस पद पर रहे। ईरानी जून, 2011 में टाटा स्टील के बोर्ड से रिटायर हुए थे।
जमशेद जे ईरानी 83 साल की उम्र में टाटा स्टील के बोर्ड से रिटायर हुए थे। ईरानी ने भारतीय स्टील उद्योग में करीब चार दशक से अधिक समय तक काम किया। उन्होंने साल 1963 में ब्रिटिश आयरन एंड स्टील रिसर्च एसोसिएशन, शेफील्ड में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उसके बाद साल 1968 में भारत लौटने पर निदेशक (आरएंडडी) के सहायक के रूप में टाटा स्टील में शामिल हो गए और उनके बेहतर काम को देखते हुए साल 1985 में उन्हें महाप्रबंधक और अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद साल 1992 में वह कंपनी के प्रबंध निदेशक बने और जुलाई 2001 तक इस पद पर रहे। ईरानी जून, 2011 में टाटा स्टील के बोर्ड से रिटायर हुए थे।
जमशेद जे ईरानी को मिले थे ये पुरस्कार
जमशेद जे ईरानी को धातु विज्ञान में उनके योगदान के लिए 2008 में भारत सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। 1963 में, उन्होंने शेफील्ड में ब्रिटिश आयरन एंड स्टील रिसर्च एसोसिएशन के साथ अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में ईरानी को मानद नाइटहुड (KBE) प्रदान किया। 2007 में, भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। 1996 में, उन्हें रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग का इंटरनेशनल फेलो नामित किया गया था।
जमशेद जे ईरानी को धातु विज्ञान में उनके योगदान के लिए 2008 में भारत सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। 1963 में, उन्होंने शेफील्ड में ब्रिटिश आयरन एंड स्टील रिसर्च एसोसिएशन के साथ अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में ईरानी को मानद नाइटहुड (KBE) प्रदान किया। 2007 में, भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। 1996 में, उन्हें रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग का इंटरनेशनल फेलो नामित किया गया था।
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