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Hindi News ›   Education ›   International Mother Language Day, Students can study in mother tongue under the new education policy 2020

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस आज : 2021 सत्र से स्कूल से यूनिवर्सिटी तक मातृभाषा में पढ़ाई की आजादी

Sun, 21 Feb 2021 07:33 AM IST
Jeet Kumar सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 21 Feb 2021 07:33 AM IST
सार

  • नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार और पहचान दिलाने को किया प्रावधान 
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, पीएम के दिशा-निर्देश पर मेडिकल व इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा में करवाने की तैयारी

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International Mother Language Day, Students can study in mother tongue under the new education policy 2020
मातृभाषा में पढ़ाई,..... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय छात्र अगले सत्र से मातृभाषा में पढ़ाई करेंगे। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2021 सत्र से स्कूलों में पांचवी कक्षा तक अनिवार्य और राज्य चाहें तो आठवीं कक्षा तक अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करवा सकेंगे।

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इसके अलावा चुनिंदा आईआईटी और एनआईटी के छात्रों को अपनी मातृभाषा में बीटेक प्रोग्राम की पढ़ाई का  मौका मिल रहा है। खास बात यह है कि मेडिकल पढ़ाई भी मातृभाषा में करवाने की योजना तैयार हो रही है। 
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों के तहत मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा में होगी। इसका मकसद दूर-दराज के आखिररी छोर में बैठे सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले छात्र को आगे बढ़ाने केसाथ उसके माध्यम से उस भाषा को पहचान दिलाना है।
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वैज्ञानिकों के विश्लेषण के आधार पर यूनेस्को ने भी माना कि प्रारंभिक पढ़ाई मातृभाषा में ही होनी चाहिए। इसी के चलते नई शिक्षा नीति में प्रावधान किया गया है। मातृभाषा से ही बच्चे की प्रतिभा को निखारा जा सकता है।

बंगाली, कन्नड़, पंजाबी, तमिल, तेलगू, गुजराती, राजस्थानी समेत 22 भाषाओं की अपनी एक अलग पहचान है। यह विविधता में एकता को दर्शाती हैं। राज्य सरकार चाहें तो स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक पूरी पढ़ाई अपनी मातृभाषा में करवा सकती हैं। 

-बजट 2021 में सरंक्षण व अनुवाद का प्रावधान: 
भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से बचाने के लिए केंद्रीय बजट 2021 में उनके संरक्षण और अनुवाद के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इसके लिए देश के कई शहरों में केंद्र बनाए जाने हैं। इसमें 22भारतीय भाषाओं के अलावा क्षेत्रीय व विलुप्त होती भाषाओं पर शोध व पहचान दिलाने पर काम होगा। 

-एक भारत-श्रेष्ठ भारत यूनिवर्सिटी में लागू होगा: 
एक राज्य के छात्र को दूसरे राज्यों की भाषा, संस्कृति, खान-पान से जोडने वाला एक भारत-श्रेष्ठ भारत योजना 2021 से यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम में भी लागू होगा। इसकी प्रतियोगिता के अंक क्रेडिट के माध्यम से छात्र की डिग्री में जुड़ेंगे।

इसका सीधा लाभ कैंपस प्लेसमेंट या नौकरी के दौरान होगा। दरअसल मल्टीनेशनल कंपनी अब ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जोकि मल्टीकल्चर माहौल में आसानी से तालमेल बिठा सकें। 

-एआईसीटीई मातृभाषा में पढ़ाई का रोडमैप बना रही: 
देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में मातृभाषा में पढ़ाई के लिए रोडमैप बना  रही है। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट पढ़ाई की किताबों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करने के लिए स्पेशल ग्रांट भी देगी।


वहीं, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(एनटीए) जेर्ईई मेन्स और नीट के लिए राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड के साथ बैठक करके मूल्याकंन के आधार पर राष्ट्रीय  प्रतियोगी परीक्षाओं का पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। 

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