52वां अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस: शिक्षा के स्तर को कम करते ये सच
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जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए एक बेहतर व्यवस्था कायम की जाए। जिससे दुनिया में साक्षरता का स्तर बढ़ाया जा सके। कई देश ऐसे है जिनकी शिक्षा व्यवस्था का लोहा पूरी दुनिया में माना जाता है तो वहीं भारत में विश्व में भारत अर्थव्यस्था में तीसरे नंबर पर आता है लेकिन भारत में शिक्षा के स्तर में कुछ खास तरक्की नहीं हो सकी है। हालांकि भारत शिक्षा स्तर में निरंतर बड़े बदलाव देखे जा रहे है।
यूनेस्को की एक रिर्पोट के अनुसार भारत में 72.1 साक्षरता का स्तर पहंच चुका है। भारत पुरुष और महिला साक्षरता में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं। लेकिन ये आंकड़ें चौंकाने वाले साबित हो रहै हैं।
भारत में पुरुष 80.9 शिक्षित और महिलाएं 62.8 प्रतिशत साक्षरता के ग्राफ को छू रहे हैं। गैर-सरकारी संस्था साक्षारता को बढ़ाने के लिए साल 2022 तक 100 प्रतिशित अंक पाने की उम्मीद लगा रहे हैं।
भारत में विद्यालय की कमी
भारत में शिक्षा प्राप्त करने के लिए 6 लाख स्कूलों में कमरों की कमी उजागर हो रही है। लेकिन इसके विपरीत भारत में स्कूलों की कमी, क्लास रूम की कमी शिक्षा व्यव्स्था पर चोट करती है। ऐसे में भारत की शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़े होते हैं।
शौचालय न होने की वजह से बच्चे निरंतर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। वहीं शिक्षा व्यव्यथा में जातिवाद का नारा भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। यह अलग बात है भारतीय संविधान में अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए अलग प्रावधान है।
शिक्षा प्रणाली में एससी, एसटी जाति वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए व्यव्स्था की गई थी। लेकिन आज सामान्य वर्ग के लोग इस तरह की शिक्षा प्रणाली के खिलाफ आवाज भी बुलंद कर कर रहे है। क्योंकि उनका मानना है कि योग्यता के आधार पर स्कूल और कॉलेजो में दाखिले किए जाएं।
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