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प्रयास : पूर्वोत्तर के संस्थानों में कैसे पहुंचे बेहतर इंटरनेट, समाधान तलाशेगी आईआईटी और एआईसीटीई

Wed, 10 Aug 2022 09:50 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 10 Aug 2022 09:50 PM IST
सार

आईआईटी, गुवाहाटी और एआईसीटीई पूर्वोत्तर के तकनीकी संस्थानों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र के दूरदराज के हिस्सों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

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IIT Guwahati, AICTE Collaborate For Financial, Technical Expertise In North-East Institutions
आईआईटी, गुवाहाटी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), गुवाहाटी, पूर्वोत्तर के तकनीकी संस्थानों में पानी, बिजली की निर्बाध आपूर्ति और इंटरनेट तक पहुंच की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के साथ साझेदारी कर रहा है। आईआईटी, गुवाहाटी और एआईसीटीई इन संस्थानों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र के दूरदराज के हिस्सों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण की दिशा में काम करेंगे। इस क्षेत्र में अपनी तरह की इस पहली परियोजना का पहला चरण शुरू किया जा चुका है। 

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स्थायी बुनियादी ढांचा प्रदान करने का प्रयास

साझेदारी पर बोलते हुए, आईआईटी, गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा, आईआईटी इस क्षेत्र में संस्थानों के साथ विस्तृत नेटवर्क बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि गुणवत्ता ज्ञान-आधारित, कौशल विकास और तकनीकी विशेषज्ञता पूर्ण समग्र शिक्षा और सहायक स्थायी बुनियादी ढांचा प्रदान किया जा सके। इस परियोजना की संचालन समिति में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर शरद बी गोखले, रसायन विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर गोपाल दास, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संतोष कुमार द्विवेदी और प्रोफेसर चंदन महंत शामिल हैं। 
 

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पहले चरण में 416 किलोवाट बिजली उत्पन्न की

आईआईटी, गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर टीजी सीताराम ने बताया कि ये सभी आईआईटी-गुवाहाटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग से हैं। प्रोफेसर गोखले के नेतृत्व वाली प्रोजेक्ट टीम में संस्थान के साथ-साथ एआईसीटीई के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। परियोजना के पहले चरण के माध्यम से, कुल 416 किलोवाट बिजली उत्पन्न की गई है जो प्रयोगशालाओं, कार्यालयों और स्ट्रीट लाइट में निर्बाध रूप से उपयोग में लाने में मददगार साबित हो रही है। 
 

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दूसरे चरण में 33 नए संस्थान शामिल होंगे

पहले चरण में जलापूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए संस्थानों को सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं। आईआईटी की ओर से कहा गया है कि पहले चरण की परियोजना इस महीने के अंत तक पूरी होने वाली है और दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। इसमें 33 नए संस्थान शामिल होंगे। जहां सौर और जल सुविधाओं के अलावा इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इस परियोजना के पहले चरण के दौरान, 27 संस्थानों को सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए 5.4 करोड़ रुपये और वाटर ट्रीटमेंट सुविधाओं के लिए 16 संस्थानों को 1.92 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई थी। 

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