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अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखिए: पीछे छूटने का डर नहीं, आत्मविश्वास से बढ़िए सफलता की ओर
Mon, 20 Jan 2025 08:03 AM IST
शिवम गर्ग
दीना डेनहम स्मिथ, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू
दीना डेनहम स्मिथ, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 20 Jan 2025 08:03 AM IST
सार
कई लोग जी-तोड़ मेहनत करते हैं, बावजूद इसके कभी-कभी अस्पष्ट लक्ष्य, सकारात्मकता की कमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण खुद को तनावग्रस्त पाते हैं। अगर आप वास्तव में ऐसी समस्या से निजात पाना चाहते हैं, तो कुछ बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
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आत्मविश्वास
- फोटो : ANI
विस्तार
कई लोग जी-तोड़ मेहनत करते हैं, बावजूद इसके कभी-कभी अस्पष्ट लक्ष्य, सकारात्मकता की कमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण खुद को तनावग्रस्त पाते हैं। इसका एक कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी हैं, जो हर किसी के जीवन को परफेक्ट दिखाते हैं। दूसरों के पोस्ट के लाइक्स और शेयर्स देखकर लोगों को लगता है कि वे रेस में पीछे छूटते जा रहे हैं।
इस कारण ऐसे लोग अपनी क्षमताओं को संदेह के कटघरे में खड़ा कर देते हैं। दूसरों से उपलब्धियों की तुलना करना भी क्षमताओं में कमी को बढ़ावा देती है, खासकर तब जब यह लगने लगे कि दूसरे आपसे बेहतर कर रहे हैं। अगर आप वास्तव में ऐसी समस्या से निजात पाना चाहते हैं, तो कुछ बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
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इस कारण ऐसे लोग अपनी क्षमताओं को संदेह के कटघरे में खड़ा कर देते हैं। दूसरों से उपलब्धियों की तुलना करना भी क्षमताओं में कमी को बढ़ावा देती है, खासकर तब जब यह लगने लगे कि दूसरे आपसे बेहतर कर रहे हैं। अगर आप वास्तव में ऐसी समस्या से निजात पाना चाहते हैं, तो कुछ बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
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खुद को कोसने से बचें
जब भी आप असुरक्षा को व्यक्तिगत असफलता के पैमाने पर मापते हैं, तो नकारात्मक विचार आपके दिमाग में आने लगते हैं। ऐसा तब महसूस होता है, जब आप अपने सहयोगियों से बार-बार सवाल पूछते हैं। आपको लगता है कि उन्हें आपसे ज्यादा पता है और आपका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। ऐसे में, खुद को कोसने के बजाय, इसे एक स्वाभाविक मानवीय प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करने की कोशिश करें।संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं
आप अक्सर अपनी कमजोरियों को सुधारने का प्रयास करते हैं। यह लाजिमी भी है, क्यों हर इन्सान को लगता है कि कि जिस चीज में वह अच्छा नहीं है, उस पर ध्यान केंद्रित करना ही सुधार की कुंजी है। बजाय इसके अपनी ताकत पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मकता भी कोसों दूर भागती है। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि चुनौतियों से बचना चाहिए या अपने कंफर्ट जोन में रहना चाहिए। आपको अपनी ताकत, कौशल और योग्यताओं का संतुलित तरीके से लाभ उठाना चाहिए।
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सफलता का अर्थ समझें
आपको सफलता की असल परिभाषा को समझना होगा। सच्ची सफलता एक गहरी व्यक्तिगत और बहुआयामी अवधारणा है। सामाजिक या कार्यस्थल की अपेक्षाओं के बजाय इसे अपने व्यक्तिगत मूल्यों और लक्ष्यों के साथ जोड़कर व्यापक बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए आत्म-चिंतन करना होगा और सामाजिक अपेक्षाओं से मुक्ति पाना जरूरी है। खुद से पूछें कि आप किस तरह का जीवन जीना चाहते हैं।
रिश्तों का आकलन
समय-समय पर अपने रिश्तों का आकलन जरूर करें। कोई भी रिश्ता बनाने से पहले खुद से यह सवाल पूछें कि वह इन्सान आपकी तरक्की में कैसे योगदान दे सकता है? अच्छे सहयोगी प्रदर्शन को बेहतर बनाने, कुछ नया सीखने और बर्नआउट के स्तर को कम करने में काफी हद तक मदद कर सकते हैं।
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