Gujarat State Board : गुजरात शिक्षा बोर्ड ने 10वीं कक्षा के 2 लाख 66 हजार छात्रों को दिए ग्रेस मार्क्स
गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसएचएसईबी) में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के 2 लाख 66 हजार छात्रों को शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में 11वीं कक्षा में पदोन्नत के लिए रियायत अंक दिए गए। राज्य बोर्ड ने 10वीं परीक्षा के परिणामों को जारी करने के लिए अंक गणना की विधि को किया तैयार।
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गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसएचएसईबी) में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के 8 लाख 50 हजार छात्रों के लगभग एक तिहाई छात्रों को, जिन्हें शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में कक्षा 11 में पदोन्नत किया गया था, उन्हें रियायती अंक देने पर फैसला किया गया था। परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम 33 फीसदी अंकों की आवश्यकता होती है। इस लिहाज से 10वीं कक्षा के कुल 2 लाख 66 हजार छात्रों को रियायत अंक दिए गए, जिससे वह 10वीं कक्षा की परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाए।
आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि 2 लाख 66 हजार छात्रों में से 170 छात्रों ने 200 अंक प्राप्त किए थे। वहीं, 9,400 छात्रों को रियायत के तौर पर 100 अंक दिए गए। कोरोना महामारी को देखते हुए बच्चों की अध्ययन क्षमता पर असर पड़ा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के साथ ही कई अन्य राज्य बोर्डों ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा को स्थगित भी किया था। वहीं, गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं कक्षा के छात्रों को 11वीं कक्षा में पदोन्नत किया।
तीन जिलों में रियायत अंक पाने वालों की संख्या 10 हजार के पार
जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि रियायती अंकों का लाभ पाने में सबसे ज्यादा छात्रों की संख्या बनासकांठा जिले से है, जहां करीब 19,700 छात्रों ने इस तरह से 11वीं कक्षा में प्रवेश प्राप्त किया। वहीं, 17,750 10वीं कक्षा के छात्रों ने सूरत जिले से रियायत अंक प्राप्त किए। रियायती अंक मिलने वाले छात्रों की संख्या में बनासकांठा पहले स्थान पर और सूरत दूसरे स्थान पर रहा। सूरत में यह आंकड़े चौकाने वाले रहे क्योंकि जिले में लगातार उच्चतम उत्तीर्ण प्रतिशत दर्ज करने का रिकॉर्ड रहा है। इसके बाद वडोदरा जिले का स्थान आता है, जहां 13,600 छात्रों को 10वीं से 11वीं कक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए रियायत अंक दिए गए।
बोर्ड परीक्षा के परिणाम के लिए तैयार किया गया सिद्धांत
कोरोना महामारी के कारण कई परीक्षाएं स्थगित की गई। इसलिए गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसएचएसईबी) ने फैसला किया था कि छात्रों के कुल अंकों को गणना करने के लिए एक विधि को तैयार किया जाए। स्कूलों द्वारा शामिल की गई पद्धति में 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के प्रदर्शन को बोर्ड के परिणामों को निकालने के आधार के रूप में शामिल किया गया। 9वीं कक्षा के कुल 40 फीसदी अंकों को बोर्ड परीक्षा के परिणामों में जोड़ा गया। वहीं, 10वीं कक्षा के आंतरिक परीक्षा के अंकों को बोर्ड परीक्षा के परिणाम को निकालने के लिए उनमें जोड़ा गया। इस सिद्धांत को तैयार करते हुए वह छात्र जो यूनिट टेस्ट में सफल नहीं हो पाए और असफल रहे, उन छात्रों को रियायत अंक प्रदान किए गए।
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