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DUSU Polls: छात्र संघ चुनाव में एक लाख रुपये जमा करना जरूरी नहीं, शपथ पत्र और सुरक्षा बॉन्ड से होगी भागीदारी

Fri, 29 Aug 2025 06:47 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Fri, 29 Aug 2025 06:47 PM IST
सार

DUSU Polls: दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट में कहा कि छात्र संघ चुनावों में भाग लेने के लिए 1 लाख रुपये जमा करना जरूरी नहीं है। केवल शपथ पत्र और सुरक्षा बॉन्ड देना होगा। अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
 

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DU clarifies no money needed for DUSU polls, only affidavit and security bond required, court dismisses plea
सांकतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

DUSU Polls: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उसके छात्र संघ चुनावों में भाग लेने के लिए किसी प्रकार का पैसा जमा करना कोई पूर्व शर्त नहीं है। यह जानकारी डीयू ने अदालत में जस्टिस मिनी पुष्करना को दी, जो उस याचिका की सुनवाई कर रही थीं। याचिका में यह दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय की नई अधिसूचना के अनुसार डीयू छात्र संघ (DUSU) चुनावों में भाग लेने के लिए 1 लाख रुपये का सुरक्षा बॉन्ड जमा करना अनिवार्य है।

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डीयू के वकील ने अदालत को बताया कि विश्वविद्यालय केवल सुरक्षा बॉन्ड के साथ एक शपथ पत्र (Affidavit) प्राप्त करेगा और किसी प्रकार की धनराशि जमा करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने विश्वविद्यालय के इस सबमिशन को नोट किया और याचिका को खारिज कर दिया।

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लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के विपरीत बताया था पैसा जमा करना

याचिका में कहा गया था कि अधिसूचना के तहत चुनाव उम्मीदवारों को खुद या उनके समर्थकों द्वारा संभावित नुकसान या उल्लंघनों के लिए एक बॉन्ड भरना अनिवार्य था। याचिका में यह भी दावा किया गया कि यह प्रावधान लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के विपरीत है। यह याचिका अंजली और अभिषेक कुमार द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने दावा किया कि वे डीयू के छात्र हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में भाग लेना चाहते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस "पूर्व रोकथाम वित्तीय प्रावधान" ने धन के आधार पर एक मनमानी वर्गीकरण उत्पन्न किया है, जिससे सामान्य छात्रों को बाहर रखा गया जबकि संपन्न छात्रों को लाभ पहुंचा। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता और गैर-मनमानी), 19(1)(a) (लोकतांत्रिक भागीदारी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 21 (जीवन का अधिकार और समान अवसर) का उल्लंघन बताया।

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