Delhi: स्टूडेंट स्टार्टअप्स के समर्थन में बड़ा कदम, शिक्षा मंत्री ने 325 करोड़ रुपये के फंड का किया एलान
Education Minister Delhi: दिल्ली सरकार ने छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री ने 325 करोड़ रुपये के विशेष कोष की घोषणा की है, जिससे युवा उद्यमियों को नवाचार और स्टार्टअप शुरू करने में आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
विस्तार
Startup Funding 2026: एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आशीष सूद ने शुक्रवार को नई ‘कैंपस-टू-मार्केट’ इनक्यूबेशन नीति के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 325 करोड़ रुपये के बजट आवंटन की घोषणा की।
दिल्ली स्टार्टअप युवा महोत्सव 2026 के दौरान शीर्ष 100 छात्र स्टार्टअप्स के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य छात्र उद्यमों को बौद्धिक संपदा संरक्षण, उचित मूल्यांकन, वित्तपोषण तक पहुंच और बाजार से जुड़ाव सहित संपूर्ण सहयोग प्रदान करना है, ताकि वे अपने विचारों को सफल व्यवसाय में बदल सकें।
प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित यह सत्र इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय, कश्मीरी गेट में आयोजित किया गया था।
1,000 स्टार्टअप्स ने लिया भाग
प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित यह सत्र इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय, कश्मीरी गेट में आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित यह सत्र कश्मीरी गेट स्थित इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय में हुआ।
सूद ने कहा, "सरकार नवाचारी विचारों को वास्तविक बाज़ारों, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से जोड़ने के लिए एक व्यापक नीति पर काम कर रही है।"
सूद ने बताया कि इस महोत्सव में लगभग 1,000 स्टार्टअप ने भाग लिया, जिनमें से 700 ने विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं और 100 को चुना गया।
युवाओं को नौकरी सृजनकर्ता बनाने पर जोर
मंत्री ने आगे कहा, "एक मजबूत स्टार्टअप संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है ताकि युवा नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी सृजनकर्ता बनें।"
पहले घोषित बिजनेस ब्लास्टर्स पहल का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि 1,000 स्कूलों की 5,000 टीमों को 20,000 रुपये प्रत्येक दिए गए, जिसके लिए इस वर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
उन्होंने कहा कि पहले कई संस्थान एक जैसे स्टार्टअप प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, जिससे प्रयासों का दोहराव, संसाधनों की बर्बादी और छात्रों की बहुमूल्य ऊर्जा का नुकसान हो रहा था। सूद ने जोर देकर कहा, "नई नीति समन्वित और सुव्यवस्थित नवाचारी प्रयासों को बढ़ावा देगी।"
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