NHRC Chief on Cyberspace: जस्टिस मिश्रा बोले- साइबर स्पेस का दुरुपयोग हेट स्पीच और आतंकवाद को दे रहा बढ़ावा
NHRC Chief on Cyberspace: एनएचआरसी प्रमुख ने चिंता जताई कि साइबर प्रौद्योगिकी, जो जनकल्याण के लिए प्रभावी साबित हुई है, का ज्यादातर दुरुपयोग किया जा रहा है। साइबर स्पेस का इस्तेमाल सीमा पर आतंकी गतिविधियों या दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हिंसा भड़काने वाले नफरत भरे भाषणों यानी हेट स्पीच को प्रायोजित करने के लिए भी किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने हेट स्पीच और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में हो रहे साइबर स्पेस के दुरुपयोग पर चिंता जताई है। एनएचआरसी के प्रमुख जस्टिस मिश्रा ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा कि साइबर स्पेस का इस्तेमाल न केवल वित्तीय और आर्थिक अपराधों के लिए किया जा रहा है, बल्कि सीमा पर आतंकी गतिविधियों या दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हिंसा भड़काने वाले नफरत भरे भाषणों यानी हेट स्पीच को प्रायोजित करने के लिए भी किया जा रहा है। इससे सामाजिक शांति और सद्भाव प्रभावित होते हैं।
समाज का डिजिटल विभाजन हुआ
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और एनएचआरसी के प्रमुख जस्टिस अरुण मिश्रा ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा कि इंटरनेट की मदद से संचार ने दुनिया भर में हमारे जीवन में बहुत सारे सकारात्मक बदलाव लाए हैं, लेकिन इससे साइबर अपराध बढ़ा है और समाज का डिजिटल विभाजन भी हुआ है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी बयान में मिश्रा के हवाले से कहा गया है कि साइबर स्पेस का इस्तेमाल न केवल वित्तीय और आर्थिक अपराधों के लिए किया जा रहा है, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद या हिंसा उकसाने के लिए नफरती भाषणों को प्रायोजित करने के लिए भी किया जा रहा है।
जनकल्याण के लिए प्रभावी प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग
एनएचआरसी प्रमुख ने चिंता जताई कि साइबर प्रौद्योगिकी, जो जनकल्याण के लिए प्रभावी साबित हुई है, का ज्यादातर दुरुपयोग किया जा रहा है। मिश्रा ने कहा कि डार्क वेब के माया जाल में और साइबर अपराध में असली चुनौती अधिकार क्षेत्र को लेकर है। जहां डिलीवरी की जगह और पैसे के सबूत और सोर्स और डेस्टिनेशन का पता लगाना मुश्किल है।
स्वदेशी वस्तुओं और सेवाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता
मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी के सामने अर्थव्यवस्था के हितों की रक्षा करना और राष्ट्र का कल्याण जैसी मुख्य चुनौतियां हैं। एनएचआरसी प्रमुख ने कहा कि हमें स्वदेशी वस्तुओं और सेवाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। जिससे ब्रांडेड सामान और परिधान खरीदने के नाम पर फिजूलखर्ची रोकी जा सके और वास्तव में कुछ स्थानीय लोगों की मदद हो सके।
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