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Hindi News ›   Education ›   CV Raman Death Anniversary 2021: Interesting Facts About the Nobel Laureate

CV Raman: क्या है सीवी रमन का पूरा नाम, कितने पुरस्कार से हुए थे सम्मानित? यहां जानिए सबकुछ

Sun, 21 Nov 2021 10:15 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sun, 21 Nov 2021 10:15 AM IST
सार

सीवी रमन की खोज जैसे स्कैटरिंग ऑफ लाइट, रमन इफेक्ट आदि के बारे में आपने अपने स्कूल में जरूर पढ़ा होगा, तो आई आज सर चंद्रशेखर वेंकट रमन, नोबेल पुरस्कार विजेता के बारे में कुछ अनसुने किस्से जानते हैं। 

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CV Raman Death Anniversary 2021: Interesting Facts About the Nobel Laureate
cv raman

विस्तार

आज नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रमन, यानी सीवी रमन की 51वीं पुण्यतिथि है। 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में जन्मे, नोबेल पुरस्कार विजेता का एक छात्र के रूप में प्रारंभिक शोध कार्य प्रकाशिकी और ध्वनिक के क्षेत्र में था, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जिंदगी समर्पित कर दिया।

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भारतीय वित्त विभाग में हुए शामिल
अपने पिता के पेशे के कारण कम उम्र से ही अकादमिक माहौल में डूबे सीवी रमन ने भौतिकी में अपना पहला स्वर्ण पदक 1904 में बी.ए. एग्जामिनेशन में जीता था। वह 1907 में एमए की डिग्री प्राप्त करने के बाद भारतीय वित्त विभाग में शामिल हो गए, लेकिन कलकत्ता में इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस की प्रयोगशाला में शोध करना जारी रखा।

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नोबेल पुरस्कार
1919 में, रमन को IACS में मानद प्रोफेसर और मानद सचिव के रूप में दो मानद पद प्राप्त हुए। वह इसे अपने जीवन का स्वर्ण युग मानते थे। 1930 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्धता के दौरान, उन्हें "प्रकाश के प्रकीर्णन (स्कैटरिंग ऑफ लाइट) पर उनके काम के लिए" भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बाद में वे 1933 में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में प्रोफेसर बन गए, जहां उन्होंने 15 वर्षों तक काम किया। वह 1948 में भारतीय विज्ञान संस्थान से सेवानिवृत्त हुए और 1949 में बेंगलुरु में रमन अनुसंधान संस्थान बनाया। उन्हें वर्ष 1954 में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रतन मिला। 

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रमन इफेक्ट की खोज
1928 में, रमन ने पाया कि लाइट के छोटे छोटे हिस्से, लाइट की वेवलैंथ से भी छोटे पार्टिकल्स से मिलने के बाद स्कैटर हो जाते हैं और ओरिजनल लाइट की तुलना में अन्य वेवलैंथ प्राप्त कर लेते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आने वाले कुछ फोटॉन की एनर्जी को एक मॉलिक्यूल में ट्रांसफर की जा सकती है, जिससे इसे हाई लेवल की एनर्जी मिल जाती है। एनर्जी के आदान-प्रदान और लाइट की दिशा में परिवर्तन के फिनोमिना का नाम वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया, जिसे रमन इफेक्ट के रूप में जाना जाता है। फिनोमिना का उपयोग विभिन्न प्रकार की मटेरियल का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।

निधन
रमन 1924 में रॉयल सोसाइटी के फेलो चुने गए और 1929 में उन्हें नाइट की उपाधि दी गई। 21 नवंबर, 1970 को बेंगलुरु, फिर बैंगलोर में उनका निधन हो गया।

सी.वी. रमन: द्वारा जीते गए पुरस्कारों की सूची देखें
1924: रॉयल सोसाइटी के फेलो के रूप में चुने गए
1930: भौतिकी में नोबेल पुरस्कार
1941: फ्रेंकलिन मेडल
1954: भारत रत्न
1957: लेनिन शांति पुरस्कार
1988: अमेरिकन केमिकल सोसाइटी और इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस ने उनकी खोज को एक अंतर्राष्ट्रीय ऐतिहासिक रासायनिक मील का पत्थर के रूप में मान्यता दी।

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