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क्या भारतीय सेना में पंडित या मौलवी की नौकरी हैं?
एजुकेशन डेस्क
Updated Tue, 02 Sep 2014 04:05 PM IST
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क्या पूजा-पाठ से संबंधित जॉब के मौके भी भारतीय सेना में उपलब्ध हैं? इसके लिए योग्यता क्या होती है? इससे संबंधित रैंक, सेवा काल आदि के बारे में मु्झे बताएं?
अनिरुद्ध वर्मा
उत्तर - यदि आप निर्धारित मानदंडों पर भी खरा उतरते हैं, तो भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक (रिलीजियस टीजर) के रूप में आप मौके पा सकते हैं। आपके धर्म के अनुरूप आपकी नियुक्ति पंडित, पादरी, ग्रंथी, बौद्ध भिक्षु अथवा मौलवी के रूप में हो सकती है। आप चाहे जिस भी संकाय से विद्यार्थी हों, आपका चयन भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक के रूप में हो सकता है, यदि आपके पास इसके संबंधित शैक्षणिक योग्यता के अलावा आवश्यक धार्मिक योग्यता भी हो। ग्रेजुएट होने के साथ-साथ यदि आपके पास संस्कृत में मध्यमा अथवा हिंदी में भूषण की डिग्री हो, तो पंडित के रूप में आप सेना ज्वॉइन कर सकते हैं।
इसी तरह अन्य धर्मों के लिए भी खास योग्यताएं होनी चाहिए। इस रूप में अभ्यर्थियों की नियुक्ति जूनियर कमीशंड ऑफिसर के रूप में होती है। फिजिकल फिटनेस टेस्ट, स्क्रीनिंग, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है।
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चयन के बाद ट्रेनिंग के पश्चात नायब सूबेदार/जेसीओ (आरटी) के रूप में नियुक्ति का प्रावधान है। चयन के पश्चात डीए, भोजन, वस्त्र, फ्री एकोमोडेशन, मेडिकल फैसिलिटी, यात्रा भत्ता आदि सेना के नियमों के अनुरूप तमाव सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि काम की बात करें, तो धार्मिक शिक्षक सैनिकों व अन्य कर्मचारियों के लिए विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराते हैं।
इसके अलावा जरूरत पड़ने पर उपदेश देने संबंधी कार्य भी करने होते हैं। नियुक्ति के बाद प्रार्थना पढ़ना, अंत्येष्टि से संबंधित कार्य करना, अस्पताल में बीमारों के लिए पूजा-अर्चना, सैनिक परिवारों में बच्चों को धार्मिक उपदेश देना आदि कई ऐसे कार्य हैं, जो धार्मिक शिक्षक को करने पड़ते हैं। इस संबंध में रिक्तियां समय-समय पर निकलती रहती हैं।
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अनिरुद्ध वर्मा
उत्तर - यदि आप निर्धारित मानदंडों पर भी खरा उतरते हैं, तो भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक (रिलीजियस टीजर) के रूप में आप मौके पा सकते हैं। आपके धर्म के अनुरूप आपकी नियुक्ति पंडित, पादरी, ग्रंथी, बौद्ध भिक्षु अथवा मौलवी के रूप में हो सकती है। आप चाहे जिस भी संकाय से विद्यार्थी हों, आपका चयन भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक के रूप में हो सकता है, यदि आपके पास इसके संबंधित शैक्षणिक योग्यता के अलावा आवश्यक धार्मिक योग्यता भी हो। ग्रेजुएट होने के साथ-साथ यदि आपके पास संस्कृत में मध्यमा अथवा हिंदी में भूषण की डिग्री हो, तो पंडित के रूप में आप सेना ज्वॉइन कर सकते हैं।
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इसी तरह अन्य धर्मों के लिए भी खास योग्यताएं होनी चाहिए। इस रूप में अभ्यर्थियों की नियुक्ति जूनियर कमीशंड ऑफिसर के रूप में होती है। फिजिकल फिटनेस टेस्ट, स्क्रीनिंग, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है।
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चयन के बाद ट्रेनिंग के पश्चात नायब सूबेदार/जेसीओ (आरटी) के रूप में नियुक्ति का प्रावधान है। चयन के पश्चात डीए, भोजन, वस्त्र, फ्री एकोमोडेशन, मेडिकल फैसिलिटी, यात्रा भत्ता आदि सेना के नियमों के अनुरूप तमाव सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि काम की बात करें, तो धार्मिक शिक्षक सैनिकों व अन्य कर्मचारियों के लिए विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराते हैं।
इसके अलावा जरूरत पड़ने पर उपदेश देने संबंधी कार्य भी करने होते हैं। नियुक्ति के बाद प्रार्थना पढ़ना, अंत्येष्टि से संबंधित कार्य करना, अस्पताल में बीमारों के लिए पूजा-अर्चना, सैनिक परिवारों में बच्चों को धार्मिक उपदेश देना आदि कई ऐसे कार्य हैं, जो धार्मिक शिक्षक को करने पड़ते हैं। इस संबंध में रिक्तियां समय-समय पर निकलती रहती हैं।
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