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अब विदेश में बैठकर करें घर को कंट्रोल
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 19 Nov 2016 10:27 PM IST
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इस नई तकनीक को इजात किया है एचबीटीआई, कानपुर के पूर्व छात्रों की एक टीम ने
- फोटो : अमर उजाला
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अगर आप घर से दूर हैं तो अब घर की टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। आप सात समंदर पार बैठे ही अपने घर को कंट्रोल कर सकते हैं। घर कि लाइटें, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पंखे जैसे तमाम इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल डिवाइस ऑन करना यो या फिर ऑफ सबकुछ पलक झपकते ही आप कहीं से भी कर सकते हैं। यही नहीं इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल डिवाइस की तकनीकी समस्या भी आपको आपकी मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए ही पता चल जाएगी। जी हां, यह सबकुछ संभव हो पाएगा मॉनीटरिंग एनालिसिस ऑफ रीमोटली ऑपरेट स्विचेस (मेक्रोस) के जरिए। इस नई तकनीक को इजात किया है एचबीटीआई, कानपुर के पूर्व छात्रों की एक टीम ने। जिसमें शिवशंकर उपाध्याय, रोहन धामा, सत्येंद्र कुमार, मनीष कुमार व विकास शामिल हैं। इन सभी छात्रों ने दो साल पहले स्टेप एचबीटीआई के इंक्यूबेशन सेल में इसपर काम करना शुरू किया था।
रिसर्च करने वाले छात्र रोहन धामा बताते हैं कि अब उनका अगला टारगेट स्ट्रीट लाइटों को इस तकनीक से जोड़ना है। इस तकनीक के जरिए शेड्यूल कंट्रोलिंग भी आसानी से की जा सकती है। मसलन अगर स्ट्रीट लाइट को शाम छह सात बजे ऑन करना है और सुबह छह बजे बंद तो टाइम सेट करने के बाद यह रोजाना ऑटोमेटिक तय समय पर शहर के सभी स्ट्रीट लाइटें ऑन और ऑफ कर सकती हैं। इसके लिए वह नगर निगम को प्रस्ताव भेज रहे हैं।
दस किलोमीटर दूर बैठ बिठूर नलकूप का किया संचालन
रिसर्च के तहत छात्रों ने बिठूृर नलकूप को जोड़ा। शनिवार को उन्होंने अपने डिवाइस का लाइव डिमांस्ट्रेशन स्टेप एचबीटीआई से किया। छात्र स्टेप एचबीटीआई कैंपस से ही करीब दस किलोमीटर दूर बिठूर के नलकूप का सफल संचालन कर रहे थे। यहीं से नलकूप ऑन और ऑफ कर पा रहे थे। इसके अलावा नलकूप के संचालन के लिए कितनी बिजली मिल रही है, वोल्टेज कितना है यह सब भी मोबाइल के जरिए ही दिखा पा रहे थे।
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ये है मेक्रोस
मॉनीटरिंग एनालिसिस ऑफ रीमोटली ऑपरेट स्विचेस (मेक्रोस) एक ऐसा डिवाइस है जो कंप्यूटर या मोबाइल एप के जरिए निर्धारित तकनीक को कंट्रोल करने का काम करता है। जीपीएस के निर्देश के अनुसार वह दो सेकेंड के अनुपात में कार्य को अंजाम दे देता है। रोहन बताते हैं कि इस डिवाइस कि कीमत करीब एक लाख रूपये है।
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रिसर्च करने वाले छात्र रोहन धामा बताते हैं कि अब उनका अगला टारगेट स्ट्रीट लाइटों को इस तकनीक से जोड़ना है। इस तकनीक के जरिए शेड्यूल कंट्रोलिंग भी आसानी से की जा सकती है। मसलन अगर स्ट्रीट लाइट को शाम छह सात बजे ऑन करना है और सुबह छह बजे बंद तो टाइम सेट करने के बाद यह रोजाना ऑटोमेटिक तय समय पर शहर के सभी स्ट्रीट लाइटें ऑन और ऑफ कर सकती हैं। इसके लिए वह नगर निगम को प्रस्ताव भेज रहे हैं।
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दस किलोमीटर दूर बैठ बिठूर नलकूप का किया संचालन
रिसर्च के तहत छात्रों ने बिठूृर नलकूप को जोड़ा। शनिवार को उन्होंने अपने डिवाइस का लाइव डिमांस्ट्रेशन स्टेप एचबीटीआई से किया। छात्र स्टेप एचबीटीआई कैंपस से ही करीब दस किलोमीटर दूर बिठूर के नलकूप का सफल संचालन कर रहे थे। यहीं से नलकूप ऑन और ऑफ कर पा रहे थे। इसके अलावा नलकूप के संचालन के लिए कितनी बिजली मिल रही है, वोल्टेज कितना है यह सब भी मोबाइल के जरिए ही दिखा पा रहे थे।
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ये है मेक्रोस
मॉनीटरिंग एनालिसिस ऑफ रीमोटली ऑपरेट स्विचेस (मेक्रोस) एक ऐसा डिवाइस है जो कंप्यूटर या मोबाइल एप के जरिए निर्धारित तकनीक को कंट्रोल करने का काम करता है। जीपीएस के निर्देश के अनुसार वह दो सेकेंड के अनुपात में कार्य को अंजाम दे देता है। रोहन बताते हैं कि इस डिवाइस कि कीमत करीब एक लाख रूपये है।
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