IGNOU: छात्र सिर्फ कोचिंग पर न रहें निर्भर, सरकारी नौकरी से अलग अवसरों पर भी दें ध्यान - उपराष्ट्रपति
IGNOU: इग्नू का 37वां दीक्षांत समारोह 20 फरवरी को आयोजित किया गया। इस दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने छात्रों को शिक्षा से संबंधित कई बड़ी बातों के साथ छात्रों को सकारात्मक रहने की बात कही।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
IGNOU: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) का 37वां दीक्षांत समारोह 20 फरवरी को आयोजित किया गया। इस समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए । समारोह में उपराष्ट्रपति धनखड़ दीक्षांत भाषण दिया। इस भाषण में छात्रों को शिक्षा से संबंधित कई बड़ी बातों के साथ छात्रों को सकारात्मक रहने की बात कही।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने छात्रों को कोचिंग से आगाह करते हुए कहा कि कोचिंग कक्षाएं हकीकत में बौद्धिक प्रदर्शन के बजाय "यथास्थिति" का उदाहरण हैं और उन्हें याद दिलाया कि नवाचार अलग तरह से सोचने पर आता है।
धनखड़ ने छात्रों से क्या- क्या कहा ?
उन्होंने अपने भाषण में कहा छात्र केवल सरकारी नौकरी के भरोसे न रहें। छात्रों को सरकारी नौकरी प्रतियोगी परीक्षाओं से परे भी सोचना चाहिए और अन्य अवसरों का पता लगाना चाहिए, आज के समय में कुछ अवसर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
धनखड़ ने युवाओं को संदेह और असुरक्षाओं को दूर करने और इसके बजाय महान विचारों के लिए दिमाग को पार्किंग स्थल के रूप में उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों को प्रतिदिन मन की सफाई करने और नकारात्मकता को दूर करने साथ ही बिना किसी डर के अच्छे विचारों को अपने अंदर लाने पर जोर दिया।
धनखड़ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नवाचार अक्सर अलग तरह से सोचने और कोचिंग कक्षाओं जैसी यथास्थिति को चुनौती देने से आता है। उन्होंने कहा कि कोचिंग कक्षाएं सच्चे बौद्धिक प्रदर्शन या ज्ञान के मंदिरों के बजाय "यथास्थिति" हैं।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि जैसे सिविल सेवा में प्रवेश करने वाले व्यक्ति अब नए क्षेत्रों की खोज कर रहे हैं जैसे कि स्टार्ट-अप शुरू करना या कृषि और विपणन में संलग्न होना।
कमेंट
कमेंट X