{"_id":"65e02345a1727003ad0d471e","slug":"youth-need-to-keep-learning-continuously-in-changing-hiring-patterns-upasana-raina-safalta-2024-02-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Safalta Talks Master Class : बदलते हायरिंग पैटर्न में युवाओं लगातार सीखते रहने की जरूरत : उपासना रैना","category":{"title":"Career Plus","title_hn":"करियर प्लस","slug":"career-plus"}}
Safalta Talks Master Class : बदलते हायरिंग पैटर्न में युवाओं लगातार सीखते रहने की जरूरत : उपासना रैना
Thu, 29 Feb 2024 12:20 PM IST
Pushpendra Mishra
Media Solution Initiative
Media Solution Initiative
Published by: Pushpendra Mishra
Updated Thu, 29 Feb 2024 12:20 PM IST
सार
Master Session Topic : डिजिटल वर्ल्ड में हायरिंग का बदलता पैटर्न, Guest Speaker : Upasana Raina, Director HR and Marketing, GI Group Holding
विज्ञापन
सफलता टाक मास्टर क्लास The Changing Paradigms of Hiring In Digital World
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सफलता.कॉम द्वारा डिजिटल वर्ल्ड में हायरिंग के बदलते पैटर्न विषय पर आयोजित किए गए मास्टर क्लास सेशन में जीआई समूह होल्डिंग की निदेशक - मानव संसाधन एवं विपणन उपासना रैना ने कहा युवा उसी नौकरी को करें जो उन्हें पसंद हो। साथ ही नौकरी में अपना एटीट्यूड अच्छा रखें। स्वभाव बेहतर रखें। जब युवा किसी कंपनी में पहली जॉब करने जाते हैं तो उन्हें बहुत सारी चीजें अच्छी लगती हैं। कुछ चीजें नापसंद भी आती हैं। आपको किसी चीज में दवाब भी महसूस हो सकता है। जैसे सुबह 9 से शाम 6 बजे तक काम करना, प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन्स पर सबमिट करना, लोग डांट भी सकते हैं या ऑफिस क्रिटिक्स जैसी बहुत सी चीजें होती हैं। तो आप हिम्मत रखें और सीखते रहें। अपना विचार ऐसा रखें कि मुझे तो सीखना है अभी क्योंकि यही सीखने का सही टाइम है। लर्निंग पर सबसे ज्यादा फोकस रखें। लर्निंग एंड नहीं होता है। साथ ही आप ऑफिस में अगर बहुत ऑर्गेनाइज रहेंगे तो बेहतर रहेगा।
कि जब भी कोई एचआर किसी युवा को कंपनी के लिये हायर करता है कि उसे पता होता है कि आप युवा हैं, फ्रेशर हैं आपको अधिक जानकारी नहीं होगी। लेकिन जिस भी प्रोफाइल पर आपने आवेदन किया है उसके बारे में थोड़ा बहुत तो जरूर पता होना चाहिए। क्योंकि कई बार कॉलेज या स्किल कोर्सेज के दौरान छात्र उनकी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते तब एक अलग माहौल होता है अलग उम्र होती है जिसका असर आपकी स्टडी पर पड़ता है। तो जरूरी है जो भी आप पढ़ रहे हैं वो ध्यान से पढ़ें।
जिस प्रोफाइल पर आपने ज्वाइन करना है उसका विषय आपको सीवी में देखा जाता है। इसके अलावा टेक्नोलॉजी आज के समय में बहुत तेजी से बदल रही है। तो जो आज टेक्नोलॉजी है वो शायद जब आप किसी कंपनी में जॉब के लिए पहुंचें तब न रहे। तो युवाओं को समय के साथ होने वाले नवाचारों को स्वीकार करना होता है। आपके अंदर दृढ़ता है कि नहीं। आप कोई भी काम करते हैं तो वो मेहनत से कर रहे हैं कि नहीं। क्योंकि कंपनियों में बहुत सारे रोल ऐसे होते हैं जो आइसोलेशन में बैठ के नहीं किये जा सकते कि मेरा जो काम था वो मैंने खत्म कर लिया। आपके अंदर लोगों से क्वार्डिनेट करके चलने की क्वालिटी देखी जाती है। किसी समस्या को आप कैसे देखते हैं या समस्याओं का समाधान निकालने का हुनर आप में कैसा है। तो जो भी युवा फ्रेशर्स या एक आधे साल के अनुभव के साथ इंटरव्यू देने आते हैं उनका एटीट्यूड बहुत महत्व रखता है। आपका लर्निंग नेचर है कि नहीं, आप प्रोजेक्ट्स में लोगों के साथ कोलेबोरेट कर पाते हैं कि नहीं।
विज्ञापन
उपासना ने कहा कि कोरोना के दौरान लोगों ने घर से काम करना शुरू कर दिया, उन्हें मॉनिटर करना आसान नहीं था। सभी को ऑनलाइन शिफ्ट करना कंपनियों के लिए एक बड़ा चैलेंज रहा। जिसके बाद एक नए मोड का जन्म हुआ। जिसको हम आज हाईब्रिड मोड वर्किंग कहते हैं। जिसमें कुछ दिन घर से और कुछ दिन ऑफिस से आके काम करना होता है। क्योंकि दफ्तरों में प्रोजेक्ट वर्क के लिए सबका साथ होना जरूरी होता है। इसलिये मैं कहना चाहूंगी की हर बदलाव को समय के साथ स्वीकार करना सबसे लिये महत्वपूर्ण है।
ज्यादातर एचआर के लिए रोल के लिए सही युवा का चयन करना बहुत चुनौती भरा काम होता है। जबकि देश में युवाओं की संख्या इस समय सर्वाधिक है। तो हर कंपनी को स्किल्ड युवा मिल जाने चाहिए। लेकिन कहीं न कहीं स्किल गैप की समस्या आज भी कंपनियां फेस कर रही हैं। आज के समय कॉलेज, यूनिवर्सिटीज को अपना कॅरिकुलम समय के साथ अपडेट करते रहना चाहिए क्योंकि जब तक स्टूडेंट यूनिवर्सिटी से बाहर निकलता है तब तक इंडस्ट्री का पैटर्न चेंज हो जाता है। क्योंकि कॅरिकुलम अपडेट न होने के कारण जो चीजें बच्चे सीख कर इंडस्ट्री में आ रहे हैं उनका जमाना जा चुका है। हर कुछ साल में टेक्नोलॉजी बदल रही है।
इंटर्नशिप हर युवा के लिए जरूरी होती है। जिन भी संस्थानों में छात्र पढ़ रहे हैं, या स्किल सीख रहे हैं उन संस्थानों की ये जिम्मेदारी होती है कि थ्योरी के साथ साथ बच्चे को प्रक्टिकल नॉलेज भी दें। ताकि युवाओं को इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण दिया जा सके। जो उनके प्रक्टिकल एक्सपोजर के लिए जरूरी होता है।
पुराने समय में जो हायरिंग का पैटर्न था उसमें बहुत कम पोर्टल्स थे जिनके जरिये आवेदन किया जा सकता था। लेकिन आज के समय में सबसे नया खिलाड़ी लिंक्डइन है। जिसपर सभी को अपना प्रोफाइल बनाना चाहिए। आज के समय में लिंक्डइन के जरिये हायरिंग का पैटर्न लगातार बढ़ता जा रहा है।
आज से कुछ वर्ष पहले तक इंटरव्यू ऑफलाइन होते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से वर्चुअल इंटरव्यू का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। तो आज सबको आना चाहिए कि वर्चअल इंटरव्यू के लिए वो प्रिपेयर कैसे करें। साथ ही युवाओं को टेलीफोनिक इंटरव्यू देना सीखना चाहिए। क्योंकि फिजिकली उपस्थित होने में और वर्चुअल आने में एक असमानता है। कि फिजिकली में आप ज्यादा एक्सप्रेस कर पाते हैं। लेकिन वर्चुअल में कम समय में आपको ज्यादा लोगों से इंटरेक्ट करना होता है खुद की काबिलियत बतानी होती है। तो सबके लिए टेक्नोलॉजी सीखते रहना बहुत जरूरी है। क्योंकि ज्यादातर इंटरव्यू जूम या टीम एप के जरिये होते हैं।
12वीं फेल मूवी में विक्रांत मेसी 12वीं में बार बार फेल होने पर जो जवाब दिया कि वो नकल करके क्यों पास नहीं हुआ। वहीं ईमानदारी हम सभी को अपने सीवी गैप के बारे में बात करते हुए दिखानी चाहिए। सच्चाई से जो हकीकत है वो बता देना चाहिए। कई लोग झूठ बोलकर अपने सीवी गैप को छिपाने की कोशिश करते हैं। जबकि युवाओं को याद रखना चाहिए जिस भी एचआर के सामने वो बैठे हैं उसके पास इंटरव्यू लेने का जो अनुभव वो कहीं ज्यादा है। वो आपके झूठ को तुरंत पकड़ लेंगे। इसलिये इंटरव्यू में कवरअप करने के बजाय सीवी में गैप की जो असल वजह हो एचआर को वो बता दें।
कॉलेज या स्कूल में रहते समय आपको एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में भाग लेना शुरू करो। आपको पब्लिक स्पीकिंग का जितना भी मौका मिले न चूकें। परिवार के साथ बैठें तो भी बात करें। जितनी बार आप बात करेंगे आपका कांफिडेंस बूस्ट होगा। दूसरी बात इंटरव्यू में डर की कोई जरूरत नहीं है ज्यादा से ज्यादा क्या होगा आप शॉर्टलिस्ट नहीं होंगे। आप डरें बिल्कुल नहीं क्योंकि आज जॉब हर डायरेक्शन में आपको मिल जाएगी। किसी एक कंपनी में फेल होने का मतलब ये नहीं कि आपका सिलेक्शन नहीं होगा। एक जगह नहीं होगा तो दूसरी जगह होगा। आपके हाथ में होता है मेहनत करना, आपका कर्म करना। रिजल्ट आपके हाथ में नहीं होता। तो पूरी ईमानदारी से आप सच्चाई के साथ अपनी बात इंटरव्यू में रखें।
जो सामने आपका इंटरव्यू ले रहा है वह भी जरूरत के कारण ही आपका इंटरव्यू ले रहा है।
उपासना रैना ने कहा कि ये काफी हद तक जॉब रोल पर निर्भर करता है। अगर जिस नौकरी के लिए आप इंटरव्यू दे रहे हैं उस नौकरी की डिमांड है कि आपको अंग्रेजी आनी चाहिए। तो जरूर आपको सीख लेनी चाहिए। लेकिन अगर उन नौकरियों को छोड़ दिया जाए जहां अंग्रेजी में कम्युनिकेशन जरूरी है। तो आपका जो भी लहजा, या भाषा जिसमें आप बात कर सकते हैं उसमें बात करिये। क्योंकि हर कंपनी विविधता पर विचार करती है। और कंपनी में विविध क्षेत्रों के लोगों को हायर भी करती हैं। अंग्रेजी के कारण आपको दिक्कत सिर्फ वहीं आ सकती है जहां काम का तरीका अंग्रेजी का ही हो। अगर आप अंग्रेजी से घबराते हैं या आपको अंग्रेजी नहीं आती है तो ऐसी जॉब चुनें जहां अंग्रेजी की जरूरत न हो।
लेकिन एक एचआर होने के नाते मैं ये जरूर सुझाव दूंगी कि अगर आप अंग्रेजी सीख लेंगे तो वो आपके लिए एक अतिरिक्त स्किल का काम करेगी।
विज्ञापन
पढ़ाई के समय पूरा फोकस रखें
कि जब भी कोई एचआर किसी युवा को कंपनी के लिये हायर करता है कि उसे पता होता है कि आप युवा हैं, फ्रेशर हैं आपको अधिक जानकारी नहीं होगी। लेकिन जिस भी प्रोफाइल पर आपने आवेदन किया है उसके बारे में थोड़ा बहुत तो जरूर पता होना चाहिए। क्योंकि कई बार कॉलेज या स्किल कोर्सेज के दौरान छात्र उनकी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते तब एक अलग माहौल होता है अलग उम्र होती है जिसका असर आपकी स्टडी पर पड़ता है। तो जरूरी है जो भी आप पढ़ रहे हैं वो ध्यान से पढ़ें।
विज्ञापन
समय के साथ नवाचारों को करना चाहिए स्वीकार
जिस प्रोफाइल पर आपने ज्वाइन करना है उसका विषय आपको सीवी में देखा जाता है। इसके अलावा टेक्नोलॉजी आज के समय में बहुत तेजी से बदल रही है। तो जो आज टेक्नोलॉजी है वो शायद जब आप किसी कंपनी में जॉब के लिए पहुंचें तब न रहे। तो युवाओं को समय के साथ होने वाले नवाचारों को स्वीकार करना होता है। आपके अंदर दृढ़ता है कि नहीं। आप कोई भी काम करते हैं तो वो मेहनत से कर रहे हैं कि नहीं। क्योंकि कंपनियों में बहुत सारे रोल ऐसे होते हैं जो आइसोलेशन में बैठ के नहीं किये जा सकते कि मेरा जो काम था वो मैंने खत्म कर लिया। आपके अंदर लोगों से क्वार्डिनेट करके चलने की क्वालिटी देखी जाती है। किसी समस्या को आप कैसे देखते हैं या समस्याओं का समाधान निकालने का हुनर आप में कैसा है। तो जो भी युवा फ्रेशर्स या एक आधे साल के अनुभव के साथ इंटरव्यू देने आते हैं उनका एटीट्यूड बहुत महत्व रखता है। आपका लर्निंग नेचर है कि नहीं, आप प्रोजेक्ट्स में लोगों के साथ कोलेबोरेट कर पाते हैं कि नहीं।
विज्ञापन
नौकरियों के तरीके में कोविड के बाद हुए हैं बहुत सारे बदलाव
उपासना ने कहा कि कोरोना के दौरान लोगों ने घर से काम करना शुरू कर दिया, उन्हें मॉनिटर करना आसान नहीं था। सभी को ऑनलाइन शिफ्ट करना कंपनियों के लिए एक बड़ा चैलेंज रहा। जिसके बाद एक नए मोड का जन्म हुआ। जिसको हम आज हाईब्रिड मोड वर्किंग कहते हैं। जिसमें कुछ दिन घर से और कुछ दिन ऑफिस से आके काम करना होता है। क्योंकि दफ्तरों में प्रोजेक्ट वर्क के लिए सबका साथ होना जरूरी होता है। इसलिये मैं कहना चाहूंगी की हर बदलाव को समय के साथ स्वीकार करना सबसे लिये महत्वपूर्ण है।
इंडस्ट्री हायरिंग में स्किल गैप है सबसे बड़ा चैलेंज
ज्यादातर एचआर के लिए रोल के लिए सही युवा का चयन करना बहुत चुनौती भरा काम होता है। जबकि देश में युवाओं की संख्या इस समय सर्वाधिक है। तो हर कंपनी को स्किल्ड युवा मिल जाने चाहिए। लेकिन कहीं न कहीं स्किल गैप की समस्या आज भी कंपनियां फेस कर रही हैं। आज के समय कॉलेज, यूनिवर्सिटीज को अपना कॅरिकुलम समय के साथ अपडेट करते रहना चाहिए क्योंकि जब तक स्टूडेंट यूनिवर्सिटी से बाहर निकलता है तब तक इंडस्ट्री का पैटर्न चेंज हो जाता है। क्योंकि कॅरिकुलम अपडेट न होने के कारण जो चीजें बच्चे सीख कर इंडस्ट्री में आ रहे हैं उनका जमाना जा चुका है। हर कुछ साल में टेक्नोलॉजी बदल रही है।
प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, इंटर्नशिप है प्रक्टिकल एक्स्पोजर के लिए जरूरी
इंटर्नशिप हर युवा के लिए जरूरी होती है। जिन भी संस्थानों में छात्र पढ़ रहे हैं, या स्किल सीख रहे हैं उन संस्थानों की ये जिम्मेदारी होती है कि थ्योरी के साथ साथ बच्चे को प्रक्टिकल नॉलेज भी दें। ताकि युवाओं को इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण दिया जा सके। जो उनके प्रक्टिकल एक्सपोजर के लिए जरूरी होता है।
लिंक्डइन से हायरिंग का पैटर्न बढ़ रहा है
पुराने समय में जो हायरिंग का पैटर्न था उसमें बहुत कम पोर्टल्स थे जिनके जरिये आवेदन किया जा सकता था। लेकिन आज के समय में सबसे नया खिलाड़ी लिंक्डइन है। जिसपर सभी को अपना प्रोफाइल बनाना चाहिए। आज के समय में लिंक्डइन के जरिये हायरिंग का पैटर्न लगातार बढ़ता जा रहा है।
इंटरव्यू का बदला है पैटर्न
आज से कुछ वर्ष पहले तक इंटरव्यू ऑफलाइन होते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से वर्चुअल इंटरव्यू का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। तो आज सबको आना चाहिए कि वर्चअल इंटरव्यू के लिए वो प्रिपेयर कैसे करें। साथ ही युवाओं को टेलीफोनिक इंटरव्यू देना सीखना चाहिए। क्योंकि फिजिकली उपस्थित होने में और वर्चुअल आने में एक असमानता है। कि फिजिकली में आप ज्यादा एक्सप्रेस कर पाते हैं। लेकिन वर्चुअल में कम समय में आपको ज्यादा लोगों से इंटरेक्ट करना होता है खुद की काबिलियत बतानी होती है। तो सबके लिए टेक्नोलॉजी सीखते रहना बहुत जरूरी है। क्योंकि ज्यादातर इंटरव्यू जूम या टीम एप के जरिये होते हैं।
सीवी में गैप के सवाल पर युवा ईमानदारी से दें जवाब
12वीं फेल मूवी में विक्रांत मेसी 12वीं में बार बार फेल होने पर जो जवाब दिया कि वो नकल करके क्यों पास नहीं हुआ। वहीं ईमानदारी हम सभी को अपने सीवी गैप के बारे में बात करते हुए दिखानी चाहिए। सच्चाई से जो हकीकत है वो बता देना चाहिए। कई लोग झूठ बोलकर अपने सीवी गैप को छिपाने की कोशिश करते हैं। जबकि युवाओं को याद रखना चाहिए जिस भी एचआर के सामने वो बैठे हैं उसके पास इंटरव्यू लेने का जो अनुभव वो कहीं ज्यादा है। वो आपके झूठ को तुरंत पकड़ लेंगे। इसलिये इंटरव्यू में कवरअप करने के बजाय सीवी में गैप की जो असल वजह हो एचआर को वो बता दें।
इंटरव्यू देने में घबराहट कैसे रोकें
कॉलेज या स्कूल में रहते समय आपको एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में भाग लेना शुरू करो। आपको पब्लिक स्पीकिंग का जितना भी मौका मिले न चूकें। परिवार के साथ बैठें तो भी बात करें। जितनी बार आप बात करेंगे आपका कांफिडेंस बूस्ट होगा। दूसरी बात इंटरव्यू में डर की कोई जरूरत नहीं है ज्यादा से ज्यादा क्या होगा आप शॉर्टलिस्ट नहीं होंगे। आप डरें बिल्कुल नहीं क्योंकि आज जॉब हर डायरेक्शन में आपको मिल जाएगी। किसी एक कंपनी में फेल होने का मतलब ये नहीं कि आपका सिलेक्शन नहीं होगा। एक जगह नहीं होगा तो दूसरी जगह होगा। आपके हाथ में होता है मेहनत करना, आपका कर्म करना। रिजल्ट आपके हाथ में नहीं होता। तो पूरी ईमानदारी से आप सच्चाई के साथ अपनी बात इंटरव्यू में रखें।
जो सामने आपका इंटरव्यू ले रहा है वह भी जरूरत के कारण ही आपका इंटरव्यू ले रहा है।
इंटरव्यू की भाषा क्या हो
उपासना रैना ने कहा कि ये काफी हद तक जॉब रोल पर निर्भर करता है। अगर जिस नौकरी के लिए आप इंटरव्यू दे रहे हैं उस नौकरी की डिमांड है कि आपको अंग्रेजी आनी चाहिए। तो जरूर आपको सीख लेनी चाहिए। लेकिन अगर उन नौकरियों को छोड़ दिया जाए जहां अंग्रेजी में कम्युनिकेशन जरूरी है। तो आपका जो भी लहजा, या भाषा जिसमें आप बात कर सकते हैं उसमें बात करिये। क्योंकि हर कंपनी विविधता पर विचार करती है। और कंपनी में विविध क्षेत्रों के लोगों को हायर भी करती हैं। अंग्रेजी के कारण आपको दिक्कत सिर्फ वहीं आ सकती है जहां काम का तरीका अंग्रेजी का ही हो। अगर आप अंग्रेजी से घबराते हैं या आपको अंग्रेजी नहीं आती है तो ऐसी जॉब चुनें जहां अंग्रेजी की जरूरत न हो।
लेकिन एक एचआर होने के नाते मैं ये जरूर सुझाव दूंगी कि अगर आप अंग्रेजी सीख लेंगे तो वो आपके लिए एक अतिरिक्त स्किल का काम करेगी।
कमेंट
कमेंट X