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कांच के टुकड़ों से चमक जाएगा कैरियर
एजुकेशन डेस्क
Updated Fri, 26 Sep 2014 01:55 PM IST
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हमारे दैनिक जीवन में कांच का इस्तेमाल कई रूपों में होता है। चाहे बर्तनों की बात हो या भवन निर्माण की, चिकित्सा की बात हो या विज्ञान संबंधी उपकरणों का जिक्र हो, फर्नीचर निर्माण हो या किसी शोपीस और शैंडेलिएर की रचना, खिलौनों की चर्चा हो या वाहन की, शीशे के बगैर बात बन ही नहीं सकती। हालांकि अब कांच की जगह कई रूपों में प्लास्टिक का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है, इसके बावजूद कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कांच की जगह कोई अन्य पदार्थ ले ही नहीं सकता। कांच के इस व्यापक इस्तेमाल के कारण यह रोजगार उत्पन्न करने के मामले में भी काफी महत्वपूर्ण है।
काम की रूपरेखा
इस सेक्टर में आप या तो ग्लास प्रोडक्शन से संबंधित कार्यों से जुड़ सकते हैं या इससे संबंधित क्राफ्ट वर्क्स से। ग्लास प्रोडक्शन में जहां बड़े पैमाने पर शीशे के उत्पादन से संबंधित कार्य किए जाते हैं, वही क्राफ्ट वर्क्स के तहत किसी वर्कशॉप या स्टूडियो में शीशे के विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं, जैसे ग्लास वेयर, स्टेंड ग्लास आदि। शीशे से संबंधित डिजाइनिंग का काम भी इसके तहत आता है।
कोर्स कैसे-कैसे
कांच की जरूरत और उपयोगित के मद्देनजर ही इससे संबंधित पाठ्यक्रम विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से कॅरियर की दिशा निर्धारित की जा सकती है। इस क्षेत्र में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के कोर्स हैं, जिनमें दाखिला लिया जा सकता है। ग्लास प्रौद्योगिकी और उत्पाद डिजाइन जैसे क्षेत्रों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी शमिल हैं। कांच से जुड़े पाठ्यक्रमों में आप कांच के गुणों को समझते हुए उसका विश्लेषणात्मक अध्ययन करते हैं। इसके तहत ग्लास की ढलाई और उत्पादन से संबंधित समस्त बारीकियों से आप अवगत होते हैं। इसके अलावा ग्लास पर नक्काशी और विभिन्न उत्पादों के लिए इसके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी भी आपको मिलती है।
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योग्यता क्या हो
ग्लास से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि आप ग्लास इंडस्ट्री में किस रूप में जुड़ना चाहते हैं। ग्लास इंजीनियरिंग के लिए जहां विज्ञान (पीसीएम) विषय से 12वीं पास होना चाहिए, वहीं ग्लास पेंटिंग या डेकोरेशन से संबंधित कोर्स में सभी आवेदन कर सकते हैं। आईआईटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई करनी हो तो जेईई (मेंस व एडवांस्ड) क्लियर करना होगा। अन्य संस्थानों के भी अपनी-अपनी प्रवेश प्रक्रियाएं होती हैं।
व्यक्तिगत गुण
सेरामिक और ग्लास से संबंधित उत्पादों पर नजर डालें तो उनमें क्रिएटिविटी और डिजाइनिंग का खास महत्व होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए क्रिएटिव माइंड का होना भी जरूरी है। इस क्षेत्र में टीम के साथ मिलकर काम करना आवश्यक है। प्रोडक्शन के कार्य से जुड़ने के लिए गर्म माहौल में भी धैर्यपूर्वक काम करने की क्षमता होनी चाहिए।
मौके अनेक
छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक, इस क्षेत्र में जॉब कई रूपों में उपलब्ध है। जॉब भी है और स्वरोजगार के तमाम अवसर भी उपलब्ध हैं। कोर्स करने के बाद आप अपनी शुरुआत एक प्रशिक्षु (ट्रेनी) के तौर पर कर सकते हैं। इसके तहत आप शीशे की फैक्टरी या कार्यशाला में काम कर सकते हैं। शीशा का कारोबार व्यापक है। इसलिए ग्लास सेक्टर में तकनीक से लेकर प्रबंधन तक कॅरियर की तमाम संभावनाएं उपलब्ध हैं। टेंटेड ग्लास, आर्टिफिशियन ज्वेलरी आदि बनाने वाली कंपनियों में भी आप अवसर पाते हैं।
मुख्य संस्थान
ग्लास एकेडमी, कांचीपुरम, तमिलनाडु
www.glass-academy.com
गौरांग इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लास डिजाइन टेक्नोलॉजी एंड इंफॉर्मेशन, अहमदाबाद
www.glassdesigninstitute.com
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, चेन्नई
www.iitm.ac.in/glassblowingsection
केंद्रीय कांच एवं सेरामिक अनुसंधान संस्थान, कोलकाता
www.cgcri.res.in
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
www.nid.edu
काम की रूपरेखा
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इस सेक्टर में आप या तो ग्लास प्रोडक्शन से संबंधित कार्यों से जुड़ सकते हैं या इससे संबंधित क्राफ्ट वर्क्स से। ग्लास प्रोडक्शन में जहां बड़े पैमाने पर शीशे के उत्पादन से संबंधित कार्य किए जाते हैं, वही क्राफ्ट वर्क्स के तहत किसी वर्कशॉप या स्टूडियो में शीशे के विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं, जैसे ग्लास वेयर, स्टेंड ग्लास आदि। शीशे से संबंधित डिजाइनिंग का काम भी इसके तहत आता है।
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कोर्स कैसे-कैसे
कांच की जरूरत और उपयोगित के मद्देनजर ही इससे संबंधित पाठ्यक्रम विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से कॅरियर की दिशा निर्धारित की जा सकती है। इस क्षेत्र में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के कोर्स हैं, जिनमें दाखिला लिया जा सकता है। ग्लास प्रौद्योगिकी और उत्पाद डिजाइन जैसे क्षेत्रों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी शमिल हैं। कांच से जुड़े पाठ्यक्रमों में आप कांच के गुणों को समझते हुए उसका विश्लेषणात्मक अध्ययन करते हैं। इसके तहत ग्लास की ढलाई और उत्पादन से संबंधित समस्त बारीकियों से आप अवगत होते हैं। इसके अलावा ग्लास पर नक्काशी और विभिन्न उत्पादों के लिए इसके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी भी आपको मिलती है।
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योग्यता क्या हो
ग्लास से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि आप ग्लास इंडस्ट्री में किस रूप में जुड़ना चाहते हैं। ग्लास इंजीनियरिंग के लिए जहां विज्ञान (पीसीएम) विषय से 12वीं पास होना चाहिए, वहीं ग्लास पेंटिंग या डेकोरेशन से संबंधित कोर्स में सभी आवेदन कर सकते हैं। आईआईटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई करनी हो तो जेईई (मेंस व एडवांस्ड) क्लियर करना होगा। अन्य संस्थानों के भी अपनी-अपनी प्रवेश प्रक्रियाएं होती हैं।
व्यक्तिगत गुण
सेरामिक और ग्लास से संबंधित उत्पादों पर नजर डालें तो उनमें क्रिएटिविटी और डिजाइनिंग का खास महत्व होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए क्रिएटिव माइंड का होना भी जरूरी है। इस क्षेत्र में टीम के साथ मिलकर काम करना आवश्यक है। प्रोडक्शन के कार्य से जुड़ने के लिए गर्म माहौल में भी धैर्यपूर्वक काम करने की क्षमता होनी चाहिए।
मौके अनेक
छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक, इस क्षेत्र में जॉब कई रूपों में उपलब्ध है। जॉब भी है और स्वरोजगार के तमाम अवसर भी उपलब्ध हैं। कोर्स करने के बाद आप अपनी शुरुआत एक प्रशिक्षु (ट्रेनी) के तौर पर कर सकते हैं। इसके तहत आप शीशे की फैक्टरी या कार्यशाला में काम कर सकते हैं। शीशा का कारोबार व्यापक है। इसलिए ग्लास सेक्टर में तकनीक से लेकर प्रबंधन तक कॅरियर की तमाम संभावनाएं उपलब्ध हैं। टेंटेड ग्लास, आर्टिफिशियन ज्वेलरी आदि बनाने वाली कंपनियों में भी आप अवसर पाते हैं।
मुख्य संस्थान
ग्लास एकेडमी, कांचीपुरम, तमिलनाडु
www.glass-academy.com
गौरांग इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लास डिजाइन टेक्नोलॉजी एंड इंफॉर्मेशन, अहमदाबाद
www.glassdesigninstitute.com
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, चेन्नई
www.iitm.ac.in/glassblowingsection
केंद्रीय कांच एवं सेरामिक अनुसंधान संस्थान, कोलकाता
www.cgcri.res.in
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
www.nid.edu
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