हिन्दुस्तान कॉलेज में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ खान का 'भारतीय सभ्यता मूल्यों' पर सीधा संवाद
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शारदा ग्रुप के प्रतिष्ठित संस्थान हिन्दुस्तान कॉलेज ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इंडस्ट्री इंटरफेस इंटरेक्शन के प्रमुख श्री जितेंद्र मुदलियार की देख रेख में भारतीय सभ्यता मूल्यों पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमे मुख्य वक्ता भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री, लेखक एवं मुख्य उच्चतम न्यायलय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आरिफ मोहम्मद खान रहे। श्री आरिफ मोहम्मद खान बुलन्दशहर के एक सुदूर गांव से निकलकर, जामिया मिलिया इस्लामिया एवं अलीगढ़ विश्वविद्यालय से पढ़कर, अध्यक्ष पद पर रहे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व सदस्य भी हैं, एवं अनेक सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव कुमार उपाध्याय ने मुख्य वक्ता श्री आरिफ मोहम्मद खान को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनन्दन किया। ततपश्चात अपने स्वागत सम्बोधन में संस्थान कि उपलब्धियों
पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। संस्थान के अधिशासी प्रो. वी.के शर्मा ने अपने स्वागत सम्बोधन में मुख्य वक्ता के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया तथा उनके जीवन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। साथ ही उनके
उपरोक्त विषय पर विचार सुनने के लिए श्रोताओं को सौभाग्यशाली बताया और उनके आगमन को संस्थान के लिए गौरव की बात कहा।
शारदा ग्रुप के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री प्रदीप महथा ने अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त किया और उनके पूर्व में सुने हुए कुछ विशेष वक्तवयों की चर्चा की और कहा कि वह हमेशा नारी सशक्तिकरण के पक्ष में रहे है और सच पर अड़ने वाले व्यक्ति है। उन्होंने हाल ही में तीन तलाक को अवैध घोषित कराने में अपना पूर्ण समर्थन किया।
मुख्य वक्ता जोकि भारत के पूर्व कैबिनेट मंत्री, लेखक एवं उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आरिफ मोहम्मद खान ने अपने सम्बोधन में स्वयं को सच और केवल सच का पक्षधर बताया और भारतीय सभ्यता के मूल्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्तर में हिमालय से दक्षिण में हिन्दमहासागर के मध्य स्थित स्थान को भारत कहते है, और यहाँ रहने वाला प्रत्येक भारतवासी कहलाता है। भारतीय सभ्यता का वर्णन वेदों से मिलता है। मानव मस्तिष्क में किसी भी तरह का वैचारिक युद्ध शुरू होता है।
'हमें अपनी संस्कृति में स्वीकृति का विकास करना चाहिए'
परन्तु इसको निष्क्रिय करने के लिए एक रक्षात्मक शांति प्रणाली का विकास उसी वक्त होना अति आवश्यक है। विश्व में गत 70 वर्षों में अगर कोई राष्ट्रीय लोकतंत्र की रक्षा करने में सक्षम है तो केवल भारत वर्ष है। उन्होंने स्वामी रंगनाथन की आख्या का ज़िक्र करते हुए कहा कि हम सभी भारतीय नागरिक है, प्रजा नहीं क्योंकि प्रजा राजा की होती है। यहाँ हर पाँच वर्ष बाद सरकारों को जनता का समर्थन हासिल करना होता हैं, और चुनी गयी सरकारें जनता के मूल अधिकारों का ध्यान रखतीं हैं।
हम है क्योंकि हम सोचते है, अगर हम जागरूक नहीं होंगे तो हम आजाद भी नहीं रह सकते है। हम सभ्य तब कहलाते है जब भावना, जज्बात, स्नेह से ऊपर उठ कर अपनी अक्ल का इस्तेमाल करते हैं। प्रकृति का इतिहास लाखों वर्ष पुराना है पर सभ्यता का इतिहास पाँच-सात हज़ार वर्ष से अधिक पुराना नहीं हैं।
इससे पूर्व लोग भावना, स्नेह, जज्बात के सहारे जिया करते थे। सभ्यता ने ही इस मुल्क की संस्कृति को बनाए रखा है जोकि स्मृतियों में लिखा है 'एकम सत विप्रा बहुधा वदंति' अर्थात सत्य एक ही होता है, विद्धता इसे अलग अलग तरह से विवरित करते हैं। अज्ञानता से अपने आप में एक बड़ी पीढ़ा होती है, लोग उस वक़्त अपने दुश्मन बन जाते है, जिसका आपको ज्ञान नहीं होता। रामायण एवं महाभारत का अनेक प्रसंग लेकर उन्होंने संवेदनाओं की चर्चा की और कहा कि जहाँ संवेदना नहीं वहाँ प्रकृति का भयावह रूप बनता चला जाता है।
दिल बड़ा होना चाहिए और हमें अपनी संस्कृति में स्वीकृति का विकास करना चाहिए। भारत एक देश है जहाँ विभिन्न नस्लों के लोग अपने अलग अलग ईष्टों की पूजा करते हुए अलग अलग रस्मों रिवाज़ से एक दूसरे को स्वीकार करते है एवं संकीर्णता से ऊपर उठ कर निवास करते हैं। भारत में कॉपी राइट एवं पेटेंट जैसी चीजों में जहां प्रकृति का सानिध्य है विश्वास नहीं किया जाता है। यहाँ हर पुस्तक का लेखक एक व्यास माना जाता है।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन देने इंडस्ट्री इंटरफ़ेस इंटरेक्शन के प्रमुख श्री जितेंद्र मुदलयार न किया। इस अवसर पर शारदा ग्रुप के शोध एवं विकास सलाहकार डॉ. डी.जी राय चौधरी, डीन स्टूडेंट
वेलफेयर श्री संदीप अग्रवाल, प्रो संजय जैन, डॉ. वी.के गुप्ता, डॉ. वाई.सी घाटे, श्री पुनीत मंगला, श्री अनुराग बाजपाई, श्री प्रमोद कुमार, श्रीमती रिचा कपूर, श्री शंकर ठाकर, श्री मुनीष खन्ना, डॉ. राजीव कुमार तिवारी आदि समस्त शिक्षक एवं छात्र छात्राओं ने रोचक व्याख्यान का आनंद लिया।
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