वो 5 केटेगरी जिसके आधार पर IISc को HRD रैंकिंग में पहले नंबर पर रखा गया
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रैंकिंग में अलग-अलग कैटेगरी के अलावा ओवर ऑल रैंकिंग भी जारी की गई है। इस वर्ष तकरीबन 3300 संस्थानों ने इस रैंकिंग सिस्टम में हिस्सा लिया था। देश के 70% रिसर्च प्रोजेक्ट इन्हीं संस्थानों से निकलते हैं। जनरल ओवर ऑल रैंकिंग के हिसाब से टॉप-10 कॉलेजों में IISc पहले नंबर पर रहा।
आईए जानते हैं वो 5 वजहें जिसकी वजह से आईआईएससी रहा टॉप पर:
एनआईआरएफ ने रैंकिंग जारी करने से पहले 5 कैटेगरी बनाई थी। जिसमें हर कैटेगरी को 100 मार्क्स दिए गए थे।
1.टीचिंग, लर्निंग और रिसोर्स:
इसके तहत कॉलेज में कुल कितने पीएचडी के स्टूडेंट हैं, फैक्ल्टी कितने हैं, पीएचडी और दूसरे रिसर्च के लिए कितनी सुविधाएं हैं। इसके अलावे रिसर्च के लिए जो सुविधाएं दी जा रही हैं उनका कितना इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके आधार पर कॉलेज की रैंकिंग हुई।
आईआईएससी की वेबसाइट पर दिए गए डाटा के मुताबिक कॉलेज में कुल 4071 छात्रों के लिए 431 फैकल्टी नियुक्त किए गए हैं।
2.रिसर्च और प्रोफेशनल प्रेक्टिस:
इस केटेगरी में संस्थान ने कुल कितने रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं, उनकी क्वालिटी कैसी थी। इनमें से कुल कितने पेपर पेटेंट के लिए डाले गए हैं। कितनों को पेटेंट लाईसेंस मिल चुका है। आगे के प्रोजेक्ट के लिए क्या तैयारियां कर ली गई हैं।
अगर आईआईएससी की बात की जाए तो वहां रिसर्च और पेटेंट पर ही सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है।
आउट रीच एंड इंक्लूसिविटी
3.ग्रेजुएशन आउटकम्स:
इस केटेगरी में वहां पढ़ रहे स्टूडेंट्स के प्लेसमेंट के अलावे उनको कितने पैकेज मिले इस आधार पर रैंकिंग की जाती है।
4.आउट रीच एंड इंक्लूसिविटी:
इस केटेगरी में दूसरे राज्यों या विदेशों से आने वाले छात्रों की संख्या, कुल कितने प्रतिशत महिलाओं को एडमीशन दिया गया, कितने ऐसे छात्र हैं जो समाज के दबे तबके से आते हैं। इसके आधार पर रैंकिंग दी जाती है। साथ ही साथ दिव्यांग छात्रों के लिए कितने शिक्षकों को नियुक्त किया गया है, इसके भी मार्क्स दिए गए।
5.पर्सेपसन:
इसमें संस्थान से जुड़ने वाली जो संस्थाएं हैं, उनका इस संस्थान के बारे में क्या सेचना है, दूसरे कॉलेजों का क्या मानना है। इसके आधार पर रैंकिंग दी जाती है और आईआईएससी का इसमें भी आगे निकलना लाजमी था।
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