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Life Skills: पाठ्यपुस्तकों के इतर भी सीखें, जीवन कौशल भी जरूरी; चुनौतियों से निपटने की मिलती है ताकत

Sat, 21 Feb 2026 12:32 PM IST
शाहीन परवीन संध्या राजपुरोहित, शिक्षा सलाहकार
संध्या राजपुरोहित, शिक्षा सलाहकार Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 21 Feb 2026 12:32 PM IST
सार

Personality Development: आज की शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जीवन कौशल बच्चों के व्यक्तित्व को मजबूत बनाते हैं और उन्हें सही निर्णय लेने के साथ-साथ वास्तविक परिस्थितियों का आत्मविश्वास से सामना करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

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Beyond Textbooks: Life Skills Are Essential for Building Resilient Children
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

Life Skills: 21वीं सदी केवल तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि मानवीय चुनौतियों की भी सदी है। आज बच्चे सूचना और तकनीक से घिरे हुए हैं, फिर भी वे भावनात्मक रूप से असुरक्षा और तनाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। यदि शिक्षा बच्चों को जीवन की कठिनाइयों से जूझने का साहस और भावनात्मक समझ नहीं देती, तो वह अधूरी है।

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इसीलिए जीवन कौशल शिक्षा आवश्यक है। यह बच्चों को आत्मविश्वास, सही निर्णय लेने की क्षमता, भावनात्मक संतुलन और वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। जीवन कौशल केवल कॅरिअर नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास और एक सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला है।

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जीवन कौशल क्या हैं?

जीवन कौशल वे मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक क्षमताएं हैं, जो व्यक्ति को जीवन की विभिन्न परिस्थितियों का संतुलित और प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाती हैं। ये कौशल स्पष्ट सोच, सही निर्णय, प्रभावी संवाद और समस्याओं के तार्किक समाधान में सहायता करते हैं।

जीवन कौशल केवल व्यावहारिक दक्षताओं तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को भी परिपक्व बनाते हैं। इनमें आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, सहानुभूति, नेतृत्व क्षमता, समय-प्रबंधन, टीमवर्क और रचनात्मक सोच जैसे गुण शामिल हैं। इनके विकास से व्यक्ति व्यक्तिगत जीवन में सफल होने के साथ-साथ समाज में एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनता है।

दबाव से मुक्ति

वर्तमान समय में युवाओं को पढ़ाई, कॅरिअर, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान पर्याप्त नहीं होता। जीवन कौशल शिक्षा विद्यार्थियों को तनाव का प्रबंधन करने, सही निर्णय लेने और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायता करती है। इसके माध्यम से वे आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन पाते हैं।

शिक्षा प्रणाली में भूमिका

विद्यालयों और महाविद्यालयों में जीवन कौशल शिक्षा को गतिविधियों, समूह चर्चाओं, भूमिका अभिनय, परियोजना कार्यों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रभावी रूप से शामिल किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है तथा उनमें नेतृत्व क्षमता और सहयोग की भावना का विकास होता है।

प्रमुख कौशल

प्रमुख जीवन कौशलों में संचार, समस्या समाधान, निर्णय क्षमता, भावनात्मक संतुलन तथा टीमवर्क और नेतृत्व शामिल हैं। संचार कौशल व्यक्ति को अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में मदद करता है। समस्या समाधान और निर्णय क्षमता चुनौतियों में सही विकल्प चुनने की समझ विकसित करते हैं। भावनात्मक संतुलन कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने में सहायक होता है। वहीं टीमवर्क और नेतृत्व व्यक्ति को समूह में मिलकर काम करने और जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन देने योग्य बनाते हैं।

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