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आखिर क्यों बाबासाहेब आंबेडकर को 'ज्ञान का प्रतीक' के रूप में जाना जाता है?
Tue, 14 Apr 2020 11:02 AM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 14 Apr 2020 11:02 AM IST
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- फोटो : social media
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कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा तो की ही है साथ ही महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया है। 14 अप्रैल को भारतीय संविधान के जनक डॉ. भीमराव आंबेडकर की 129वीं जयंती मनाई जाएगी। हालांकि इस वर्ष पूरा देश आंबेडकर जयंती को सार्वजनिक स्थान पर नहीं मना पाएगा। सब अपने घरों में रहकर उन्हें याद करेंगे।
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मुख्य तथ्य-
- बता दें कि डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर पहले कानून मंत्री तो थे ही इसके अलावा वे स्वतंत्र भारत के वकील और राजनीतिज्ञ भी थे। वह कई डिग्री वाले एक उच्च शिक्षित व्यक्ति थे।
- दिलचस्प बात यह है कि वह दक्षिण एशिया के पहले व्यक्ति थे जिन्हें अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया था। वे संस्कृत सहित कुछ भारतीय भाषाओं को जानने के अलावा, कई यूरोपीय भाषाओं को भी जानते थे।
- मात्र 24 साल की उम्र में उन्होंने 'कास्ट्स इन इंडिया- इन मैकेनिज्म, जेनेसिस एंड डेवलपमेंट' पर अपना पत्र लिखा। उन्होंने अपने पेपर में कई जाने-माने विद्वानों को भी चुनौती दी, जिन्होंने पहले से ही जाति पर पत्र लिखा था।
- प्राथमिक शिक्षा, 1902 सतारा, महाराष्ट्र
- मैट्रिकुलेशन, 1907, एलफिंस्टन हाई स्कूल, बॉम्बे (वर्तमान में मुबंई) फारसी, आदि
- इंटर यानी 12वीं कक्षा 1909, एलफिंस्टन कॉलेज, बॉम्बे फारसी और अंग्रेजी
- बीए, 1913, एल्फिंस्टन कॉलेज, बॉम्बे, बॉम्बे विश्वविद्यालय, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान
- एमए, 1915 मेजरिंग इन इकोनॉमिक्स विथ सोशलॉजी, इतिहास दर्शन, नृविज्ञान और राजनीति
- पीएचडी, 1917, कोलंबिया विश्वविद्यालय ने पीएचडी की उपाधि प्रदान की।
- एम.एससी 1921 जून, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, लंदन
- बैरिस्टर-एट-लॉ 30-9-1920 ग्रे इन, लंदन
- डी.एससी 1923, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, लंदन 'द प्रॉब्लम ऑफ द रूपी - इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन' ने अर्थशास्त्र में डिग्री के लिए स्वीकार किया।
- एलएलडी (ऑनोरिस कोसा) 5-6-1952 में कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क में उनकी उपलब्धियां और नेतृत्व
- डी.लिट (ऑनोरिस कोसा) 12-1-1953 उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद उनकी उपलब्धियां और नेतृत्व
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