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ढाई हजार पदों पर जल्द होगी भर्ती, उच्च शिक्षा निदेशालय ने दिया निर्देश
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 04 Feb 2018 01:13 PM IST
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फाइल फोटो
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उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के गठन के बाद लाखों प्रतियोगियों को जल्द ही राहत मिलेगी। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद आयोग में ठप पड़ी भर्तियों को पुन: शुरू किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
तकरीबन दस माह पूरे हो गए हैं और आयोग के स्तर से अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के तकरीबन 1652 और प्राचार्य के 284 पदों पर भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। हालांकि, राहत की बात है कि आयोग के गठन के पहले ही दिन उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से अस्टिंट प्रोफेसर के 534 नए पदों का अधियाचन भी आयोग को भेज दिया गया।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की ओर से विज्ञापन संख्या 46 के तहत प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1652 पदों पर भर्ती की जानी थी। इसके तहत तकरीबन 1150 पदों पर परीक्षा और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी करते हुए अंतिम परिणाम भी जारी कर दिया गया था।
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बाद में चयनितों को कॉलेज में ज्वाइनिंग भी मिल गई, लेकिन प्रदेश के सत्ता परिवर्तन के साथ आयोग में भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई। ऐसे में बाकी पांच सौ पदों पर भर्तियां ठप हो गईं। इससे पहले विज्ञापन संख्या 47 के तहत भी अशासकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 पदों और विज्ञापन संख्या 48 के तहत अशासकीय कॉलेजों में प्राचार्य के 284 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे।
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तकरीबन दस माह पूरे हो गए हैं और आयोग के स्तर से अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के तकरीबन 1652 और प्राचार्य के 284 पदों पर भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। हालांकि, राहत की बात है कि आयोग के गठन के पहले ही दिन उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से अस्टिंट प्रोफेसर के 534 नए पदों का अधियाचन भी आयोग को भेज दिया गया।
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उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की ओर से विज्ञापन संख्या 46 के तहत प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1652 पदों पर भर्ती की जानी थी। इसके तहत तकरीबन 1150 पदों पर परीक्षा और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी करते हुए अंतिम परिणाम भी जारी कर दिया गया था।
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बाद में चयनितों को कॉलेज में ज्वाइनिंग भी मिल गई, लेकिन प्रदेश के सत्ता परिवर्तन के साथ आयोग में भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई। ऐसे में बाकी पांच सौ पदों पर भर्तियां ठप हो गईं। इससे पहले विज्ञापन संख्या 47 के तहत भी अशासकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 पदों और विज्ञापन संख्या 48 के तहत अशासकीय कॉलेजों में प्राचार्य के 284 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे।
शुरू से ही मेधावी रहीं डॉ. रजनी
फाइल फोटो
दोनों ही विज्ञापनों के तहत आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी, लेकिन आयोग में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति न होने से यह दोनों भर्तियां भी फंसी हुईं थी। अब अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति के बाद भर्तियों का रास्ता साफ हो गया है।
इसके अलावा उच्च शिक्षा की निदेशक प्रीति गौतम ने अपनी ज्वाइनिंग के पहले ही दिन शनिवार को अशासकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 534 पदों के लिए अधियाचन उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को भेज दिया है। आयोग जल्द ही इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करेगा।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के चार सदस्यों में एक डॉ. रजनी त्रिपाठी इलाहाबाद से जुड़ी हुई हैं और शुरू से ही मेधावी रहीं। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की टॉपर रह चुकी हैं और इसके लिए वर्ष 1982 में राज्यपाल ने उन्हें सम्मानित भी किया था।
वर्तमान में वह प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद की प्राचार्य हैं। डॉ. रजनी त्रिपाठी की पहली नियुक्ति वर्ष 1983 में राजकीय महिला महाविद्यालय देवरिया में हुई थी। इसके बाद वह राजकीय डिग्री कॉलेज हमीरपुर में तैनात रहीं।
इसके बाद अपने मूल जनपद उरई चली गईं और अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। वर्ष 1999 में उनका प्राचार्य पद के लिए हो गया। वह दो सितंबर 2002 से प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्राचार्य के पद पर तैनात हैं। उनका रिटायरमेंट फरवरी 2027 में है।
इसके अलावा उच्च शिक्षा की निदेशक प्रीति गौतम ने अपनी ज्वाइनिंग के पहले ही दिन शनिवार को अशासकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 534 पदों के लिए अधियाचन उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को भेज दिया है। आयोग जल्द ही इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करेगा।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के चार सदस्यों में एक डॉ. रजनी त्रिपाठी इलाहाबाद से जुड़ी हुई हैं और शुरू से ही मेधावी रहीं। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की टॉपर रह चुकी हैं और इसके लिए वर्ष 1982 में राज्यपाल ने उन्हें सम्मानित भी किया था।
वर्तमान में वह प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद की प्राचार्य हैं। डॉ. रजनी त्रिपाठी की पहली नियुक्ति वर्ष 1983 में राजकीय महिला महाविद्यालय देवरिया में हुई थी। इसके बाद वह राजकीय डिग्री कॉलेज हमीरपुर में तैनात रहीं।
इसके बाद अपने मूल जनपद उरई चली गईं और अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। वर्ष 1999 में उनका प्राचार्य पद के लिए हो गया। वह दो सितंबर 2002 से प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्राचार्य के पद पर तैनात हैं। उनका रिटायरमेंट फरवरी 2027 में है।
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