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बढ़ रहा शिक्षा पर संकट, 8वीं कक्षा के 56% छात्रों की सामान्य गणित में हालत बदतर : रिपोर्ट

Wed, 16 Jan 2019 10:16 AM IST
शशांक गौर एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शशांक गौर Updated Wed, 16 Jan 2019 10:16 AM IST
सार

  • कक्षा 5वीं के 41.6 फीसदी बच्चे दूसरी का पाठ पढ़ पाते हैं। 
  • 8वीं के 36.6% बच्चे ही 3 अंकों से 1 का भाग दे पाते हैं। 
  • प्राइमरी स्कूलों में 8 फीसदी बच्चे स्कूल ही नहीं पहुंच रहे हैं।
  • सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले आठवीं कक्षा के 64.4 फीसदी बच्चे केवल कक्षा दूसरी का ही पाठ पढ़ पाते हैं।

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according to report 56% students can't do basic maths know more information

विस्तार

प्रथम एनजीओ की एनुअल स्टेट ऑफ एजुकेशन 2018 रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक बच्चों की स्थिति देखने को मिली। बीते वर्षों के मुताबिक बच्चों के विकास और सीखने की क्षमता में गिरावट देखने को मिली।
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आपको बता दें कि रिपोर्ट में ये पाया गया कि आठवीं कक्षा के 56 प्रतिशत बच्चे भाग में कमजोर हैं वे तीन अंकों की संख्या को एक नंबर से भाग नहीं दे सकते। अगर बात पांचवीं कक्षा की करें तो 72 प्रतिशत बच्चों को भाग करने का मतलब ही नहीं पता।
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तीसरी कक्षा के छात्रों पर भी ये रिपोर्ट आई कि 70 प्रतिशत बच्चों को घटाना ही नहीं आता। गणित विषय पर इस तरह की खराब हालत देखने को मिली। छात्राओं की संख्या ज्यादा है लड़कों के सामने ।लड़कों ने 50 प्रतिशत लड़के और लड़कियों में 44 प्रतिशत बच्चे सफलतापूर्वक भाग कर पाए। 

आपको बता दें कि बच्चो में पढ़ने की समस्या भी पाई गयी है। 27 प्रतिशत बच्चे पढ़ ही नहीं सकते। ये रिपोर्ट 28 राज्यों के 596 जिलों के माध्यम से बनाई गई है। इसमें 3 वर्ष से 16 वर्ष तक के 3.5 लाख परिवार और 5.5 लाख बच्चे शामिल हुए।  

एएसईआर की रिपोर्ट में सबसे अच्छी खबर यह है कि भारत में पहली बार स्कूल में दाखिला नहीं लेने वाले बच्चों का अनुपात 3% से कम हो गया है अब यह अनुपात 2.8% है। यह सुधार आयु समूहों और लिंग में देखा गया है। उदाहरण के लिए, 2018 में, 11 से 14 आयु वर्ग की लड़कियों का अनुपात 2006 की तुलना में 10.3% से घटकर 4.1% रह गया।
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