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थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन राम की कृपा हुई
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नवनीत शरण
नई दिल्ली। थोड़े समय के लिए ही सही, लेकिन भगवान राम की कृपा हुई। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की खुशी में घर-घर दीप जलाने की चाहत ने सड़क के किनारे रहने वाले कुम्हारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। अस्सी साल की बुजुर्ग महिला के आर्थिक संकट को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया है लेकिन फिलहाल कुछ राहत दी है।
कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन में दिल्ली में भगवान की मूर्ति, दीये, घड़ा बना कर रोजी-रोटी चलाने वाले कुम्हारों की हालत भी दयनीय हो गई थी। अब उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। लोग अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की खुशी में जमकर मिट्टी के दिये और भगवान राम की मूर्ति खरीद रहे हैं। हालांकि यह क्षणिक है क्योंकि पांच अगस्त के बाद फिर से समस्याएं खड़ी होंगी।
ढक्का गांव की सड़कों के किनारे बसे कुम्हार भी इन दिनों मिट्टी के दीये बेचने में व्यस्त हैं। पिछले 40 वर्ष से दिल्ली में इस व्यवसाय से जुड़ी 85 साल की उत्तर प्रदेश के एटा की रामा देवी का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से रोजगार खत्म हो गया था। पिछले एक सप्ताह से रामजी की वजह से कुछ कमाई हो रही है। रमा देवी का कहना है कि हरियाणा से मिट्टी न आने से मांग पूरी नहीं कर सकीं।
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कुम्हार राजीव कालरा का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से कई संगठन दीयों की मांग कर रहे हैं। आम दिनों की तुलना में पांच गुणा ज्यादा बिक्री हो रही है। मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। देर शाम राम मंदिर बनने की खुशी में कालरा मुफ्त में दीये व तेल भी बांटते दिखे।
अचानक मिट्टी के दीये की बढ़ी मांग से उनकी कीमत भी बढ़ गई है। एक रुपये में दीये पांच मिलते थे, लेकिन अब एक रुपये में एक बिक रहा है। हालांकि मंदिर निर्माण की वजह से लोग खुशी-खुशी पांच दीये खरीद रहे हैं और कुम्हारों से पूछ भी नहीं रहे है कि दीये महंगे क्यों कर दिए। दीया खरीदने पहुंची महिला रेवा का कहना था कि इतने रुपये तो लोग मंदिर में चढ़ावा चढ़ा देते हैं।
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नई दिल्ली। थोड़े समय के लिए ही सही, लेकिन भगवान राम की कृपा हुई। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की खुशी में घर-घर दीप जलाने की चाहत ने सड़क के किनारे रहने वाले कुम्हारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। अस्सी साल की बुजुर्ग महिला के आर्थिक संकट को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया है लेकिन फिलहाल कुछ राहत दी है।
कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन में दिल्ली में भगवान की मूर्ति, दीये, घड़ा बना कर रोजी-रोटी चलाने वाले कुम्हारों की हालत भी दयनीय हो गई थी। अब उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। लोग अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की खुशी में जमकर मिट्टी के दिये और भगवान राम की मूर्ति खरीद रहे हैं। हालांकि यह क्षणिक है क्योंकि पांच अगस्त के बाद फिर से समस्याएं खड़ी होंगी।
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ढक्का गांव की सड़कों के किनारे बसे कुम्हार भी इन दिनों मिट्टी के दीये बेचने में व्यस्त हैं। पिछले 40 वर्ष से दिल्ली में इस व्यवसाय से जुड़ी 85 साल की उत्तर प्रदेश के एटा की रामा देवी का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से रोजगार खत्म हो गया था। पिछले एक सप्ताह से रामजी की वजह से कुछ कमाई हो रही है। रमा देवी का कहना है कि हरियाणा से मिट्टी न आने से मांग पूरी नहीं कर सकीं।
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कुम्हार राजीव कालरा का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से कई संगठन दीयों की मांग कर रहे हैं। आम दिनों की तुलना में पांच गुणा ज्यादा बिक्री हो रही है। मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। देर शाम राम मंदिर बनने की खुशी में कालरा मुफ्त में दीये व तेल भी बांटते दिखे।
अचानक मिट्टी के दीये की बढ़ी मांग से उनकी कीमत भी बढ़ गई है। एक रुपये में दीये पांच मिलते थे, लेकिन अब एक रुपये में एक बिक रहा है। हालांकि मंदिर निर्माण की वजह से लोग खुशी-खुशी पांच दीये खरीद रहे हैं और कुम्हारों से पूछ भी नहीं रहे है कि दीये महंगे क्यों कर दिए। दीया खरीदने पहुंची महिला रेवा का कहना था कि इतने रुपये तो लोग मंदिर में चढ़ावा चढ़ा देते हैं।