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Ukraine Crisis : आंखों ने बयां की बेइंतहा दर्द की दास्तां, जुबां पर आया सरहद का संकट

Thu, 03 Mar 2022 03:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Mar 2022 03:39 AM IST
सार

बंकर में भूखे-प्यासे कई रातें काटने के बाद मीलों पैदल चलकर रोमानिया और  हंगरी के बॉर्डर पहुंचे विद्यार्थियों को वहां भी सुकून नहीं मिला। यहां यूक्रेन की पुलिस से धक्के खाने पड़े। लाठियां भी खाईं। कइयों को तो इसी सरहद पर तीन-तीन दिन तक इंतजार करना पड़ा। बम धमाकों के खौफ के बीच तमाम कष्टों को मजबूती से झेलने वाले बच्चे स्वदेश पहुंचे तो अपनों को देख टूट गए... उन्हें सीने से लगाकर परिजन भी भावुक हो गए।

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What is the condition of Indian students trapped in Ukraine, some students who returned home told
ukraine - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूक्रेन संकट के चलते वहां फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी बॉर्डर पार करने की थी। रोमानिया, पोलैंड और हंगरी में दाखिल होने से पहले छात्र-छात्राओं को वाहनों की भारी भीड़ की वजह से लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ा।

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यूक्रेन से दूसरे देशों की सरहद पार पहुंचने के बाद भी दो से तीन दिन का इंतजार करना पड़ा है। बदरपुर निवासी रमेश सिंघल अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ एयरपोर्ट पर पहुंचे। उनकी बेटी मानसी एयर इंडिया की फ्लाइट से लौटी तो परिजनों की बेसब्री और बढ़ गई। मां, भाई, बहन और पापा ने हाथ में झंडे ले लिए थे और भारत माता के जयकारे लगाए। मानसी के पिता ने बताया कि उनकी बेटी का मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। करीब आठ घंटे तक बातचीत नहीं हो सकी। कई छात्रों के पास मोबाइल तो थे, लेकिन सीमाओं के आसपास सिग्नल न मिलने पर बात नहीं हो पा रह थी।
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बॉर्डर पर भारी भीड़ और धक्कामुक्की के बीच कुछ छात्रों के मोबाइल, लैपटॉप भी टूट गए। मानसी ने बताया कि भारत लौटने के लिए सात दिनों के सफर में यूक्रेन बॉर्डर पर इंतजार बेहद मुश्किल था। पिता ने बार-बार हौसला देते हुए कहा सुरिक्षत पहुंचने के लिए जरूरी है कि बॉडर को जल्द पार करें। बेटी को हिम्मत रखने की बात कहते हुए कहा कि हालात को देखते हुए फैसला लो। फिर मानसी तीसरी बार लाइन में पहुंची और बॉर्डर पार कर रोमानिया पहुंची।
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7 भाइयों में अकेली बहन को तिरंगे और वेलकम केक के साथ लेने पहुंचे परिजन
दिल्ली के कराला गांव की रहने वाली आयुषी की मां और मामा हरीश के साथ पूरा परिवार एयरपोर्ट पर खुशी से वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाते हुए आयुषी का स्वागत कर रहा था। परिवार के सदस्यों ने इस तरह केक काटा, जैसे उनकी बेटी का फिर से जन्म हुआ हो। एयरपोर्ट पर मौजूद लोग भारत माता की जय बोले बगैर अपने आप को रोक नही पाए। आयुषी ने बताया कि वह बॉर्डर पर भारतीयों के साथ वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे के साथ हिम्मत जुटा रही थी। एयरपोर्ट पर पहुंचते ही आयुषी ने अपने परिजन के साथ केक काटा और वंदे मातरम कहते हुए घर चल दिया। मुजफ्फरनगर की मरियम का परिवार भी अपनी खुशियां जाहिर करने में पीछे नहीं रहा। केक काटकर परिजनों ने अपनी बच्ची को पाने की खुशी का इजहार किया।

ताउम्र नहीं भूलेंगे यूक्रेन सीमा के नजदीक बिताए तीन दिन
नरौरा के बवराला निवासी अतुल को यूक्रेन से पोलैंड पहुंचने के लिए तीन दिन का इंतजार करना पड़ा। टर्नोपिल में पढ़ रहे मेडिकल के छात्र ने बताया कि उनके रवाना होने के दो घंटे बाद ही वहां के एयरपोर्ट पर धमाका हुआ।

पोलैंड में प्रवेश करने के बाद कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन सीमा के पास बिताए तीन दिन, ताउम्र नहीं भूल सकेंगे। अतुल ने बताया कि पोलैंड में उन्हें अधिकारियों ने छूट दी कि अगर आगे की पढ़ाई पोलैंड में करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। यूक्रेन के हालात जल्द न सुधरे तो हो सकता है कि यूक्रेन से लौटने वाले छात्र नजदीकी देशों का भी रुख कर सकते हैं। अतुल ने बताया कि यूक्रेन में हालात अभी भी बेहद खराब हैं। कई दोस्तों के साथ रवाना हुए, लेकिन बॉर्डर तक पहुंचने से पहले अधिकतर पीछे छूट गए। यूक्रेन की फौज किसी भी छात्र को कोई भी वजह बताकर पीछे भेज देती हैं।

पोलैंड में प्रवेश देने से पहले सुरक्षा के लिहाज से सख्ती से जांच की जा रही है। इसके बाद भी  बर्ताव में कोई भी कमी दिखी तो लाइन में पीछे भेज दिए जाते हैं। इस कारण छात्रों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। ब्यूरो

दिल्ली एयरपोर्ट पर यूक्रेन से आए छात्रों के लिए विशेष रेलवे आरक्षण केंद्र
ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन से भारत लौटे विद्यार्थियों को आईजीआई एयरपोर्ट से उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। ट्रेन में बच्चों के लिए आरक्षित बर्थ सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने दिल्ली एयरपोर्ट पर विशेष आरक्षण केंद्र का इंतजाम किया है। इसकी निगरानी खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कर रहे हैं। विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए मंत्रालय के विशेष अधिकारी भी एयरपोर्ट पर तैनात किए गए हैं और बच्चों को कन्फर्म टिकट दिया जाएगा। एयरपोर्ट के विशेष रेल आरक्षण काउंटर का निरीक्षण खुद रेल मंत्री ने किया। साथ ही मंगलवार देर रात यूक्रेन से लौटे भारतीय बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए स्वागत भी किया।

बॉर्डर पर बिछड़ी सगी बहनें अभी तक नहीं मिली

नोएडा के कई विद्यार्थी यूक्रेन से निकलकर रोमानिया और अन्य पड़ोसी देशों में पहुंच चुके है, लेकिन अभी उनकी घर वापसी का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। वहीं यूक्रेन में रूस का हमला तेज होने की सूचना मिलते ही परिजन परेशान हो जाते हैं। अब सभी बच्चों के आने का इंतजार कर रहे हैं। असतौली गांव की दो सगी बहनें आंचल और मोनिका यूक्रेन से बाहर निकल चुकी हैं। बड़ी बहन आंचल रोमानिया बॉर्डर के पास सुकेवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 37 किमी दूर एक स्टेडियम में ठहरी है। आंचल ने बताया कि स्टेडियम की व्यवस्था अच्छी है। वहीं छोटी बहन मोनिका रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में एक शेल्टर होम में है। सभी भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। यहां 180 बच्चे रुके हुए हैं। मोनिका ने बताया कि अधिकारी नाम लिख कर ले गए हैं, लेकिन अभी तक पता कि वो कब निकलेंगे। उसने बताया कि यहां पर रहने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है। वह अपना सभी सामान यूक्रेन में छोड़ आई थीं। जिसमें लैपटॉप, मोबाइल, चार्जर, टैबलेट व बिस्कुट है। वहां से निकली मोनिका के साथ ओडिसा की यूरेका, महाराष्ट्र की स्वाति भी है। 


विश्वशांति के लिए गुरुद्वारा बंगला साहिब में अखंड पाठ
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की सलामती के लिए दिल्ली के गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ किया जा रहा है। बुधवार को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भारतीय मूल के छात्र की मृत्यु पर दुख प्रकट किया। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने दुख जाहिर करते हुए कहा कि पोलैंड के गुरुद्वारा सिंह सभा वारसा में जरूरतमंदों के लिए लंगर लगाया जा रहा है। पोलैंड के इस गुरुद्वारा साहिब में सभी धर्मों के लोग एक साथ रह रहे हैं जो भारतीयता को दर्शाता है। उधर, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने स्तर पर यूक्रेन से आने वाले लोगों को ठहराने का इंतजाम कर रही है। 

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