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स्कूल खोलने पर अभिभावकों का दो मत
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की विशेषज्ञ समिति की ओर से चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोले जाने की सिफारिश के बाद अभिभावकों का दो मत सामने आ रहा है। कुछ अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल न खुलने से बच्चों का बहुत नुकसान हो रहा है। वहीं कुछ का कहना है कि विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं ऐसे में कुछ हफ्ते या महीने इंतजार करने में कोई बुराई नहीं है।
दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा कि कोरोना का जोखिम अभी समाप्त नहीं हुआ है। विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं, ऐसे में अभी स्कूल खोलना सही निर्णय नहंी हैं। अभी ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं, कुछ हफ्ते बाद स्कूल खोलने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। अभिभावक अंजलि का कहना है कि स्कूलों को खोलना है, तो पूरी तरह से कक्षाएं नहीं शुरू करनी चाहिए। शुरूआत में मिश्रित शिक्षा दी जा सकती है।
वहीं ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन की ओर से स्कूलों को खोलने की मांग की जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि इसमें देरी करने का क्या औचित्य है। सत्र 2020-21 की तरह 2021-22 सत्र भी शून्य होता जा रहा है। वर्तमान में कक्षा 10, 11 और 12 के छात्र दाखिले और बोर्ड परीक्षा से संबंधित गतिविधियों के लिए माता-पिता की सहमति से स्कूलों में जा सकते हैं।
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दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा कि कोरोना का जोखिम अभी समाप्त नहीं हुआ है। विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं, ऐसे में अभी स्कूल खोलना सही निर्णय नहंी हैं। अभी ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं, कुछ हफ्ते बाद स्कूल खोलने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। अभिभावक अंजलि का कहना है कि स्कूलों को खोलना है, तो पूरी तरह से कक्षाएं नहीं शुरू करनी चाहिए। शुरूआत में मिश्रित शिक्षा दी जा सकती है।
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वहीं ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन की ओर से स्कूलों को खोलने की मांग की जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि इसमें देरी करने का क्या औचित्य है। सत्र 2020-21 की तरह 2021-22 सत्र भी शून्य होता जा रहा है। वर्तमान में कक्षा 10, 11 और 12 के छात्र दाखिले और बोर्ड परीक्षा से संबंधित गतिविधियों के लिए माता-पिता की सहमति से स्कूलों में जा सकते हैं।
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