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खुलासा: खाने में मिलाई नशे की गोली, सोते ही चलाई गोली, टूटी त्रिलोचन सिंह वजीर की सांस

Thu, 16 Sep 2021 12:01 AM IST
नोएडा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Thu, 16 Sep 2021 12:01 AM IST
सार

हत्या के आरोपियों ने 3 सितंबर को त्रिलोचन सिंह की हत्या की थी। इसके बाद चारों आरोपी 4 सितंबर की सुबह जम्मू चले गए। ये जम्मू जाने से पहले शव को ठिकाने लगाना चाहते थे, लेकिन नहीं लगा पाए।

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Trilochan Singh was conspiratorially called to Delhi
trilochan singh wazir murder case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता व जम्मू-कश्मीर के पूर्व एमएलसी त्रिलोचन सिंह वजीर की हत्या हरमीत ने की थी। इससे पहले हरमीत ने उन्हें खाने में नशे की गोलियां दे दी थीं। इसके बाद सोते हुए गोली मार दी। शव को चादर में लपेटकर बाथरूम में डाल दिया था। हथियार हरमीत ही लेकर आया था। अब तक की जांच में पता चला है कि त्रिलोचन की हत्या साजिश रचकर की गई है। त्रिलोचन सिंह को साजिश के तहत ही दिल्ली बुलाया गया था।

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जम्मू से गिरफ्तार राजेंद्र उर्फ राजू को बुधवार सुबह दिल्ली लाकर कोर्ट में पेश करने के बाद अपराध शाखा को सौंप दिया गया। पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, त्रिलोचन सिंह जम्मू-कश्मीर गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी व जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन रहे हैं। राजू ने बताया कि मोती नगर के जिस मकान में त्रिलोचन की हत्या हुई, वह फरवरी में 29 हजार रुपये किराए पर लिया गया था।
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राजेंद्र ने बताया कि वह हत्या की साजिश में था, लेकिन उसे नहीं पता कि हत्या का कारण क्या था। इन लोगों ने 3 सितंबर को त्रिलोचन सिंह की हत्या की थी। इसके बाद चारों आरोपी 4 सितंबर की सुबह जम्मू चले गए। ये जम्मू जाने से पहले शव को ठिकाने लगाना चाहते थे, लेकिन नहीं लगा पाए। ये अलग-अलग रास्तों व वाहनों से जम्मू गए थे। त्रिलोचन का शव ठिकाने लगाने के लिए ये 8 सितंबर को फिर दिल्ली आए, लेकिन इस बार भी नाकाम रहे। त्रिलोचन सिंह हत्या के एक मामले में जेल गए थे। तब उन्हें काफी दिन जेल में रहना पड़ा था।
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ये हैं साजिश के सूत्रधार
हरमीत सिंह : आपराधिक प्रवृति का व्यक्ति। ट्रांसपोर्ट कारोबारी। अनुमान है कि उसकी ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को लेकर त्रिलोचन सिंह से प्रतिद्वंद्विता व रंजिश रही हो। त्रिलोचन हत्या के मामले में जेल गया था। उसी समय हरमीत भी जेल गया था। दोनों साथ रहे थे। हरमीत को लगता था कि त्रिलोचन सिंह उसके बेटे की हत्या कराना चाहते हैं। इसी कारण वह त्रिलोचन की हत्या में शामिल हुआ था।

हरप्रीत सिंह : जम्मू के एक स्थानीय अखबार का एडिटर इन चीफ। त्रिलोचन के बचपन का दोस्त। दोनों एक साथ पढ़े थे। साजिश के तहत उन्हें दिल्ली बुलाया। हरप्रीत के मामा की वर्ष 1983 में हत्या हुई थी। इस वारदात में त्रिलोचन सिंह का नाम आया था। हरप्रीत को लगता था कि उसके मामा की हत्या त्रिलोचन ने कराई थी। इसी कारण रंजिश मानता था।

राजेंद्र उर्फ राजू : मुंबई के टैक्सी चालक को हरप्रीत ने एक वर्ष पहले बुलाया था। हरप्रीत ने उसे दिल्ली में टैक्सी चलाने का काम दिलाने का भरोसा दिया था। हरप्रीत के कहने पर वही जम्मू से त्रिलोचन सिंह का सामान दिल्ली लेकर आया था। इस मामले में सबसे पहले गिरफ्तारी भी उसी की हुई है।


बिला उर्फ बिल्ले : इसके बारे में पुलिस को अभी कोई खास जानकारी नहीं मिली है। इसकी पूरी पहचान और वारदात में शामिल होने के कारण के बारे में हरप्रीत और हरमीत की गिरफ्तारी के बाद ही खुलासा हो सकेगा।

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