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दिल्ली : सालाना 10 हजार से ज्यादा बच्चों में मिल रहा थैलेसीमिया, चेतावनी के साथ डॉक्टरों ने दी सलाह
Mon, 14 Mar 2022 03:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 14 Mar 2022 03:56 AM IST
सार
रविवार को अपोलो अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने अस्पताल आए तीमारदारों से अपील की है कि थैलेसीमिया और सिकलसेल रोग का समय से पता चल जाए तो इसका उपचार संभव है। इस दौरान बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट एवं सैल्युलर थेरेपी के बारे में भी बताया गया।
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- फोटो : Social Media
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विस्तार
हर साल 10 हजार से ज्यादा बच्चों में थैलेसीमिया मिल रहा है। वहीं, सिकलसेल की बात करें तो थैलेसीमिया से करीब तीन गुना अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। रविवार को अपोलो अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने अस्पताल आए तीमारदारों से अपील की है कि थैलेसीमिया और सिकलसेल रोग का समय से पता चल जाए तो इसका उपचार संभव है। इस दौरान बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट एवं सैल्युलर थेरेपी के बारे में भी बताया गया।
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डॉ. गौरव खारया ने बताया कि जांच होते ही उनका उपचार शुरू हो जाता है, जिसके बाद जीवन भर ब्लड ट्रांसफ्यूजन या फिर आयरन चिलेशन आदि की जरूरत पड़ती है। इन दोनों ही मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट एक मात्र स्थायी उपचार होता है। दुर्भाग्य से सिर्फ 25-30 फीसदी मरीजों को ही उनके परिवार से आनुवांशिक एचएलए दाता मिल पाता है, जबकि 70 फीसदी मरीज इससे वंचित रह जाते हैं।
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