फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Stifling air will drown in Delhi

दमघोंटू हवा का दिल्ली में घुटेगा दम

Wed, 10 Feb 2021 02:11 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 02:11 AM IST
विज्ञापन
Stifling air will drown in Delhi
नई दिल्ली। दिल्ली की दमघोंटू हवा का दम घोंटने की कवायद दिल्ली सरकार ने शुरू कर दी है। सरकार का पहला कदम प्रदूषण के स्रोत की रीयल टाइम मानिटरिंग करने की दिशा में है। इसके बाद स्रोत को खत्म करने की कोशिश सरकार करेगी। आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली और टेरी के विशेषज्ञ इस काम में सरकार के मददगार होंगे। मंगलवार को विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने इसका विस्तृत प्रजेंटेशन भी दिया।
विज्ञापन

केजरीवाल ने माना कि अगर वास्तविक समय के आधार पर प्रदूषण के स्रोत का पता चल जाएगा तो इसे खत्म करने के लिए सरकार तत्काल जरूरी कार्रवाई करेगी। विशेषज्ञों से रजामंदी जाहिर करते हुए केजरीवाल ने कहा कि पर्यावरण विभाग अब इसका प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के सामने रखेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार इस तकनीक पर काम करेगी। शुरुआत में पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली के हॉट स्पॉट वाले एरिया में सुपर साइट और मोबाइल साइट लगाए जाएंगे। बेहतर परिणाम देने पर इसका विस्तार किया जाएगा। इसके हकीकत बनने के बाद दिल्ली देश का पहला शहर होगा, जहां प्रदूषण के स्रोत की रीयल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी।
विज्ञापन

केजरीवाल के मुताबिक, सरकार आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और टेरी के साथ मिलकर वास्तविक समय पर प्रदूषण के स्रोत का पता लगाएगी। इससे पहले भी प्रदूषण कम करने पर काम हो रहा है। इसी मकसद से ई-वाइन पॉलिसी लाई गई है। अब दिल्ली सरकार तकनीक की मदद से वास्तविक समय में प्रदूषण के स्रोत का पता लगा पाएगी ताकि उसके मुताबिक कदम उठाए जा सकें। केजरीवाल ने बैठक में संबंधित अधिकारियों को इस तकनीक के प्रयोग की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

तकनीक से प्रदूषण के स्रोत का रीयल टाइम चलेेगा पता
इस तकनीक से पता लगाया जा सकता है कि एक वास्तविक समय में उस स्थान पर किस वजह से अधिक प्रदूषण हो रहा है। जिस स्थान पर प्रदूषण हो रहा है, वहां पर प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कौन-कौन से कारक हैं और उसमें वाहन, धूल और फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं आदि का कितना योगदान है। इससे प्रदूषण से निपटने में सहूलियत होती है। मसलन, यदि किसी एरिया में शाम 5 से 8 बजे तक वाहनों का प्रदूषण सबसे अधिक है, तो सरकार वाहनों का दबाव कम करने की योजना बनाएगी। इसी तरह अगर किसी स्थान पर अगर धूल का प्रदूषण अधिक है, तो सरकार उसके लिए उचित इंतजाम करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed