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मोबाइल कंपनियों को राहत: टावर लगाने के लिए पांच साल के लिए न्यूनतम पांच नहीं अब तीन लाख देना होगा शुल्क
Sun, 22 Aug 2021 06:52 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 22 Aug 2021 06:52 PM IST
सार
नागरिकों को बेहतर मोबाइल नेटवर्क सुविधाएं मिले इसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशानुसार दक्षिणी निगम ने मोबाइल सेवा प्रदाता व दूरसंचार इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कंपनियों की मध्यस्थता से नए शुल्क का निर्धारण किया है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने मोबाइल नेटवर्क टावर लगाने की अनुमति देने के नियमों में बदलाव किया है। इससे मोबाइल फोन सेवा प्रदाता कंपनियों को फायदा होगा। अब इन्हें मोबाइल टावर लगाने के लिए प्रति पांच वर्ष में पांच नहीं केवल तीन लाख न्यूनतम शुल्क देना होगा। निगम का मानना है कि इससे क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क और संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ होगा।
नागरिकों को बेहतर मोबाइल नेटवर्क सुविधाएं मिले इसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशानुसार दक्षिणी निगम ने मोबाइल सेवा प्रदाता व दूरसंचार इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कंपनियों की मध्यस्थता से नए शुल्क का निर्धारण किया है।
दक्षिणी निगम की नई अधिसूचना के अनुसार छत आधारित टावर, भूमि आधारित टावर व भूमि आधारित मास्ट के लिए अब 300000 रुपये पांच वर्षों के लिए शुल्क देना होगा। निगम ने पहले 500000 रुपया शुल्क लेने का प्रस्ताव पास किया था।
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अब मोबाइल टावर का इस्तेमाल एक से अधिक कम्पनियां करती हैं तो इन्हें अलग से शुल्क नहीं देना पड़ेगा। 12 मीटर लंबे पोल आधारित साइटों के लिए 25000 रुपया प्रति सेवा प्रदाता की दर से शुल्क देना होगा। पोल साइट की ऊंचाई 12 मीटर से अधिक है तो मोबाइल टावर के लिए निर्धारित शुल्क लगेगा।
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नागरिकों को बेहतर मोबाइल नेटवर्क सुविधाएं मिले इसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशानुसार दक्षिणी निगम ने मोबाइल सेवा प्रदाता व दूरसंचार इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कंपनियों की मध्यस्थता से नए शुल्क का निर्धारण किया है।
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दक्षिणी निगम की नई अधिसूचना के अनुसार छत आधारित टावर, भूमि आधारित टावर व भूमि आधारित मास्ट के लिए अब 300000 रुपये पांच वर्षों के लिए शुल्क देना होगा। निगम ने पहले 500000 रुपया शुल्क लेने का प्रस्ताव पास किया था।
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अब मोबाइल टावर का इस्तेमाल एक से अधिक कम्पनियां करती हैं तो इन्हें अलग से शुल्क नहीं देना पड़ेगा। 12 मीटर लंबे पोल आधारित साइटों के लिए 25000 रुपया प्रति सेवा प्रदाता की दर से शुल्क देना होगा। पोल साइट की ऊंचाई 12 मीटर से अधिक है तो मोबाइल टावर के लिए निर्धारित शुल्क लगेगा।