शाहीन बाग: दुकानों के आधे खुले शटर के पीछे शुरू हुआ कारोबार, सीधी बिक्री अभी भी बंद
शाहीन बाग में पिछले 54 दिन से लगातार धरना-प्रदर्शन जारी है। इस प्रदर्शन के कारण शाहीन बाग की दुकानें लगातार बंद चल रही हैं और इसकी वजह से करोड़ों के व्यापार का नुकसान हो रहा है। लेकिन लगता है कि अब शाहीन बाग के व्यापारियों का धैर्य चुकने लगा है और उन्हें अपने व्यापार की चिंता सताने लगी है। शादियों के सीजन की शुरुआत ने दुकानदारों पर पहले से लिए गये ऑर्डर की समय पर डिलीवरी करने का दबाव बढ़ा दिया है।
यही कारण है की अब कुछ दुकानों के शटर आधे खुलने लगे हैं। आधी शटर खुली दुकानें दूर से तो बंद दिखती हैं, लेकिन उनके पीछे कामकाज शुरू हो चुका है। गुरुवार दोपहर यहां तीन-चार शो रूम आधे खुले मिले, जिनमें लोगों का आना-जाना बना हुआ था और उनमें कामकाज हो रहा था। इनमें एक टेलरिंग की दुकान के साथ-साथ एक होटल, एक एक्वेरियम और एक अन्य दुकान शामिल है। इनके आलावा छोटी-छोटी दुकानों में भी कुछ-कुछ कारोबार होने लगा है।
शाहीन बाग में कामकाज की स्थिति की जांच-पड़ताल के दौरान एक स्थानीय निवासी ने बताया कि यहां कपड़ों की डिजाइनिंग, एंब्रॉयडरी, जरदोजी, गोटापट्टी, फुलकारी, दबका, कटदाना, जरी और मिरर वर्क का कामकाज खूब होता है। शादियों में दूल्हे और दुल्हन के कपड़ों की विशेष डिजाइनिंग के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं।
एक-एक शेरवानी-लहंगे और शरारा की कीमत दस हजार रुपयों से लेकर लाखों रुपये तक में होती है। दूसरे शहरों से भी इसके थोक आर्डर लेकर यहां ये कामकाज किया जाता है। शादियों का सीजन शुरू हो चुका है और कमाई के लिहाज से यह सबसे अहम समय है। लेकिन इस प्रदर्शन के कारण कामकाज को भारी नुकसान हुआ है। वहीं अब दुकानदार और नुकसान बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं हैं।
स्थानीय सूत्र के मुताबिक बड़े व्यापारियों की तरफ से सीजन की शुरुआत के पहले ही भारी मात्रा में आर्डर दिए जाते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है और अब उनकी डिलीवरी का टाइम आ चुका है। लेकिन प्रदर्शन के कारण डिलीवरी नहीं हो पा रही है जिसके कारण दुकानदारों पर दबाव बढ़ गया है। पहले से ही भारी मात्रा में एडवांस ले चुके दुकानदार अब किसी भी तरह उनकी सप्लाई करना चाहते हैं। लेकिन प्रदर्शन के कारण वे खुलकर यह काम नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से अब सप्लाई पूरी करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
सुबह शुरू और शाम को बंद
शाहीन बाग में मुख्य प्रदर्शन शाम पांच-छह बजे से शुरू होकर देर रात तक चलता है। यही कारण है कि इन दुकानों में सुबह से लेकर शाम चार-पांच बजे तक के आसपास काम होता है। मुख्य प्रदर्शन के समय दुकानें पूरी तरह बंद रखी जा रही हैं, जिससे इसका कोई ‘गलत’ संदेश न जाए।
जानकारी के मुताबिक इसके लिए व्यापारियों की प्रदर्शनकारियों से आपसी सहमती बनी हुई है, जिसके कारण कामकाज और प्रदर्शन दोनों के साथ-साथ चलते रहने के रास्ते खोज लिए गये हैं। लेकिन सामान की सीधी बिक्री या ग्राहकों को सीधा सामान बेचने वाले शोरूम अभी भी पूरी तरह से बंद हैं और इस प्रदर्शन का सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं को हो रहा है।
बिहार से आए मजदूरों की समस्या बढ़ी
शादी के कपड़ों पर विशेष डिजाइनिंग करने वाले एक कारीगर के मुताबिक बंद का सबसे बड़ा नुकसान बिहार के कारीगरों-श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। ये वर्ग दिहाड़ी और प्रति कपड़े पर किये गए काम के आधार पर मजदूरी लेता है, लेकिन कामकाज ठप होने से उनकी समस्या बढ़ गई है।
इसका हल निकालने के लिए कुछ व्यापारी दुकानों के शटर खोलकर मजदूरों को अंदर बुला ले रहे हैं और बाद में शटर गिरा दे रहे हैं। इससे दुकान बाहर से बंद ही दिखती है। कुछ व्यापारियों ने मुख्य सड़क के पीछे की गलियों में अस्थायी जगह लेकर वहां भी कामकाज करना शुरू कर दिया है।
कब से शुरू हुआ प्रदर्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर को संसद से नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 पारित कर दिया। इसके बाद जामिया इलाके में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे। प्रदर्शन के दौरान कुछ बसों को जला दिया गया और कुछ बसों पर महिलाओं-बच्चों के रहते हुए भी उन पर पत्थरबाजी की गई। आरोप है कि हमलों के बाद पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में घुस गये। इसके कारण दिल्ली पुलिस की भारी आलोचना हुई।
इस घटना के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में घुसकर दिल्ली पुलिस ने 15 दिसंबर को छात्रों की पिटाई कर दी थी। स्थानीय निवासियों ने छात्रों की पिटाई का घोर विरोध किया और इसके बाद से ही जामिया विश्वविद्यालय के मुख्य गेट और शाहीन बाग़ में प्रदर्शन शुरू हो गया जो अब तक जारी है।