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Road Accident: खौफनाक था मंजर, सड़क पर पड़े थे शव, कुछ लोग दर्द से छटपटा रहे थे
Thu, 22 Sep 2022 06:34 AM IST
निर्मल कांत
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 22 Sep 2022 06:34 AM IST
सार
लोगों का कहना है कि झुग्गियों के अंदर गर्मी की वजह से पुरुष सदस्य बाहर फुटपाथ या डिवाइडर पर आकर सो जाते थे। मंगलवार देर रात जब हादसा हुआ, तब लोग एक लाइन से पतले से डिवाइडर पर सो रहे थे।
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सीमापुरी रोड एक्सिडेंट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीमापुरी हादसे के बाद वहां का मंजर बेहद खौफनाक था। जिसने भी हालात देखे, उसके रोंगटे खड़े हो गए। सड़क पर कुछ लोगों के शव पड़े थे, जबकि कुछ लोग दर्द से छटपटा रहे थे। सीमापुरी बस डिपो के पास नजदीक में ही एक पीसीआर वैन खड़ी थी। लोग भागकर वहां पहुंचे। इस बीच कुछ लोगों ने पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना देने से पहले थाने को भी खबर दे दी।
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घटनास्थल पर थाने की ईआरवी वैन भी पहुंच गई। मौके पर स्ट्रीट लाइट का खंभा गिरा हुआ था। इसके अलावा हताहत हुए लोगों के बिस्तर भी वहां बिखरे पड़े थे। खबर मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए। लोगों का कहना है कि झुग्गियों के अंदर गर्मी की वजह से पुरुष सदस्य बाहर फुटपाथ या डिवाइडर पर आकर सो जाते थे। मंगलवार देर रात जब हादसा हुआ, तब लोग एक लाइन से पतले से डिवाइडर पर सो रहे थे।
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मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि देर रात वह घटनास्थल के नजदीक रिक्शे के पास खड़े होकर अपने जानकार से बातचीत कर रहा था। अचानक उसने तेज ब्रेक लगने की आवाज सुनी। जैसे ही उसने सामने देखा तो एक तिरपाल चढ़ा ट्रक डिवाइडर पर चढ़ता हुआ डीएलएफ टी-प्वाइंट की ओर चला गया।
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वह भागकर मौके पर पहुंचा, तो देखा कि करीम और शाह आलम कुचली हुई हालत में वहां पड़े हुए थे। मनीष के हाथ पर ट्रक चढ़ गया था, जबकि प्रदीप की दोनों टांगें टूटकर लटकी हुई थीं। इस बीच शोर मच गया और लोग झुग्गियों से निकलकर इकट्ठे हो गए। बाद में पुलिस वहां पहुंची तो घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में वहां सो रहे तीन से चार लोग बाल-बाल बच गए।
स्थानीय निवासी रहीम ने बताया कि झुग्गियों में रहने वाले ज्यादातर लोग कूड़ा बीनते हैं। एक महिला ने बताया कि कई बार लोगों से अपने घर जाकर ही सोने के लिए कहा गया, लेकिन वह खुले में सोने के कारण सड़क पर ही सो जाते थे।
भगवान ने दूसरा जीवन दिया, कभी डिवाइडर पर नहीं सोएंगे
मनीष और प्रदीप भगवान का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे। हादसे के बाद दोनों बुरी तरह डरे हुए हैं। मनीष का कहना था कि भगवान ने उसे दूसरा जीवन दिया है। अब वह कभी डिवाइडर या फुटपाथ पर नहीं सोएगा। प्रदीप का कहना था कि मौत बस उसकी टांगों से होकर गुजर गई। ट्रक के पहिये उसकी टांगों पर चढ़ गए थे, लेकिन हादसे में उसकी जान बच गई।
मनीष ने बताया कि वह जीवनभर इस हादसे को नहीं भूल पाएगा। मंगलवार रात वह अपने घर से कबाड़ बेचने के लिए सीमापुरी आया था। रात होने की वजह से उसने अपने दोस्तों के साथ वहीं पर खाना खाया और रुक गया। वह डिवाइडर पर ही सो गया।
उसका कहना था कि देर होने की वजह से न तो गाड़ी मिलती और फिर कुछ अप्रिय होने का खतरा भी बना रहता। ट्रक मनीष के एक हाथ पर चढ़ा और वह गिर गया। इसके बाद ट्रक प्रदीप की दोनों टांगों पर चढ़ता हुआ आगे बढ़ गया। प्रदीप ने बताया कि सभी को कुचलने के बाद ट्रक चालक रुका भी, लेकिन उसने भागने में ही अपनी भलाई समझी।
पहले भी हुए इस तरह के हादसे
20 अप्रैल 2022: कश्मीरी गेट इलाके में लोहा पुल के पास अंडरपास में कार सवार छात्र ने फुटपाथ पर सो रहे चार लोगों पर कार चढ़ा दी थी। हादसे में एक की मौत व तीन जख्मी।
12 मार्च 2022: पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में बीएमडब्ल्यू कार चालक ने डिवाइडर पर सो रहे दो लोगों को कुचला। एक की मौत, दूसरा जख्मी।
31 मार्च 2021: निगम बोध घाट के पास टेंपो बेकाबू होकर फुटपाथ पर चढ़ा। दो की मौत, हादसे में एक स्कूटी सवार की भी जान चली गई।
पांच लाख हादसों में डेढ़ लाख लोगों की जान गई
वर्ष 2021 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार पांच लाख सड़क हादसे हुए। इनमें डेढ़ लाख लोगों की जान गई, जबकि तीन लाख लोग जख्मी हुए।