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जमींदोज बिल्डिंग का मालिक गिरफ्तार
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नई दिल्ली। सब्जी मंडी इलाके में सोमवार सुबह चार मंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस ने इसके मालिक मोहक अरोड़ा (26) को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में पुलिस को पता चला कि मोहक ने 25 दिन पूर्व ही ग्राउंड फ्लोर की प्रॉपर्टी खरीदी थी। इसके बाद दुकान के अंदर बने चबूतरे को तोड़ने के दौरान ही बिल्डिंग जमींदोज हो गई। यहां काम करा रहा ठेकेदार अभी हाथ नहीं आया है। हादसे में जान गंवाने वाले मासूमों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए। मोहक अरोड़ा के खिलाफ गैरइरादतन हत्या और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोहक अरोड़ा पिता राजेंद्र अरोड़ा और अन्य परिजनों के साथ सब्जी मंडी इलाके की पंजाबी बस्ती में रहता है। सब्जी मंडी रोड पर ही पिता-पुत्र की बिजली उपकरणों की दुकान है। करीब 25 दिन पूर्व मोहक ने लक्ष्मण प्रसाद की बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर का हिस्सा खरीदा था।
इसमें सामने दो शटर लगे थे। पहले यहां दूध की डेयरी थी, इसलिए दुकान के अंदर बड़ा चबूतरा (प्लेटफॉर्म) बना हुआ था। मोहक यहां भी बिजली उपकरणों का काम करना चाहता था। इसलिए रेनोवेशन करा रहा था। जांच में पुलिस को पता चला कि चबूतरा बिल्डिंग की दीवारों से मिलकर बना हुआ था। उसे तोड़ते ही बिल्डिंग की बुनियाद हिल गई और मकान जमींदोज हो गया।
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जांच में पुलिस को पता चला है कि हादसे से चंद मिनट पूर्व ही वहां काम कर रहे मजदूर बिल्डिंग से निकल गए थे। इमारत गिरी तो वे सब भी वहां से चले गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डिंग काफी पुरानी थी। इसलिए उसके साथ छेड़छाड़ नहीं करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी मोहक उसमें काम करा रहा था।
सब्जी मंडी मेन बाजार रोड पर इमारत के मलबे की चपेट में आकर दो मासूमों की मौत हो गई थी, जबकि बुजुर्ग पान विक्रेता जख्मी हो गए थे। आशंका जताई जा रही थी कि मलबे में कुछ और लोग दबे हुए हैं। सात जेसीबी लगाकर मलबे को देर रात तक साफ कर लिया गया, लेकिन वहां से कोई और नहीं मिला। हादसे के बाद पड़ोस की एक और जर्जर इमारत को मंगलवार को ढहा दिया गया।
मासूम सौम्य और प्रशांत के जाने के बाद से उनके परिजनों के आंसू थम नहीं रहे हैं। पुलिस ने मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव परिवार को सौंप दिए। परिजनों ने भारी दिल और नम आंखों से निगम बोध घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया। सोमवार सुबह बच्चों की मौत की खबर सुनने के बाद से ही उनकी मां आयुषी की तबीयत खराब है। उन्हें बाड़ा हिंदूराव अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देर रात उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। परिजन उन्हें समझाने के प्रयास में जुटे हैं। उधर, दोनों बच्चों की मौत के बाद उनके दादा जुगल किशोर की भी हालत खराब है। परिजनों का कहना है कि उनकी तो दुनिया ही उजड़ गई। एक रिश्तेदार ने बताया कि पहले नितिन व आयुषी की शादी 14 साल पहले हुई थी। शादी के दो साल बाद सौम्य का जन्म हुआ। इसके बाद प्रशांत पैदा हुआ। दोनों बच्चे घर की रौनक थे। अब दोनों के एक साथ जाने से पूरा परिवार बुरी तरह टूट गया है।
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जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोहक अरोड़ा पिता राजेंद्र अरोड़ा और अन्य परिजनों के साथ सब्जी मंडी इलाके की पंजाबी बस्ती में रहता है। सब्जी मंडी रोड पर ही पिता-पुत्र की बिजली उपकरणों की दुकान है। करीब 25 दिन पूर्व मोहक ने लक्ष्मण प्रसाद की बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर का हिस्सा खरीदा था।
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इसमें सामने दो शटर लगे थे। पहले यहां दूध की डेयरी थी, इसलिए दुकान के अंदर बड़ा चबूतरा (प्लेटफॉर्म) बना हुआ था। मोहक यहां भी बिजली उपकरणों का काम करना चाहता था। इसलिए रेनोवेशन करा रहा था। जांच में पुलिस को पता चला कि चबूतरा बिल्डिंग की दीवारों से मिलकर बना हुआ था। उसे तोड़ते ही बिल्डिंग की बुनियाद हिल गई और मकान जमींदोज हो गया।
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जांच में पुलिस को पता चला है कि हादसे से चंद मिनट पूर्व ही वहां काम कर रहे मजदूर बिल्डिंग से निकल गए थे। इमारत गिरी तो वे सब भी वहां से चले गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डिंग काफी पुरानी थी। इसलिए उसके साथ छेड़छाड़ नहीं करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी मोहक उसमें काम करा रहा था।
सब्जी मंडी मेन बाजार रोड पर इमारत के मलबे की चपेट में आकर दो मासूमों की मौत हो गई थी, जबकि बुजुर्ग पान विक्रेता जख्मी हो गए थे। आशंका जताई जा रही थी कि मलबे में कुछ और लोग दबे हुए हैं। सात जेसीबी लगाकर मलबे को देर रात तक साफ कर लिया गया, लेकिन वहां से कोई और नहीं मिला। हादसे के बाद पड़ोस की एक और जर्जर इमारत को मंगलवार को ढहा दिया गया।
मासूम सौम्य और प्रशांत के जाने के बाद से उनके परिजनों के आंसू थम नहीं रहे हैं। पुलिस ने मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव परिवार को सौंप दिए। परिजनों ने भारी दिल और नम आंखों से निगम बोध घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया। सोमवार सुबह बच्चों की मौत की खबर सुनने के बाद से ही उनकी मां आयुषी की तबीयत खराब है। उन्हें बाड़ा हिंदूराव अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देर रात उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। परिजन उन्हें समझाने के प्रयास में जुटे हैं। उधर, दोनों बच्चों की मौत के बाद उनके दादा जुगल किशोर की भी हालत खराब है। परिजनों का कहना है कि उनकी तो दुनिया ही उजड़ गई। एक रिश्तेदार ने बताया कि पहले नितिन व आयुषी की शादी 14 साल पहले हुई थी। शादी के दो साल बाद सौम्य का जन्म हुआ। इसके बाद प्रशांत पैदा हुआ। दोनों बच्चे घर की रौनक थे। अब दोनों के एक साथ जाने से पूरा परिवार बुरी तरह टूट गया है।