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प्रदूषण पर लगाम : पर्यावरण की रक्षा के लिए दिल्ली में जरूरी है पुराने वाहनों पर पाबंदी

Mon, 21 Jun 2021 04:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 21 Jun 2021 04:02 AM IST
सार

  • दिल्ली के परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया, केंद्र सरकार के निर्देशों को लागू करना मुश्किल
  • 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के इस्तेमाल पर जारी है कार्रवाई

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Old vehicles should be banned in Delhi to protect the environment
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विस्तार

आपके पास 10 साल पुराना डीजल या 15 वर्ष पुराना पेट्रोल व सीएनजी वाहन है तो दिल्ली-एनसीआर की राह में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आपका वाहन जब्त हो सकता है या भारी भरकम जुर्माना भरना पड़ सकता है। बेशक केंद्र सरकार ने देश भर में वाहनों के पंजीकरण की मियाद पांच वर्ष बढ़ाने की घोषणा की है, लेकिन दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुराने वाहनों के इस्तेमाल पर छूट की उम्मीदें काफी कम हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि दिल्ली में प्रदूषण में कमी के लिए पुराने वाहनों पर प्रतिबंध जरूरी है।

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दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत भी ट्वीट कर स्पष्ट कर चुके हैं कि राजधानी में केंद्र के निर्देश लागू करना जटिल है। इस मामले में सरकार, अदालत की ओर रुख करने की तैयारी में है। पर्यावरण की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए ईवी पॉलिसी के तहत वाहन स्क्रैप इंसेंटिव का भी प्रावधान किया है। इससे पुराने वाहन कम करने के साथ-साथ ई-वाहनों से पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना संभव होगा।
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केस नंबर-1
दिल्ली की सीमा में दाखिल होते ही निखिल की बाइक को रोकते हुए ट्रैफिक पुलिस ने दस्तावेज दिखाने को कहा। बाइक 15 साल से अधिक पुरानी थी, इसलिए जब्त करने की बात कही। निखिल के काफी आग्रह करने पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने दोबारा दिल्ली में प्रवेश नहीं करने की हिदायत देने के साथ वाहन को छोड़ दिया। अब निखिल गाजियाबाद से दिल्ली आने के लिए केवल मेट्रो से सफर करते हैं। गाजियाबाद में भी बाइक घर से नहीं निकालते।
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केस नंबर - 2
अपनी कार से रोजाना दिल्ली का सफर करने वाले ऋषि के साथ भी ऐसी ही घटना हुई। ट्रैफिक पुलिस की सख्ती को देख 15 साल से अधिक पुरानी हो चुकी अपनी कार को इस्तेमाल करना छोड़ दिया है। उनका कहना है कि हर वक्त वाहन जब्त होने का डर और 10 हजार जुर्माना भरने से बेहतर है कि दूसरे साधनों से सफर करें। अपने वाहन को स्क्रैप करवाने के बाद दूसरा वाहन खरीदने के लिए राशि जमा कर रहे हैं।

सालाना 5 लाख वाहन होते हैं पंजीकृत

दिल्ली में सालाना पांच लाख नए वाहन पंजीकृत होते हैं। 10-15 साल की उम्र पूरी कर चुके वाहनों की संख्या 35 लाख से अधिक है। हालांकि इनमें से काफी वाहनों को कबाड़ में बेच दिया जाता है। पाइनव्यू टेक्नोलॉजी के सीईओ विक्रम बख्शी का कहना है कि दिल्ली में अधिकतर पुराने वाहन गैर पंजीकृत स्क्रैपर को दे दिए जाते हैं। इससे सरकार को भी हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। स्क्रैप का उचित निस्तारण न होने व दिल्ली के इर्द गिर्द मौजूद पुराने वाहनों से प्रदूषण को कम करने की राह में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

प्रदूषण के लिहाज से खतरनाक हैं पुराने वाहन
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) की विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि दिल्ली में पुराने वाहनों के लिए सरकार ने स्क्रैप नीति बनाई है। प्रदूूषण कम करने के लिए जरूरी है कि मानकों के मुताबिक स्क्रैप का उचित निष्पादन किया जाए। पर्यावरण मानकों को ध्यान में रखते हुए पिछले साल से केवल बीएस-6 वाहनों का पंजीकरण किया जा रहा है। अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि बीएस-1 की तुलना में बीएस-6 मानकों को पूरा करने वाले वाहनों से प्रदूषण (पीएम-1, 2.5) 30-35 फीसदी तक कम होता है। पुराने वाहनों की वैद्यता बढ़ाए जाने से प्रदूषण कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। बीएस-6 वाहनों से पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
ढाई वर्ष में तीन हजार से भी कम वाहन किए गए स्क्रैप
पिछले करीब ढाई साल में दिल्ली में महज 2869 वाहनों को ही स्क्रैप किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मियाद खत्म हो चुके वाहनों के कबाड़ को धीरे-धीरे खत्म नहीं किया तो हालात में सुधार नहीं हो सकेगा। जरूरी है कि पुराने वाहनों को जल्द से जल्द हटाकर उनका उचित निस्तारण किया जाए।

स्क्रैपिंग के फायदे:
. दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी में पुराने वाहनों के लिए स्क्रैपिंग इंसेंटिव की व्यवस्था
. नए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट के अलावा सब्सिडी दी जा रही
. स्क्रैप यार्ड से जहां पुराने वाहनों का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से पर्यावरण के मुताबिक हो सकेगा वहीं रोजगार में भी वृद्धि होगी
. स्क्रैप से निकलने वाली धातु और प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग से ऑटो उपकरणों की कीमतें भी कम होंगी
. नए वाहनों की अपेक्षा पुराने वाहनों से होता है 10 से 12 गुना अधिक प्रदूषण

दिल्ली में 1.18 करोड़ वाहन पंजीकृत
. दिल्ली में मार्च 2020 तक 1.18 करोड़ वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 28 फीसदी कार, जीप जबकि 67 फीसदी दो पहिया हैं
. राजधानी में 2020 में वाहनों की संख्या में 4.40 फीसदी की दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2005-06 में यह आंकड़ा 8.13 फीसदी था
. पिछले 15 वर्षों में दिल्ली में प्रति 1000 व्यक्ति पर वाहनों की संख्या में दोगुना से अधिक की वृद्धि हुई है। 317 से बढ़कर यह संख्या 643 हो गई है।
. सालाना औसतन तीन लाख से अधिक वाहनों की मियाद खत्म हो रही है। जिनकी स्क्रैपिंग से प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण को स्वच्छ बनाया जा सकेगा।

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