संकल्प : अतुल्य गंगा परियोजना से होगा राष्ट्रीय नदी का कायाकल्प

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 06 Sep 2021 06:31 AM IST

सार

  • सेना से अवकाश प्राप्त दिग्गजों ने लंबी लड़ाई के लिए कसी कमर 
  • त्रिवेणी कला संगम सभागार में बताई गंगा को अविरल करने की योजना
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विस्तार

गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए सेना से अवकाश प्राप्त दिग्गजों ने बीड़ा उठाया है और इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। अतुल्य गंगा परियोजना के जरिए पांच साल के भीतर गंगा का कायाकल्प करने की दिशा में पहल शुरू की गई है, जिसके शुरुआती नतीजे उत्साहवर्द्धक हैं। मंडी हाउस पर त्रिवेणी कला संगम केे सभागार में रविवार को इस परियोजना के आगामी कार्यक्रमों और अब तक की प्रगति पर गंभीरता से चर्चा हुई।
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भारतीय सशस्त्र बल से सेवानिवृत्ति के बाद देश सेवा का जुनून और गंगा सफाई की चाहत लिए मिलिट्री इंजीनियर गोपाल शर्मा, ले. कर्नल हेम लोहुमी, मेजर जनरल ब्रजेश कुमार, मेजर जनरल विनोद भट्ट और ले. जनरल एस. डी. दुहां ने अतुल्य गंगा अभियान शुरू किया। आम लोग भी इस अभियान से जुड़ गए और जल-जंगल, पहाड़ संरक्षण-संवर्धन की दिशा में कार्यरत बुद्धिजीवी भी साथ चल पड़े हैं। गंगा में अवैध खनन के खिलाफ काम कर रहे डॉ. विजय वर्मा ने अतुल्य गंगा परियोजना के मौजूदा स्वरूप की सराहना की और साथ चलने का संकल्प लिया। लेडी इरविन कॉलेज की प्रोफेसर रहीं प्रो. अंजनी कपिला ने बताया कि वह मानती हैं कि ज्ञान किताबों से ही नहीं, पहाड़ों, नदियों, झरनों और जंगलों से भी मिलता है। सालों तक उन्होंने कुमाऊं में चिराग संस्था के साथ काम किया।  


गंगा आह्वान से जुड़ीं मलिका भनोट ने बताया कि बाढ़ की विभीषिका का एक बड़ा कारण गंगा में अवरोध है। उत्तराखंड में बिना अध्ययन के विकास के नाम पर चल रहा पहाड़ों का कटान बाढ़ के बड़े कारण बन रहे हैं। हरियाणा में जल संरक्षण के लिए काम कर रहे संजय गुप्ता ने पानी की समस्या खत्म करने और भविष्य में इस क्षेत्र में काम कर युवाओं को कैसे रोजगार मिलेगा इस विषय पर बात की। चर्चा में पर्यावरणविद् शोपान जोशी, आईटी और पर्यावरण संवर्धन के लिए साथ काम कर रहे विजय शुक्ल, गंगा सागर में सिल्ट निकालने केे प्रोजेक्ट पर 15 सालों से काम कर रहे के. एल. मुखर्जी ने अतुल्य गंगा परियोजना के साथ चलने का संकल्प लिया। 

बेहतर काम करने वालों को किया सम्मानित
अतुल्य गंगा परियोजना के संयोजकों में से एक गोपाल शर्मा ने अभियान में सहयोग करने वालों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। वाराणसी में गंगा सफाई अभियान से जुड़े राजेश शुक्ला, गंगा में तैराकी सिखाने वाले बादल कुमार, बिहार में गंगा सफाई-संरक्षण से जुड़े व वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखरन और परियोजना में मेंटर की भूमिका निभा रहे अभय मिश्र को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। 
  • अतुल्य गंगा परियोजना के चार स्तंभ
  • गंगा परिक्रमा - 5530 किमी लंबी गंगा परिक्रमा हाल ही में पूरी हुई है। 
  • प्रदूषण जांच - परिक्रमा के दौरान जगह-जगह पर जियो टैंगिग से गंगा का प्रदूषण स्तर मापा गया है।
  • वृक्षमाल अभियान - गंगा के किनारे 30,000 पीपल, बरगद और नीम के पेड़ लगाने का काम शुरू हुआ।
  • युवाओं को जोड़ना - स्कूल, कॉलेज, एनसीसी, ग्राम पंचायतों से युवाओं को जोड़ा जा रहा।

अगले पांच साल के प्रमुख कार्य
  • गंगा साइक्लोथॉन - अगले साल गंगोत्री से गंगा सागर तक साइकिल यात्रा निकालना। 
  • गंगा का स्वास्थ्य - गंगा जल की गुणवत्ता पर काम के साथ रिपोर्ट तैयार करना।
  • गंगा किनारे आबादी को अभियान से जोड़ना, खासकर निषाद जाति को।
  • गंगा में गिरने वाले 329 बड़े नालों की जियो टैगिंग कराना और रिपोर्ट तैयार करना।
  • गंगा नदी क्षेत्र के 100 मीटर के दायरे में सघन पौधरोपण और उनका संरक्षण करना।

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