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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फिर डांटा : कहा- भूखों को भोजन उपलब्ध कराना आपकी जिम्मेदारी
Sat, 26 Jun 2021 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 26 Jun 2021 05:37 AM IST
सार
- हाईकोर्ट ने सरकार की नीति को बताया मनमाना
- हाईकोर्ट ने कहा ये कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर सरकार वाद-विवाद करती रहे और कहे कि फाइल पर विचार किया जा रहा है
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
भोजन उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है और वह भूखों को भोजन मुहैया कराने से इनकार नहीं कर सकती। ये बात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कही। राजधानी में सूखा राशन प्रदान करने के लिए गैर राशन कार्डधारी लाभार्थियों की संख्या 20 लाख सीमित करने की नीति को मनमाना करार दिया।
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हाईकोर्ट ने कहा ये कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर सरकार वाद-विवाद करती रहे और कहे कि फाइल पर विचार किया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत ये आपकी जिम्मेदारी है। दिल्ली सरकार ने मनमाने तरीके से लाभार्थियों की संख्या को घटाया है।
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न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की अवकाशकालीन खंडपीठ ने पूछा कि किस आधार पर पहले लाभार्थियों की संख्या 69.6 लाख तय की गई थी। इसके बाद इसे कैसे मनमाने तरीके से 20 लाख कर दिया गया। अगर आप सरकार हैं तो ये आपकी जिम्मेदारी है। अगर कोई भूखा आपके वितरण केंद्र पर आता है तो क्या वह नीति बदलने का इंतजार करेगा। एक संख्या आखिर तय ही क्यों की गई। जो भी भूखा है उसे खाना मिलना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने पूछा कि अगर कोई आपके वितरण केंद्र पर आकर कहता है कि उसे भोजन की जरूरत है तो क्या आप उसे भोजन देने से इनकार करेंगे? खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि कोरोना महामारी काल में एक बार राहत देना काफी नहीं है वह भी तब जब तीसरी लहर आने की प्रबल संभावना है।
दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि 23 जून तक 20 लाख लोगों में से 15.5 लाख गाइडलाइन के तहत राशन प्राप्त कर चुके हैं। खंडपीठ को बताया गया कि दिल्ली कैबिनेट इस मुद्दे पर विचार कर रही है। खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा कि वह इस मुद्दे पर निर्देश लेकर आएं।
खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को नए सिरे से हलफनामा पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए नौ जुलाई की तारीख तय की है। ये निर्देश हाईकोर्ट ने एनजीओ रोजी रोटी अधिकार अभियान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
एनजीओ ने दिल्ली सरकार की 27 मई की उस अधिसूचना को चुनौती दी है जिसमें सूखा राशन प्राप्त करने वाले गैर राशन कार्डधारी लाभार्थियों की संख्या को सीमित कर 20 लाख कर दिया गया था।