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Delhi News: समर्पण उत्सव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की भव्य प्रस्तुति
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नई दिल्ली। कमानी ऑडिटोरियम में सोमवार शाम समर्पण उत्सव का आयोजन किया गया। समर्पण कला केंद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 120 से अधिक कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत मां दुर्गा को समर्पित स्तुति ‘देवी भजो’ से हुई। इसे गुरु रानी खानम ने कोरियोग्राफ किया था। इस प्रस्तुति ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। वरिष्ठ विद्यार्थियों की ‘सरगम’ (तीन ताल) प्रस्तुति ने कथक की तकनीकी खूबसूरती तिहाई, तुकड़े, लड़ी और गत निकास को बेहतरीन तरीके से पेश किया। इसके बाद तुलसीदास रचित ‘श्री रामचंद्र कृपालु भज मन’ ने दर्शकों को भक्ति रस में डुबो दिया। फिर तीन ताल के शुद्ध नृत्य ने तकनीक और अध्यात्म का सुंदर मेल दिखाया। ऊर्जावान ‘शिव तांडव’ ने पखावज की दमदार ताल के साथ पूरे सभागार में दिव्यता का माहौल बना दिया।
भरतनाट्यम शैली में छोटे बच्चों की ‘अच्युतम केशवम्’ प्रस्तुति दर्शकों को भावुक कर दिया। नन्हे कलाकारों की ‘तीन ताल तराना’ ने अपनी ऊर्जा से सभागार में जोश भर दिया। ‘चतुरंग’, ‘कृष्ण वंदना’, ‘नृत्यत शंकर’, और ‘निरतत धंग’ जैसी प्रस्तुतियों ने कथक की ताल, लय, भाव और परंपरा की गहराई को खूबसूरती से दिखाया। कार्यक्रम का समापन पंडित बिरजू महाराज की रचना ‘थुंगा थुंगा’ से हुआ, जिसने ताल और लय के आनंद से पूरे सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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कार्यक्रम की शुरुआत मां दुर्गा को समर्पित स्तुति ‘देवी भजो’ से हुई। इसे गुरु रानी खानम ने कोरियोग्राफ किया था। इस प्रस्तुति ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। वरिष्ठ विद्यार्थियों की ‘सरगम’ (तीन ताल) प्रस्तुति ने कथक की तकनीकी खूबसूरती तिहाई, तुकड़े, लड़ी और गत निकास को बेहतरीन तरीके से पेश किया। इसके बाद तुलसीदास रचित ‘श्री रामचंद्र कृपालु भज मन’ ने दर्शकों को भक्ति रस में डुबो दिया। फिर तीन ताल के शुद्ध नृत्य ने तकनीक और अध्यात्म का सुंदर मेल दिखाया। ऊर्जावान ‘शिव तांडव’ ने पखावज की दमदार ताल के साथ पूरे सभागार में दिव्यता का माहौल बना दिया।
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भरतनाट्यम शैली में छोटे बच्चों की ‘अच्युतम केशवम्’ प्रस्तुति दर्शकों को भावुक कर दिया। नन्हे कलाकारों की ‘तीन ताल तराना’ ने अपनी ऊर्जा से सभागार में जोश भर दिया। ‘चतुरंग’, ‘कृष्ण वंदना’, ‘नृत्यत शंकर’, और ‘निरतत धंग’ जैसी प्रस्तुतियों ने कथक की ताल, लय, भाव और परंपरा की गहराई को खूबसूरती से दिखाया। कार्यक्रम का समापन पंडित बिरजू महाराज की रचना ‘थुंगा थुंगा’ से हुआ, जिसने ताल और लय के आनंद से पूरे सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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