दिल्ली: फिल्मों के रिस्टोरेशन के लिए सरकार ने 363 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को दी मंजूरी, 5900 से अधिक शार्ट फिल्म, फीचर, डाक्यूमेंट्री को किया जाएगा रिस्टोर
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां भी सीखीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बचाने, आगे बढ़ाने, संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं और फिल्में हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं।
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केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि 5900 से अधिक शॉर्ट फिल्म, फीचर, डाक्यूमेंट्री को रिस्टोर किया जा रहा है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री है। भारत सरकार ने जिम्मेदारी के साथ यह फैसला लिया है कि पिछले सौ सालों में जो भी काम हुआ है, उसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से रिस्टोर करके आर्काइव किया जाए। इसका मकसद उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना है। इसी के तहत मंत्रालय ने बुधवार को फिल्मों के रिस्टोरेशन के लिए 363 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी है।
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां भी सीखीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बचाने, आगे बढ़ाने, संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं और फिल्में हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। सरकार ने फिल्मों के संरक्षण के लिए 2016 में नेशनल फिल्म हेरिटेज मिशन को लांच किया था। इस पर करीब 597 करोड़ रुपये खर्च होना है।
उन्होंने कहा कि फिल्में हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा हैं और पिछले 100 वर्षों में फिल्म उद्योग द्वारा किए गए मौलिक योगदान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग बना दिया है। उन्होंने बताया कि 5900 से भी अधिक लघु फिल्मों, वृत्तचित्रों और फीचर फिल्मों को अभिनव रूप देने की प्रक्रिया चल रही है और एनएफएआई द्वारा शुरू की गई यह कवायद दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म पुनर्स्थापन, संरक्षण, परिरक्षण और डिजिटलीकरण प्रक्रियाओं में से एक साबित होगी।
सभी भारतीय भाषाओं की फिल्मों को मिलेगी जगह
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यहां एक विशेष भाषा की बात नहीं हो रही है, बल्कि हिंदुस्तान की सभी भाषाओं में बनी शार्ट फिल्म, फीचर और डाक्यूमेंटरी को रिस्टोर किया जाएगा। सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि जो भी अच्छा काम है और कमेटी जिसका चयन करती है, उसको रिस्टोर किया जाए। संरक्षण (प्रिजर्वेशन ) इसलिए जरूरी है कि पिछले सौ सालों में जो भी काम हुआ है, उसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचा जा सके।
फिल्म व टीवी प्रोडक्शन में स्टार्टअप लाएं
उन्होंने एफटीआईआई के कामकाज की समीक्षा भी की। इसमें एफटीआईआई को उत्कृष्टता के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त फिल्म संस्थानों के साथ सहयोग करने से विद्यार्थियों की कहानी प्रस्तुत करने की क्षमता बेहतरीन करने पर बात की। उन्होंने छात्रों से फिल्म और टीवी प्रोडक्शन में स्टार्टअप शुरू करने का आग्रह भी किया। इसके अलावा एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स के क्षेत्र में एफटीआईआई को बढ़ावा देने और कौशल विकास की ट्रेनिंग पर भी बात हुई।