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Delhi: मास्टर पॉलिसी के बिना करोड़ों के फ्लैट असुरक्षित, सुरक्षा का सामूहिक कवच भी गायब, करे कोई, भरे कोई
Tue, 05 May 2026 05:10 AM IST
Digvijay Singh
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 05 May 2026 05:10 AM IST
सार
दिल्ली-एनसीआर की ऊंची इमारतों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए एक कड़वा सच ये है कि उनका सपनों का आशियाना एक अदृश्य वित्तीय खतरे के साये में खड़ा है। हाईराइज सोसाइटियों में रहने का ढांचा तो सामूहिक है, सुरक्षा और आर्थिक भरपाई का तंत्र मौजूदा समय पूरी तरह व्यक्तिगत स्तर पर सिमटा है।
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विवेक विहार में चार मंजिला इमारत
- फोटो : जी पॉल
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर की ऊंची इमारतों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए एक कड़वा सच ये है कि उनका सपनों का आशियाना एक अदृश्य वित्तीय खतरे के साये में खड़ा है। हाईराइज सोसाइटियों में रहने का ढांचा तो सामूहिक है, सुरक्षा और आर्थिक भरपाई का तंत्र मौजूदा समय पूरी तरह व्यक्तिगत स्तर पर सिमटा है।
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विशेषज्ञ बता रहे कि भारत में मास्टर स्ट्रक्चरल इंश्योरेंस की अनिवार्यता न होने और इसे ठीक तरीके से लागू न होना एक ऐसा कानूनी और वित्तीय गैप है, जो किसी भी बड़े हादसे के बाद सैकड़ों परिवारों की जीवनभर की कमाई को मलबे में बदल सकता है।
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सभी का किचन जुड़ा है
हाईराइज की हकीकत ये है कि यहां निजी लापरवाही जैसी कोई चीज नहीं होती। आग चाहे ग्राउंड फ्लोर के मीटर रूम में लगे या 25वीं मंजिल के किचन में इमारत का पूरा स्ट्रक्चर एक ही धमनियों से जुड़ा है। अगर बीच की मंजिल का कंक्रीट चटकता है, तो ऊपर भी नुकसान होता है।
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हाईराइज सोसाइटी में करे कोई, भरे कोई
हाईराइज सोसाइटी में हर फ्लैट एक दूसरे से कंक्रीट और स्टील से जुड़ा होता है। अगर पहली या इससे ऊपर की मंजिल के किसी एक फ्लैट में शॉर्ट सर्किट से आग लगती है, तो उसका प्रभाव केवल उस घर तक सीमित नहीं रहता। धुएं से ऊपर की मंजिलें काली होती हैं, तो दमकल की बौछारों से नीचे की मंजिलों में भारी सीपेज होता है। सबसे भयावह स्थिति तब होती है जब आग से बिल्डिंग का मुख्य ढांचा कमजोर हो जाए। ऐसी स्थिति में, यदि पूरी बिल्डिंग को असुरक्षित घोषित कर दिया जाता है, तो सजा उन परिवारों को भी भुगतनी पड़ती है जिनकी कोई गलती नहीं थी। सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, यानी अगर आपकी कार से किसी और का नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी उसकी भरपाई करती है। लेकिन करोड़ों की कीमत वाले फ्लैट्स के मामले में ऐसा कोई अनिवार्य कानून नहीं है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों ने कहा कि यदि पड़ोसी की लापरवाही से घर जल जाता है या बिल्डिंग का स्ट्रक्चर असुरक्षित हो जाता है, तो वर्तमान व्यवस्था में सीधे तौर पर पड़ोसी से मुआवजा मिलने की कानूनी प्रक्रिया बहुत जटिल और लंबी है।
नीचे के फ्लैट से लगी आग ऊपर फैलती है और ऊपर वाले फ्लैट मालिक के पास अपना बीमा है, तो उसकी कंपनी उसे क्लेम देगी। दूसरा, उसके पास थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है जहां से आग शुरू हुई, तो उसकी बीमा कंपनी अन्य प्रभावित फ्लैटों को भुगतान करेगी। यदि बीमा नहीं है और आग किसी की लापरवाही से लगी है, तो पीड़ित पक्ष लॉ ऑफ टॉर्ट के तहत दोषी पर केस करेगा।-अंकित मान, एडवोकेट
इंदिरापुरम का हाल विवेक विहार में हुआ है। दिल्ली-एनसीआर में आबादी के बढ़ने के मुकाबले फायर विभाग के पास उपकरण, स्काई लिफ्टर, सीढ़ी, जाल व जनशक्ति की कमी है। इमारतों में फायर एनओसी 5 साल के लिए वैध है, इसमें बदलाव की आवश्यकता है। 6 महीने में उपकरण की जांच हो।
-जगदीश ममगई, एमसीडी के वर्कर्स कमेटी के पूर्व चेयरमैन