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केंद्र सरकार के साथ किसानों की वार्ता आज, नतीजे से तय होगा आंदोलन का रुख
Fri, 08 Jan 2021 02:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 08 Jan 2021 02:33 AM IST
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वार्ता से पहले ट्रैक्टर मार्च...
- फोटो : amar ujala
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पिछले 43 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के विरोध और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग पर अड़े किसानों की आज सरकार से वार्ता होगी। इससे पहले हुई वार्ताओं से किसान संतुष्ट नहीं है। दोनों पक्षों की कोशिश यही होगी कि वार्ता के परिणाम सकारात्मक निकले ताकि गतिरोध को दूर किया जा सके।
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वार्ता के नतीजे से ही आंदोलन का रुख तय होगा। दोनों पक्षों के बीच अगर वार्ता बेनतीजा रही तो किसान तयशुदा तारीखों पर आंदोलन को और तेज करेंगे। किसानों ने पहले ही इसकी घोषणा कर दी है।
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सिंघु बॉर्डर पर संबोधन के दौरान किसानों नेताओं ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। जब तक कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता और सरकार की ओर से एमएसपी की गारंटी के लिए कानून नहीं बनाया जाता है, किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन लंबा खिंचने से न केवल किसानों के साथ साथ एक से दूसरे शहरों के लिए आवागमन मुश्किल हो गया है बल्कि रोजाना करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है।
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सरकार से वार्ता के चंद घंटे पहले दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने गुरुवार को ट्रैक्टर मार्च निकाला। सिंघु, टीकरी और गाजीपुर सीमा से किसानों ने भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद मार्च निकाला।
भारती किसान यूनियन (एकता, उग्राहा) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहा ने कहा कि इस मार्च में 3,500 से अधिक ट्रैक्टर और ट्रॉलियों पर किसानों ने रोष जताया। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने से कम पर किसान मानने के लिए राजी नहीं है।
गाजीपुर सीमा से भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में ट्रैक्टर मार्च पलवल की ओर रवाना हुआ। टिकैत ने कहा कि आने वाले दिनों में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन तेज करेंगे।
मार्च में हरियाणा के 2,500 से अधिक ट्रैक्टर शामिल हुए। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कोहार ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानीं तो किसानों का विरोध और तेज होगा। ट्रैक्टर मार्च सिंघु से टीकरी बॉर्डर, टीकरी से कुंडली, गाजीपुर से पहले और पलवल से आगे रेवासन मार्ग किया गया।
शुक्रवार को केंद्र सरकार के साथ किसानों की आठवें दौर की वार्ता होगी। इससे पहले की बैठक बेनतीजा रही, क्योंकि किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाने की दिशा में पहल की है।