पीएम की अपील के बाद किसान संगठनों ने वार्ता के लिए तारीख तय करने को कहा
कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा किसान आंदोलन अपने 75वें दिन में प्रवेश कर चुका है। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाले किसान संगठनों ने सरकार से अगले दौर की वार्ता के लिए तारीख तय करने के लिए कहा है। सोमवार को संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलन समाप्त करने की अपील की थी और बातचीत के लिए निमंत्रण देने की बात कही थी।यहां पढ़ें हर अपडेट....
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सचिन तेंदुलकर और लता मंगेशकर जैसी हस्तियों को गुमराह किया जा रहा है: चौधरी
लोकसभा में कांग्रेस सांसद एआर चौधरी ने कहा कि सचिन तेंदुलकर और लता मंगेशकर जैसी हस्तियों को गुमराह किया जा रहा है। क्या हमारा देश इतना कमजोर है कि विरोध करने वाले किसानों के पक्ष में बोलने के लिए 18 साल की लड़की (ग्रेटा थनबर्ग) को दुश्मन माना जा रहा है?
Celebrities like Sachin Tendulkar and Lata Mangeshkar being misled. Is our country so weak that a 18-year-old-girl (Greta Thunberg) is being considered an enemy for speaking in favour of the protesting farmers? : Congress MP AR Chowdhury in Lok Sabha pic.twitter.com/GJtwr8iJqG
— ANI (@ANI) February 8, 2021विज्ञापन
किसान संगठनों ने सरकार से अगले दौर की वार्ता के लिए तारीख तय करने के लिए कहा
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाले किसान संगठनों ने सरकार से अगले दौर की वार्ता के लिए तारीख तय करने के लिए कहा है। किसानों का कहना है कि हमने सरकार से कभी वार्ता करने के लिए इनकार नहीं किया है। आपको बता दें कि सोमवार को संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलन समाप्त करने की अपील की थी और बातचीत के लिए निमंत्रण देने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम आंदोलन से जुड़े लोगों से लगातार प्रार्थना करते हैं कि आंदोलन करना आपका हक है, लेकिन बुजुर्ग भी वहां बैठे हैं उनको ले जाइए, आंदोलन खत्म कीजिए। आगे मिल बैठकर चर्चा करेंगे, सारे रास्ते खुले हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह सब हमने कहा है और आज भी मैं इस सदन के माध्यम से निमंत्रण देता हूं।
Farmer unions agitating against 3 agri laws ask government to fix date for next round of talks, soon after Prime Minister Narendra Modi urged them to end their stir and invited them to resume dialogue
— Press Trust of India (@PTI_News) February 8, 2021
देश भरोसे पर नहीं संविधान और कानून से चलता है: टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज कहा कि MSP थी, MSP है और MSP रहेगी..लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानून बनेगा। देश भरोसे पर नहीं चलता। देश संविधान और कानून से चलता है।
प्रधानमंत्री ने आज कहा कि MSP थी, MSP है और MSP रहेगी..लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानून बनेगा। देश भरोसे पर नहीं चलता..देश संविधान और कानून से चलता है: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत pic.twitter.com/4BVDTOVBKg
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 8, 2021
आंदोलन को मिल रहा संत समाज का समर्थन
कांग्रेस नेता व धर्मगुरु आचार्य प्रमोद कृष्णन काशी के सुमेर पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती महाराज के साथ किसानों को समर्थन देने गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि सरकार को तीनों काले कानून वापस लेने चाहिए।
गाजीपुर बॉर्डर पर जेएनयू के छात्र कर रहे नुक्कड़ नाटक
गाजीपुर बॉर्डर पर मंच के पास जेएनयू के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर किसानों से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाई।
सांसद विधायक छोड़ें अपनी पेंशन, किसान मोर्चा करेगा धन्यवादः राकेश टिकैत
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, हमने कब कहा कि एमएसपी खत्म होने वाली है? हमने तो ये कहा कि एमएसपी पर कानून बने यह किसानों के लिए फायदेमंद होगा। देश में भूख से व्यापार करने वालों को बाहर निकाला जाएगा। देश में अनाज की कीमत भूख से तय नहीं होगी। प्रधानमंत्री को अपील करनी चाहिए कि विधायक और सांसद अपनी पेंशन छोड़ें उसके लिए यह मोर्चा धन्यवाद करेगा।
When did we say that MSP is ending? We said that a law be formed on MSP. If such a law is formed, all the farmers of the country will be benefitted. Right now, there is no law on MSP and the farmers are looted by traders: Rakesh Tikait, Bharatiya Kisan Union pic.twitter.com/xZDhUzH3nV
— ANI (@ANI) February 8, 2021
गाजीपुर सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त
गाजीपुर सीमा पर भी सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त है। जिस स्थान पर किसानों ने मिट्टी डालकर फूल लगाए थे। उसे अभी भी पुलिस प्रशासन ने अपने कब्जे में ले रखा है।
राकेश टिकैत कल हरियाणा के कुरुक्षेत्र में
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत कल हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जनसभा को संबोधित करेंगे। रविवार को चरखी दादरी जिले में विशाल किसान जनसभा का आयोजन हुआ था।
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा इंतजामों में नहीं दी कोई छूट
चक्का जाम के 48 घंटे बाद भी दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा में किसी प्रकार की ढील नहीं दी है। बैरिकेड के आगे किसी को भी जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। हरियाणा की सीमा में प्रवेश के लिए लोग 4 किलोमीटर से भी अधिक पैदल चलने के बाद पहुंच रहे हैं।
सिंघु बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा बहाल
26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद सिंघु समेत टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। हालांकि अब सिंघु बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा शुरू हो चुकी है।
गाजीपुर बॉर्डर पर जारी है आंदोलन
गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 73वें दिन भी जारी है। लगातार यहां किसानों की संख्या बढ़ रही है।
गाज़ीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 73वें दिन भी जारी है। #FarmersProtest pic.twitter.com/sBnY9ZgGpa
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 8, 2021
28 लाख की बीएमडब्ल्यू मोटरसाइकिल लेकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचा किसान
कृषि कानूनों के विरोध में करीब ढाई महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। आंदोलन का केंद्र अब गाजीपुर बॉर्डर बन गया है। किसानों की रणनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी यहीं से की जा रही है। बॉर्डर पर किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। रविवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के किसान विशाल 28 लाख की बीएमडब्ल्यू मोटरसाइकिल लेकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। यहां उन्होंने आंदोलनरत किसानों को अपना समर्थन दिया।
ग्रामीणों को घर पहुंचने के लिए खर्च करने पड़ रहे हैं 100 रुपये
ग्रामीण को घर पहुंचने के लिए खर्च करने पड़ रहे हैं 100 रुपये। जी हां, ये सही है। गांव के रास्ते बंद होने की वजह से सिंघु, जाटी, कुंडली से होकर दोबारा हाईवे पर सोनीपत में प्रवेश करने के लिए दो बार ऑटो बदलना पड़ रहा है। इसपर लोगों को औसतन 100 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। बॉर्डर पर लंबे समय से चल रहे आंदोलन और सुरक्षा के लिहाज से हाइवे और आसपास के गांवों के रास्तों पर बैरिकेडिंग्स का असर ग्रामीणों पर पड़ने लगा है। न कहीं आने जाने की सुविधा है तो दूसरी तरफ इंटरनेट की सेवाएं शुरू भी हुई तो रफ्तार काफी धीमी होने की वजह से पढ़ाई से लेकर खरीद बिक्री, हर काम में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिफ्ट में किसान कर रहे आलू और गन्ने की खेती
पिछले 74 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनकारी किसान अभी भी डटे हुए हैं। मगर गन्ने को मिलों तक पहुंचाने और आलू की कटाई में किसानों की व्यवस्तता का असर आंदोलन पर भी दिखना शुरू हो गया है। हालांकि किसानों का दावा है कि शिफ्ट में किसानों को आना जाना जारी है, इसलिए आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा। इस सिलसिले में किसान संगठनों की बैठक में मंथन भी किया जा रहा है ताकि आंदोलन को फिर नई रफ्तार दे सकें।