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खराब मौसम के पूर्वानुमान के बीच डटे हैं किसान, ट्रैक्टर मार्च और वार्ता, दोनों के लिए तैयार
Wed, 06 Jan 2021 10:06 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 06 Jan 2021 10:06 PM IST
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आंदोलन के लिए डटे हुए हैं किसान
- फोटो : एएनआई
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भीषण ठंड, खराब मौसम के पूर्वानुमान और बारिश के बावजूद पिछले 42 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने सात जनवरी के ट्रैक्टर मार्च के लिए तैयारियां पूरी कर ली है।
केंद्र सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध के बीच आठ जनवरी को दोनों पक्षों में एक बार फिर तीनों कृषि कानूनों सहित एमएसपी की गारंटी पर बातचीत होगी। इससे पहले की वार्ताओं के बाद किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं, बावजूद इसके आठ जनवरी को वार्ता में शामिल होंगे।
भीषण ठंड और बिजली की गड़गड़ाहट के बावजूद किसान सीमाओं पर डटे रहने के लिए तैयारी में जुटे रहे। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से दिल्ली गंभीर शीतलहर की चपेट में हैं। ट्रैक्टर मार्च में सभी सीमाओं से मार्च के जरिये भी किसान विरोध दर्ज करेंगे।
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पंजाब, हरियाणा सहित देश के अन्य प्रदेशों से 26 नवंबर से किसान डेरा डाले हुए हैं। पिछले हफ्ते सरकार ने किसानों को पराली के लिए जुर्माने के दायरे से बाहर करने सहित बिजली संशोधन बिल के मसौदे पर भी किसानों की मांग पर सहमति जताई है।
रूट डायवर्ट, ट्रैफिक पुलिस ने जारी किया अलर्ट
किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। इसे देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अलर्ट पोस्ट कर वाहन मालिकों को ट्रैफिक डायवर्जन और रास्तों के बारे में जानकारियां दी जा रही हैं। बुधवार को ट्वीट में सिंघु, औचंदी, पियु मणियारी, मंगेश बॉर्डर के रास्ते यातायात के लिए बंद होने की जानकारी दी गई।
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केंद्र सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध के बीच आठ जनवरी को दोनों पक्षों में एक बार फिर तीनों कृषि कानूनों सहित एमएसपी की गारंटी पर बातचीत होगी। इससे पहले की वार्ताओं के बाद किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं, बावजूद इसके आठ जनवरी को वार्ता में शामिल होंगे।
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भीषण ठंड और बिजली की गड़गड़ाहट के बावजूद किसान सीमाओं पर डटे रहने के लिए तैयारी में जुटे रहे। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से दिल्ली गंभीर शीतलहर की चपेट में हैं। ट्रैक्टर मार्च में सभी सीमाओं से मार्च के जरिये भी किसान विरोध दर्ज करेंगे।
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पंजाब, हरियाणा सहित देश के अन्य प्रदेशों से 26 नवंबर से किसान डेरा डाले हुए हैं। पिछले हफ्ते सरकार ने किसानों को पराली के लिए जुर्माने के दायरे से बाहर करने सहित बिजली संशोधन बिल के मसौदे पर भी किसानों की मांग पर सहमति जताई है।
रूट डायवर्ट, ट्रैफिक पुलिस ने जारी किया अलर्ट
किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। इसे देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अलर्ट पोस्ट कर वाहन मालिकों को ट्रैफिक डायवर्जन और रास्तों के बारे में जानकारियां दी जा रही हैं। बुधवार को ट्वीट में सिंघु, औचंदी, पियु मणियारी, मंगेश बॉर्डर के रास्ते यातायात के लिए बंद होने की जानकारी दी गई।
इससे वाहन चालकों की सुविधा के लिए ट्रैफिक को लामपुर, सारफयाबाद, पल्ला और सिंघु स्कूल से होकर वैकल्पिक मार्ग पर डायवर्ट किया गया। मुकरबा चौक और जी.टी करनाल रोड से ट्रैफिक डायवर्ट करने सहित ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को बाहरी रिंग रोड, जीटी करनाल रोड और एनएच-44 से बचने की सलाह दी। अन्य मार्गों के लिए भी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से अलर्ट जारी किए जा रहे हैं।
पूर्व सैनिकों ने किसान आंदोलन को दिया समर्थन
टीकरी बॉर्डर पर लगातार 42 वें दिन भी किसानों का आंदोलन जारी रहा। रोजाना यहां पर हरियाणा, दिल्ली के अलावा देश के अन्य राज्यों से भारी संख्या में लोग आकर किसानों को समर्थन दे रहे हैं। इसी तरह बुधवार को भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों ने भी यहां पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया।
ऑल इंडिया वेटरन एसोसिएशन के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबेदार मेजर जेपी मिश्रा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से टीकरी बॉर्डर पहुंचे थे। इसी तरह हवलदार हरवेंदर सिंह राणा, हवलदार अनुराग लठवाल, सुबेदार गुरुचरण सिंह और नायक कपिल फौजी भी देश के विभिन्न हिस्सों से टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे थे।
सुबेदार मेजर जेपी मिश्रा ने कहा कि किसानों की समस्याएं सरकार को समझनी चाहिए। सरकार के तानाशाही रवैए से देश के किसान और बॉर्डर पर सैनिक दोनों खफा हैं। सरकारी कागजों से बंधे होने के कारण सैनिक खुलकर तो सरकार के खिलाफ नहीं बोलेंगे, लेकिन अंदरूनी सच्चाई यह है कि सैनिक इस बात से सहमत हैं कि किसानों की मांगें जायज हैं। क्योंकि सेना के अधिकतर सैनिकों के मां बाप किसान हैं।
पूर्व सैनिकों ने किसान आंदोलन को दिया समर्थन
टीकरी बॉर्डर पर लगातार 42 वें दिन भी किसानों का आंदोलन जारी रहा। रोजाना यहां पर हरियाणा, दिल्ली के अलावा देश के अन्य राज्यों से भारी संख्या में लोग आकर किसानों को समर्थन दे रहे हैं। इसी तरह बुधवार को भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों ने भी यहां पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया।
ऑल इंडिया वेटरन एसोसिएशन के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबेदार मेजर जेपी मिश्रा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से टीकरी बॉर्डर पहुंचे थे। इसी तरह हवलदार हरवेंदर सिंह राणा, हवलदार अनुराग लठवाल, सुबेदार गुरुचरण सिंह और नायक कपिल फौजी भी देश के विभिन्न हिस्सों से टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे थे।
सुबेदार मेजर जेपी मिश्रा ने कहा कि किसानों की समस्याएं सरकार को समझनी चाहिए। सरकार के तानाशाही रवैए से देश के किसान और बॉर्डर पर सैनिक दोनों खफा हैं। सरकारी कागजों से बंधे होने के कारण सैनिक खुलकर तो सरकार के खिलाफ नहीं बोलेंगे, लेकिन अंदरूनी सच्चाई यह है कि सैनिक इस बात से सहमत हैं कि किसानों की मांगें जायज हैं। क्योंकि सेना के अधिकतर सैनिकों के मां बाप किसान हैं।
टीकरी बॉर्डर पर सुबह से किसानों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी था। गनीमत यह रही कि बुधवार को दिन में यहां पर बारिश नहीं हुई। लेकिन पहले हुई बारिश और तेज सर्दी के कारण किसानों का जीवन प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद किसान पीछे हटने को राजी नहीं हैं।
किसानों को आठ जनवरी की वार्ता से भी खास उम्मीद नहीं है। वह अब 26 जनवरी को दिल्ली में प्रवेश करने की योजना पर लगातार रणनीति बना रहे हैं। सरकार को अपनी ताकत का एहसास करा, तीनों कृषि कानूनों को हर हाल में वापस कराना ही अब उनका लक्ष्य है।
किसानों को आठ जनवरी की वार्ता से भी खास उम्मीद नहीं है। वह अब 26 जनवरी को दिल्ली में प्रवेश करने की योजना पर लगातार रणनीति बना रहे हैं। सरकार को अपनी ताकत का एहसास करा, तीनों कृषि कानूनों को हर हाल में वापस कराना ही अब उनका लक्ष्य है।