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दिल्ली: यूएस कस्टम और एफबीआई अधिकारी बता ठगते थे अमेरिकी नागरिक, दो मास्टरमाइंड समेत 65 गिरफ्तार
Sat, 31 Jul 2021 08:11 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 31 Jul 2021 08:11 AM IST
सार
पूछताछ करने पर आरोपियों ने बताया कि वह यूएस कस्टम, बॉर्डर प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट, एफबीआई सहित अन्य अमेरिकी विभाग का अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से बात करते हैं। आरोपी उन्हें झांसा देकर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे।
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फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम जिले की साइबर सेल ने हरिनगर इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने कॉल सेंटर से 65 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को यूएस कस्टम और एफबीआई का अधिकारी बताकर ठगी को अंजाम देते थे।
पुलिस ने सेंटर से 58 कम्प्यूटर, दो लैपटॉप, एक इंटरनेट राउटर, 11 मोबाइल फोन, चैटिंग स्क्रिप्ट, इंटरनेट कॉलिंग डायलर और अमेरिकन नागरिकों का डाटा बरामद किया है।
जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने बताया कि साइबर सेल ने एक सूचना पर 28 जुलाई को हरिनगर के फतेह नगर में एक कॉल सेंटर पर छापा मारा। उस समय वहां काम करने वाले इंटरनेशनल नंबर पर बात कर रहे थे। जिसमें से सात खुद को यूएस कस्टम, बॉर्डर प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट, एफबीआई सहित अन्य अमेरिकी विभाग का अधिकारी बताकर बात कर रहे थे।
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फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद पुलिस ने कॉल सेंटर के दो मालिक मोती नगर निवासी लखन जगवानी और सुदर्शन पार्क निवासी विजेंद्र सिंह रावत और 63 टेलीकॉलर को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने सेंटर से 58 कम्प्यूटर, दो लैपटॉप, एक इंटरनेट राउटर, 11 मोबाइल फोन, चैटिंग स्क्रिप्ट, इंटरनेट कॉलिंग डायलर और अमेरिकन नागरिकों का डाटा बरामद किया है।
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जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने बताया कि साइबर सेल ने एक सूचना पर 28 जुलाई को हरिनगर के फतेह नगर में एक कॉल सेंटर पर छापा मारा। उस समय वहां काम करने वाले इंटरनेशनल नंबर पर बात कर रहे थे। जिसमें से सात खुद को यूएस कस्टम, बॉर्डर प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट, एफबीआई सहित अन्य अमेरिकी विभाग का अधिकारी बताकर बात कर रहे थे।
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फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद पुलिस ने कॉल सेंटर के दो मालिक मोती नगर निवासी लखन जगवानी और सुदर्शन पार्क निवासी विजेंद्र सिंह रावत और 63 टेलीकॉलर को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कुछ ने बताया कि वह यूएस के वास्तविक चिकित्सा सेवा आपूर्तिकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने ठगी करने की बात स्वीकार कर ली। आरोपियों ने बताया कि वह यूएस कस्टम, बॉर्डर प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट, एफबीआई सहित अन्य अमेरिकी विभाग का अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से बात करते हैं।
वह उन्हें बताते हैं कि उनके नाम का दवाओं का एक पार्सल जब्त किया गया है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें उनकी गिरफ्तारी, बैंक खातों और संपत्ति की जब्ती भी हो सकती है। पीड़ित व्यक्ति जब उनकी बातों को सुनकर डर जाता था तो उन्हें यूएस डॉलर भेजने के लिए कहते थे।
आरोपियों द्वारा इस्तेमाल नंबर नकली वीओआईपी नंबर होता था इसलिए शिकायतकर्ता उस पर वापस कॉल नहीं कर पाता था। पुलिस अधिकारियों ने ठगी की रकम करोड़ों में बताई है। जिसकी जांच की जा रही है।
वह उन्हें बताते हैं कि उनके नाम का दवाओं का एक पार्सल जब्त किया गया है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें उनकी गिरफ्तारी, बैंक खातों और संपत्ति की जब्ती भी हो सकती है। पीड़ित व्यक्ति जब उनकी बातों को सुनकर डर जाता था तो उन्हें यूएस डॉलर भेजने के लिए कहते थे।
आरोपियों द्वारा इस्तेमाल नंबर नकली वीओआईपी नंबर होता था इसलिए शिकायतकर्ता उस पर वापस कॉल नहीं कर पाता था। पुलिस अधिकारियों ने ठगी की रकम करोड़ों में बताई है। जिसकी जांच की जा रही है।