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दिल्ली: दिव्यांग बच्चों के लिए वरदान बना अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, 14 बच्चे मुख्यधारा के स्कूलों में हुए शामिल
Mon, 12 Oct 2026 12:24 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 12 Oct 2026 12:24 AM IST
सार
सीबीएम इंडिया ट्रस्ट की एक पहल दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के समान अवसर दे रही है। दक्षिण दिल्ली के खानपुर स्थित प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र के प्रयासों से यह संभव हुआ है। अब तक 14 दिव्यांग बच्चों ने सरकारी और निजी स्कूलों में प्रवेश हासिल किया है।
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दिव्यांग बच्चों के लिए वरदान बना अर्ली इंटरवेंशन सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीबीएम इंडिया ट्रस्ट की एक पहल दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के समान अवसर दे रही है। दक्षिण दिल्ली के खानपुर स्थित प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र के प्रयासों से यह संभव हुआ है। अब तक 14 दिव्यांग बच्चों ने सरकारी और निजी स्कूलों में प्रवेश हासिल किया है।
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केंद्र का मुख्य उद्देश्य बच्चों की दिव्यांगता को शुरुआती वर्षों में पहचानना है। यह उन्हें समय पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराता है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से अलग न हों। अप्रैल 2025 से यह केंद्र 10 वर्ष तक की आयु के बच्चों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसमें ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम, एडीएचडी और चलने-फिरने संबंधी दिव्यांगता वाले बच्चे शामिल हैं। केंद्र से प्रशिक्षित 9 बच्चों ने सरकारी और 5 बच्चों ने निजी स्कूलों में दाखिला लिया है। ये बच्चे अब सामान्य बच्चों के साथ स्कूल जाते हैं और केंद्र पर भी सहयोग पाते हैं। सीबीएम इंडिया ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक सोनी थॉमस ने इस सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और परिवार का सही सहयोग ही वास्तविक बदलाव लाता है।
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सेंटर की कार्यप्रणाली
सेंटर की कार्यप्रणाली के तहत प्रत्येक बच्चे का गहन आकलन किया जाता है। इसके बाद फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट और विशेष शिक्षकों की टीम बनती है। यह टीम बच्चे की जरूरतों के आधार पर व्यक्तिगत शिक्षा एवं थेरेपी योजना तैयार करती है। इस प्रक्रिया में अभिभावकों का परामर्श भी शामिल है। उन्हें घर पर बच्चे को सहयोग करने के तरीके सिखाए जाते हैं।
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अनंत की सफलता
इसी केंद्र की मदद से छह वर्षीय अनंत की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। ऑटिज्म से पीड़ित अनंत ने खानपुर सेंटर में नियमित स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी ली। इससे उसके व्यवहार और भाषा कौशल में अभूतपूर्व सुधार हुआ। परिणामस्वरूप, उसे केंद्रीय विद्यालय की बालवाटिका में प्रवेश मिल गया।