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डूसू चुनाव में फिर अहम होगा जाट-गुर्जर फैक्टर
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डूसू चुनाव में फिर अहम होगा जाट-गुर्जर फैक्टर
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) का बिगुल बज चुका है। राजनीति की शुरुआती पाठशाला माने जाने वाले डूसू चुनाव में भी राष्ट्रीय राजनीति की तरह जातीय समीकरण हावी रहेगा। डूसू का दंगल मुख्य रूप से एबीवीपी व एनएसयूआई के बीच रहता है। दोनों ही संगठनों के संभावित उम्मीदवारों में जाट-गुर्जर समीकरण दिखाई दे रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों संगठनों की ओर से टिकट की दावेदारी कर रहे उम्मीदवारों में ज्यादातर जाट-गुर्जर बिरादरी के प्रत्याशी हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण डीयू में देश के हर कोने, जाति व तबके से छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं, लेकि जब डूसू चुनाव की बात आती है तो जाट-गुर्जर फैक्टर काफी अहम हो जाता है। बीते दो दशकों के चुनाव पर नजर डालें तो डूसू के दंगल में एबीवीपी, एनएसयूआई के जाट-गुर्जर बिरादरी के उम्मीदवार ही टॉप पर रहते हैं। डूसू के जानकारों का कहना है कि आसपास के राज्यों के छात्रों के वोट को पाने में यह फैक्टर बड़ा काम आता है। बाहरी दिल्ली में जाट-गुर्जर का दबदबा रहता है। ऐसे में बाहरी दिल्ली और उसके आसपास के कॉलेजों से इस फैक्टर के कारण संगठनों को काफी वोट मिल जाते हैं।
इस साल के चुनावों में एबीवीपी की ओर से दावेदारी ठोंकने वालों के नामों पर गौर करें तो इसमें जाट, गुर्जर व एससी फैक्टर दिख रहा है। एबीवीपी ने अभी सात संभावित नाम तय किए हैं। इनमें अक्षित दहिया (जाट), तुषार डेढ़ा (गुर्जर), मानसी (एससी), योगित राठी (जाट), जयदीप मान (जाट), प्रदीप तंवर (गुर्जर) व शिवांगी खरवाल के नाम शामिल हैं। इस तरह से संगठन ने तीन जाट, दो गुर्जर और एक एससी को रखा है। अब इनमें से ही कोई चार नाम तय किए जाएंगे। एनएसयूआई के संभावित उम्मीदवारों में आशीष लांबा (जाट), चेतना त्यागी, अभिषेक छपराना (गुर्जर), सुनीत पहल (जाट), संजू खारी (गुर्जर), वैष्णव सिंह (राजपूत) के नाम शामिल हैं।
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) का बिगुल बज चुका है। राजनीति की शुरुआती पाठशाला माने जाने वाले डूसू चुनाव में भी राष्ट्रीय राजनीति की तरह जातीय समीकरण हावी रहेगा। डूसू का दंगल मुख्य रूप से एबीवीपी व एनएसयूआई के बीच रहता है। दोनों ही संगठनों के संभावित उम्मीदवारों में जाट-गुर्जर समीकरण दिखाई दे रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों संगठनों की ओर से टिकट की दावेदारी कर रहे उम्मीदवारों में ज्यादातर जाट-गुर्जर बिरादरी के प्रत्याशी हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण डीयू में देश के हर कोने, जाति व तबके से छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं, लेकि जब डूसू चुनाव की बात आती है तो जाट-गुर्जर फैक्टर काफी अहम हो जाता है। बीते दो दशकों के चुनाव पर नजर डालें तो डूसू के दंगल में एबीवीपी, एनएसयूआई के जाट-गुर्जर बिरादरी के उम्मीदवार ही टॉप पर रहते हैं। डूसू के जानकारों का कहना है कि आसपास के राज्यों के छात्रों के वोट को पाने में यह फैक्टर बड़ा काम आता है। बाहरी दिल्ली में जाट-गुर्जर का दबदबा रहता है। ऐसे में बाहरी दिल्ली और उसके आसपास के कॉलेजों से इस फैक्टर के कारण संगठनों को काफी वोट मिल जाते हैं।
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इस साल के चुनावों में एबीवीपी की ओर से दावेदारी ठोंकने वालों के नामों पर गौर करें तो इसमें जाट, गुर्जर व एससी फैक्टर दिख रहा है। एबीवीपी ने अभी सात संभावित नाम तय किए हैं। इनमें अक्षित दहिया (जाट), तुषार डेढ़ा (गुर्जर), मानसी (एससी), योगित राठी (जाट), जयदीप मान (जाट), प्रदीप तंवर (गुर्जर) व शिवांगी खरवाल के नाम शामिल हैं। इस तरह से संगठन ने तीन जाट, दो गुर्जर और एक एससी को रखा है। अब इनमें से ही कोई चार नाम तय किए जाएंगे। एनएसयूआई के संभावित उम्मीदवारों में आशीष लांबा (जाट), चेतना त्यागी, अभिषेक छपराना (गुर्जर), सुनीत पहल (जाट), संजू खारी (गुर्जर), वैष्णव सिंह (राजपूत) के नाम शामिल हैं।
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