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यात्रियों और अन्य व्यक्तियों की जान खतरे में डालने की इजाजत नहीं: हाईकोर्ट
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि रोडवेज बसों को चलाने वाले किसी भी व्यक्ति को जल्दबाजी और लापरवाही से वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती जिससे यात्रियों और अन्य व्यक्तियों की जान खतरे में पड़े । अदालत ने हरियाणा रोडवेज के चालक को दुर्घटना में निचली अदालत से मिली सजा को बहाल रखते हुए उक्त टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोषी चालक राम किशन की अपील खारिज करते हुए कहा कि इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि याची द्वारा चश्मदीद गवाह के बयानों पर उठाए सवाल में कोई दम नहीं है। ट्रायल कोर्ट ने सभी तथ्य देखने के बाद ही आरोपी को सजा सुनाई है। यह अदालत दोषी की सजा कम करने की इच्छुक नहीं है।
उन्होंने कहा दोषी चालक को मजिस्ट्रेट ने चश्मदीद गवाह के बयानों के आधार पर लापरवाही और तेज रफ्तार से बस चलाने पर दुर्घटना व गैर इरादतन हत्या के आरोप में दो वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। इतना ही नहीं अदालत ने संवाहक के उस तर्क को खारिज कर दिया था कि चालक बस काफी धीरे चला रहा था। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के बाद बस 800 मीटर दूर जा कर रुकी थी यदि बस की रफ्तार कम होती तो वह तुरंत रुक जाती।
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हाईकोर्ट न्यायमूर्ति ने कहा कि इसी प्रकार सेशन कोर्ट ने भी गवाहों के बयानों पर विश्वास कर अपील खारिज करते हुए कहा था कि घटना दोपहर करीब 12 बजे की थी और चालक को सड़क पर पूरी तरह से दिख रहा था। ऐसे में यह तर्क नहीं माना जा सकता कि मोटर साइकिल सवार अचानक बस के आगे आ गया। उन्होंने दोनों निचली अदालतों के फैसले में हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश से इनकार कर दिया।
पेश मामला थाना बदरपुर इलाके का है। आगरा से दिल्ली आ रही हरियाणा रोडवेज की बस ने मोटर साइकिल को पीछे से टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दोनो सवारों की मौत हो गई। गवाहों ने अदालत को बताया कि बस काफी तेज रफ्तार में थी और चालक बस को लापरवाही से चला रहा था।
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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोषी चालक राम किशन की अपील खारिज करते हुए कहा कि इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि याची द्वारा चश्मदीद गवाह के बयानों पर उठाए सवाल में कोई दम नहीं है। ट्रायल कोर्ट ने सभी तथ्य देखने के बाद ही आरोपी को सजा सुनाई है। यह अदालत दोषी की सजा कम करने की इच्छुक नहीं है।
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उन्होंने कहा दोषी चालक को मजिस्ट्रेट ने चश्मदीद गवाह के बयानों के आधार पर लापरवाही और तेज रफ्तार से बस चलाने पर दुर्घटना व गैर इरादतन हत्या के आरोप में दो वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। इतना ही नहीं अदालत ने संवाहक के उस तर्क को खारिज कर दिया था कि चालक बस काफी धीरे चला रहा था। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के बाद बस 800 मीटर दूर जा कर रुकी थी यदि बस की रफ्तार कम होती तो वह तुरंत रुक जाती।
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हाईकोर्ट न्यायमूर्ति ने कहा कि इसी प्रकार सेशन कोर्ट ने भी गवाहों के बयानों पर विश्वास कर अपील खारिज करते हुए कहा था कि घटना दोपहर करीब 12 बजे की थी और चालक को सड़क पर पूरी तरह से दिख रहा था। ऐसे में यह तर्क नहीं माना जा सकता कि मोटर साइकिल सवार अचानक बस के आगे आ गया। उन्होंने दोनों निचली अदालतों के फैसले में हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश से इनकार कर दिया।
पेश मामला थाना बदरपुर इलाके का है। आगरा से दिल्ली आ रही हरियाणा रोडवेज की बस ने मोटर साइकिल को पीछे से टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दोनो सवारों की मौत हो गई। गवाहों ने अदालत को बताया कि बस काफी तेज रफ्तार में थी और चालक बस को लापरवाही से चला रहा था।