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आजादी का 75वां साल: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इसी सत्र से लागू होगा देशभक्ति पाठ्यक्रम

Sat, 07 Aug 2021 12:24 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 07 Aug 2021 12:24 AM IST
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Deshbhakti curriculum in schools from this session
नई दिल्ली। आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य पर वर्तमान शैक्षणिक सत्र से दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में देशभक्ति की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में देशभक्ति पाठ्यक्रम शुरू कर रही है। शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की गवर्निंग कॉउंसिल ने इस पाठ्यक्रम के फ्रेमवर्क को मंजूरी दी। अगले कुछ दिनों में पाठ्यक्रम का फाइनल ड्राफ्ट काउंसिल सदस्यों के विचारों को शामिल करने के बाद जारी कर दिया जाएगा।
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दिल्ली बजट 2021 के दौरान, उपमुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे में देशभक्ति और राष्ट्रीयता की भावना पैदा करने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करने के लिए देशभक्ति पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी।
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शुक्रवार को एससीईआरटी दिल्ली के निदेशक रजनीश कुमार सिंह ने देशभक्ति करिकुलम कमेटी की सिफारिशों के आधार पर देशभक्ति पाठ्यक्रम के फ्रेमवर्क को प्रस्तुत किया। डॉ रेणु भाटिया, प्रधानाचार्र्य, सर्वोदय कन्या विद्यालय मोती बाग और शारदा कुमारी, पूर्व प्रधानाचार्य, डाइट आरके पुरम की अध्यक्षता में कमेटी ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, शिक्षाविदों, सिविल सोसाइटी संगठनों के परामर्श के आधार पर अपनी सिफारिशें पेश कीं।
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उपमुख्यमंत्री ने इसके विजन पर चर्चा करते हुए कहा कि फ्रेमवर्क तीन प्राथमिक लक्ष्यों पर काम करेगा। छात्रों के बीच देश के लिए प्यार और गर्व, अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक बनना, और देश के लिए सर्वस्व देने की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देगा। एनईपी के बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम का उद्देश्य मौलिक कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान की गहरी भावना विकसित करना और अपने देश के प्रति भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के लिए जागरूकता विकसित करना है।

करिकुलम के पठन-पाठन के तौर तरीके राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) 2005 के सिद्धांतों पर आधारित हैं। साथ ही बच्चों पर केंद्रित हैं। ये किताबों और पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली तक सीमित रहने के बजाय बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ने पर केंद्रित हैं।
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