मानवीय सरोकार : जब बुजुर्ग को मुस्लिम पड़ोसियों ने दिया कंधा, एएसआई ने निभाया फर्ज 

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Apr 2021 05:05 AM IST

सार

  • पड़ोसियों ने न सिर्फ कंधा दिया बल्कि श्मशान में अर्थी सजाने से लेकर बाकी क्रिया क्लाप भी किए, अंतिम संस्कार का पूरा खर्चा भी उठाया
  • पिछले साल इसी इलाके में हुआ था दंगा, मुस्लिम पड़ोसी तीन दिनों तक पीड़ित परिवार के घर पहुंचाएंगे खाना, पड़ोसियों ने कहा यह उनका फर्ज
एएसआई फय्याज अहमद
एएसआई फय्याज अहमद - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

कोरोना जैसी महामारी में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां किसी की मौत हो जाने पर उनके अपनों तक ने मृतक से मुंह मोड़ लिया हो। लेकिन कहते हैं न इंसानियत हमेशा रहती है। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कबीर नगर इलाके में देखने को मिला। यहां दंगे वाले एरिया में एक बुजुर्ग हिंदू की मौत हो गई। बुजुर्ग के रिश्तेदारों ने लॉक डाउन व दूसरे बहाने बनाकर मुंह मोड़ लिया। मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहने वाले बुजुर्ग के दोनों बेटे परेशान होने लगे तो इंसानियत का फर्ज निभाते हुए पड़ोसी मुस्लिम परिवार सामने आए। 
विज्ञापन


न सिर्फ इन लोगों ने बुजुर्ग की अर्थी का इंतजाम, सजाने और कंधा दिया, बल्कि श्मशान पहुंचकर उसकी चिता भी सजाई। यहां तक श्मशान घाट के कई क्रियाक्लाप भी किए। परिवार को अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं देने दिए। इतना प्यार पाकर बुजुर्ग के बेटों की आंखों से आंसू छलकने लगे। किसी ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जो शनिवार को खूब वायरल हुई। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल बता रहे हैं। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें तो बस रमजान के महीने में पड़ोसी की सेवा कर सवाब (पुण्य) कमाने का मौका मिला है।


जानकारी के अनुसार बुजुर्ग 60 वर्षीय बलबीर कबीर नगर के उसी मोहल्ले में रहते हैं, जो वर्ष 2020 के फरवरी में सांप्रदायिकता की आग में जल रहा था। बलबीर का परिवार गली नंबर-1 में रहता है। इसके परिवार में दो बेटे अरविंद और अर्जुन व अन्य सदस्य हैं। अरविंद ने बताया कि उसके पिता को हार्ट की बीमारी थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत भी खराब चल रही थी। अचानक शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। लॉक डाउन और कोरोना की बात कर रिश्तेदारों ने घर आने से मना कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। 

बुजुर्ग की मौत का जब उनके पड़ोसियों को पता चला तो फौरन कई परिवार उनके घर पर पहुंचे। मोहल्ले में बलबीर का अकेला परिवार था। वह पड़ोसियों से मिलता-जुलता भी कम था। नासिर चौधरी ने बताया कि इस्लाम में साफ कहा गया है कि यदि उसके पड़ोसी को कोई परेशानी है तो पड़ोसी की रोजी हराम है जब तक वह उसकी परेशानी का हल निकालने की कोशिश न करे।

इसी हक से कई परिवार बलबीर के घर पहुंचे। उसके दोनों बेटों को मदद का भरोसा दिया। बाद में अर्थी का इंतजाम कर उसे सजाया गया। बाद में मुस्लिम पड़ोसियों ने अर्थी को कंधा देकर कबीर लगी के श्मशान घाट तक पहुंचाया। इसके बाद वहां पहुंचकर बुजुर्ग की चिता को सजाने के अलावा कई अन्य काम किए। पड़ोसियों का प्यार देखकर अरविंद और अर्जुन की आंखों से आंसू छलक आए। पड़ोसियों का कहना है कि जैसा कि मुसलमानों में होता है कि जब किसी पड़ोसी की मौत होती है तो तीन दिनों तक उनके पड़ोसी ही उनके घर खाने का इंतजाम करते हैं। बलबीर के घर भी ऐसे ही तीन दिन तक खाना भेजकर पड़ोसी का धर्म निभाया जाएगा।

एएसआई फय्याज अहमद ने निभाया अपना फर्ज

कहते हैं इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, इस बात को गोविंदपुरी थाने में तैनात दिल्ली पुलिस के एएसआई फय्याज अहमद ने सही साबित कर दिखाया है। फय्याज ने अपना इंसानियत का धर्म निभाते हुए कोविड-19 से मरे एक व्यक्ति का हिंदू-रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर मिसाल कायम की।

दरअसल पश्चिम बंगाल में रहने वाले मृतक के परिवार ने दिल्ली आने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद खुद फय्याज ने इस काम का बोझ अपने सिर लिया और ग्रीन पार्क के एक श्मशान घाट में मृतक का अंतिम संस्कार करवाया। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी फय्याज के इस काम की जमकर तारीफ की है।

दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त आरपी मीणा ने बताया कि 19 अप्रैल को गोविंदपुरी थाना पुलिस को सूचना मिली कि तुगलकाबाद एक्सटेंशन के मकान में किसी की मौत हो गई है और दरवाजा अंदर से बद है। सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। दरवाजा तोड़कर शव निकला गया। एम्स मोर्चरी में शव को रखवाकर उसका कोविड जांच के लिए सैंपल भेजा गया।

मृतक की शिनाख्त पश्चिम बंगाल निवासी स्नेहांशु बिसवास (52) के रूप में हुई। परिजनों को फोन पर उसकी मौत की खबर दी गई तो उन्होंने दिल्ली आने से इंकार कर दिया। स्नेहांशु की कोविड रिपोर्ट पॉजीटिव आई। परिजनों ने शव किसी पड़ोसी को सौंपने की बात की। लेकिन कोई भी तैयार नहीं हुआ।

ऐसे समय में एएसआई फय्याज अहमद ने खुद इसकी जिम्मेदारी ली। एंबुलेंस की मदद से वह शव को एम्स मोर्चरी से ग्रीन पार्क के एक श्मशान घाट पर लाए। यहां हिंदू रीति रिवाज से स्नेहांशु का अंतिम संस्कार करवाया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की सूचना दी। सीनियर अधिकारियों का इसका पता चला तो उन्होंने फय्याज की जमकर तारीफ की।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00