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हेराफेरी : हरियाणा के कारोबारी समूह के गुरुग्राम समेत 12 ठिकानों पर आयकर छापा

Fri, 19 Mar 2021 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली 
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 19 Mar 2021 05:48 AM IST
सार

  • मुखौटा कंपनियों के जरिये 70 करोड़ रुपये की हेराफेरी भी पकड़ी 

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Delhi News : income tax raid on haryana business group
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विस्तार

आयकर विभाग ने रियल स्टेट, होटल व्यवसाय और खुदरा शराब कारोबार से जुड़े एक कारोबारी समूह के दर्जन भर ठिकानों पर बृहस्पतिवार को छापे मारे हैं। ये छापे हरियाणा के समालखा, गुरुग्राम, रोहतक और पंचकूला में मारे गए हैं। चेहरा रहित जांच के आकलन नोटिस का अनुपालन नहीं करने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

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दरअसल चेहरा रहित आकलन योजना के तहत नोटिस प्राप्त करने के बावजूद लोग उसका पालन नहीं कर रहे थे। ऐसे ही कुछ लोगों को नोटिस भेजा गया था। डाटा विश्लेषण से इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन्हें नोटिस मिला है, दरअसल वे साधनहीन या बेहद गरीब लोग हैं। आंतरिक जांच में पता चला है कि कारोबारी समूह दरअसल इन लोगों के नाम का इस्तेमाल करता था और समूह के कुछ सदस्यों के बेनामीदार थे। 
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जांच में सामने आया है कि इन लोगों के नाम पर शराब का लाइसेंस लिया गया था और ये समूह के मुख्य सदस्यों के बेनामीदार थे। इन लोगों ने अपने हलफनामे में कहा है कि उनके नाम पर किए जा रहे कारोबार की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। ऐसा लगता है कि अनुसूचित जाति/जनजाति कोटे के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल किया गया हो। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह भी पता चला है कि समूह के सदस्यों ने अपनी बेहिसाबी 70 करोड़ रुपये की नकली अंश पूंजी और असुरक्षित ऋण के जरिये हेराफेरी की।
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अहम सुराग व 36 करोड़ की कर चोरी के सुबूत मिले
तलाशी के दौरान रियायती आवास योजना के तहत कारोबारी समूह सदस्यों के कर्मचारी, रिश्तेदारों और अज्ञात लोगों के नाम पर फ्लैटों की फर्जी बुकिंग के प्रमाण मिले हैं। तलाशी के दौरान कंपनी ने जिन कर्मियों को फ्लैट आवंटित किए थे, उनके बिना भुनाए हुए चेक मिले हैं। बाद में फ्लैट को वास्तविक मालिकों को 6 लाख से 10 लाख के प्रीमियम पर बेच दिया गया। इसके अलावा चार बैंक लॉकर, तीन करोड़ रुपये के बिना ब्योरे के आभूषण भी मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि न केवल इस योजना का दुरुपयोग किया गया बल्कि करीब 36 करोड़ की कर की भी चोरी की गई।

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